सनातन संस्कृति के संवाहक बन रहे युवा, प्रशिक्षण शिविर में मिला संत प्रवर श्री का प्रेरक मार्गदर्शन
चौबेपुर (वाराणसी): 24 से 28 जून तक स्वर्वेद महामंदिर धाम के समीप स्थित सद्गुरु सदाफलदेव आप्त वैदिक गुरुकुलम परिसर में विहंगम योग संत समाज के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय अखिल भारतीय युवा प्रचारक प्रशिक्षण शिविर उत्साह, अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण के बीच निरंतर संचालित हो रहा है।
इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 1,500 युवा सहभागिता कर रहे हैं। प्रशिक्षण संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित किया जा रहा है।
शिविर में प्रतिदिन प्रातःकाल से सायंकाल तक युवाओं को विविध विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। सुयोग्य प्रशिक्षक श्री ललित गुंजन, श्री भारत रत्न, श्री पियूष कुमार एवं श्री अशोक द्वारा स्वर्वेद दर्शन, विहंगम योग साधना, व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, संगठन कौशल, प्रभावी संवाद तथा प्रचार-प्रसार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य युवाओं को सनातन वैदिक संस्कृति, आध्यात्मिक जीवन-मूल्यों और राष्ट्रसेवा के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे समाज में धर्म, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के प्रभावी प्रचारक बन सकें।
शिविर के माध्यम से युवाओं को “आत्मजागरण से राष्ट्रजागरण” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए तैयार किया जा रहा है।
प्रशिक्षण शिविर के चतुर्थ दिवस पर संत प्रवर श्री विज्ञानदेव जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि, “संसार में कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं है। प्रत्येक मनुष्य के भीतर ईश्वर प्रदत्त अपार शक्ति और असीम संभावनाएं विद्यमान हैं। आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने और जागृत करने की है।”
उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सनातन वैदिक संस्कृति के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा सेवा, साधना और सदाचार के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें।
प्रशिक्षण शिविर में उपस्थित युवाओं ने भी राष्ट्र, समाज और मानवता की सेवा के लिए समर्पित भाव से कार्य करने तथा आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का संकल्प दोहराया।