कलेक्ट्रेट के सामने कार्यकर्ताओं ने की नारेबाजी; विशेष गहन पुनरीक्षण पर रोक, मतपत्र से चुनाव और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की उठाई मांग
अम्बेडकरनगर। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाताओं के नाम विलोपित किए जाने के मुद्दे को लेकर मंगलवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ता अम्बेडकर प्रतिमा के पास एकत्र हुए और चुनाव आयोग की प्रक्रिया के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की मांग की।
कांग्रेस ने मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर उठाए सवाल
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि किसी पात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटने पर उसके मतदान के अधिकार पर सीधा असर पड़ता है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जा रहे हैं।
कांग्रेस ने इसे ‘मतों की चोरी’ बताते हुए मांग की कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले पर्याप्त सत्यापन किया जाए।
EVM की जगह मतपत्र से चुनाव कराने की मांग
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के स्थान पर मतपत्र से चुनाव कराने की मांग भी उठाई।
इसके साथ ही कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े सवालों का स्पष्ट एवं सार्वजनिक जवाब दिया जाना चाहिए।
‘मांगें नहीं मानी गईं तो गांव-गांव तक ले जाएंगे आंदोलन’
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाया जाएगा। पार्टी नेताओं ने जरूरत पड़ने पर सड़क से संसद तक आंदोलन करने और चक्का जाम जैसे कदम उठाने की भी बात कही।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची में पात्र एवं वास्तविक मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर नारेबाजी की।
कांग्रेस की ओर से लगाए गए मतदाता सूची से नाम हटाने और अन्य कथित अनियमितताओं के आरोप राजनीतिक दावे हैं। इन आरोपों पर निर्वाचन आयोग का स्थानीय स्तर का पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है।