अम्बेडकरनगर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, विद्यार्थियों ने दिया संवेदनशीलता और संवाद का संदेश
अम्बेडकरनगर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार, 10 अक्टूबर को महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक भवन में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने, मानसिक परेशानियों को समझने और जरूरत पड़ने पर समय से विशेषज्ञों की सहायता लेने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में एमबीबीएस, पैरामेडिकल और बीएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छात्रों ने नुक्कड़ नाटक और रंगोली के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को प्रस्तुत किया। कॉलेज के चिकित्सकों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में उपस्थित रहकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
नुक्कड़ नाटक से तनाव, चिंता और अवसाद के प्रति किया जागरूक
विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से तनाव, चिंता, अवसाद और आत्महत्या की रोकथाम जैसे गंभीर विषयों पर जागरूकता का संदेश दिया। प्रस्तुतियों में मानसिक परेशानी से गुजर रहे लोगों की भावनाओं को समझने और उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
छात्रों ने समझाया कि मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति को उपेक्षा या तिरस्कार के बजाय सहयोग और संवेदनशील व्यवहार की जरूरत होती है। किसी की परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय उससे सहज संवाद करना और उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण है।
रंगोली प्रतियोगिता में दिखी विद्यार्थियों की रचनात्मकता
कार्यक्रम में आयोजित रंगोली प्रतियोगिता के जरिए विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। रंगों और आकृतियों के माध्यम से उन्होंने जागरूकता, सहयोग और भावनात्मक संवेदनशीलता का संदेश दिया।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बातचीत करने और जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहायता उपलब्ध कराने की भावना प्रमुख रही। उपस्थित चिकित्सकों और शिक्षकों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की।
‘अनुभवों की आवाज सुनी जाए, वास्तविक बदलाव लाया जाए’ पर दिया जोर
कार्यक्रम में ‘अनुभवों की आवाज सुनी जाए, वास्तविक बदलाव लाया जाए’ के संदेश को प्रमुखता दी गई। नुक्कड़ नाटक और अन्य प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने बताया कि मानसिक परेशानी का सामना कर रहे व्यक्तियों के अनुभवों को सुनना और उन्हें सम्मान देना एक संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है।
इस दौरान संदेश दिया गया कि लोगों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे बिना संकोच अपनी परेशानी साझा कर सकें। परिवार, मित्रों और समाज का सहयोग उन्हें सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।
प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने बताया मानसिक स्वास्थ्य का महत्व
महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. मुकेश यादव ने मानसिक स्वास्थ्य की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का सामना करने, अपनी क्षमताओं को पहचानने और समाज में प्रभावी योगदान देने में सक्षम होता है।
उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। डॉ. यादव ने समय पर उपचार और परामर्श लेने की अपील करते हुए मानसिक परेशानियों के प्रति गंभीर एवं सहयोगपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।
परेशानी होने पर चुप्पी के बजाय खुलकर बातचीत का संदेश
विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों में बताया कि मानसिक परेशानी होने पर चुप रहने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति से खुलकर बातचीत करना सहायता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने चिकित्सकीय परामर्श को सामान्य और आवश्यक प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व देने पर भी जोर दिया गया। प्रस्तुतियों के जरिए लोगों को अपनी भावनाओं के प्रति सजग रहने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
लोगों की बात सुनने और समय पर सहायता देने का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में एक संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए लोगों की बात धैर्यपूर्वक सुनने, उनकी भावनाओं का सम्मान करने और समय पर सहायता उपलब्ध कराने का संकल्प दोहराया गया। उपस्थित चिकित्सकों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने विद्यार्थियों की सहभागिता की सराहना की तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।