लखनऊ | NHP Bharat Published BY: Himanshu upadhyay
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता-2026 (Uttar Pradesh Wage Code-2026) को मंजूरी दे दी है। मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद लागू होने वाली इस नई व्यवस्था के तहत न्यूनतम मजदूरी का अधिकार अब केवल अनुसूचित नियोजनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी पात्र श्रमिकों को इसका लाभ मिलेगा।
नई संहिता लागू होने के बाद किसी भी नियोजन, उद्योग, संस्थान या कार्यस्थल पर कार्यरत पात्र श्रमिक को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन देना संभव नहीं होगा।
केंद्र की चार श्रम संहिताओं के अनुरूप तैयार
राज्य सरकार ने यह संहिता केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित चार श्रम संहिताओं के अनुरूप तैयार की है। इसमें न्यूनतम मजदूरी, वेतन भुगतान, समान पारिश्रमिक और बोनस से जुड़े चार प्रमुख केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित किया गया है।
कौशल और कार्य के आधार पर तय होगी मजदूरी
नई व्यवस्था में अनुसूचित नियोजन (Scheduled Employment) की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब मजदूरी का निर्धारण कौशल, कार्य की प्रकृति और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर किया जाएगा। साथ ही समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत भी प्रभावी रहेगा।
50% होगा मूल वेतन
नई मजदूरी संहिता के तहत कर्मचारी के कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा मूल वेतन (Basic Pay) होगा। इससे कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) और ग्रेच्युटी जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभों में वृद्धि होगी।
श्रमिकों को मिलेंगे ये प्रमुख अधिकार
नई संहिता के अनुसार—
- सभी पात्र श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी का अधिकार मिलेगा।
- सेवा समाप्त होने पर दो कार्य दिवस के भीतर बकाया भुगतान करना अनिवार्य होगा।
- ओवरटाइम का भुगतान सामान्य मजदूरी की दोगुनी दर से किया जाएगा।
- वैधानिक कटौतियां कुल मजदूरी के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होंगी।
- वेतन भुगतान से पहले कर्मचारी को वेतन पर्ची (Salary Slip) देना अनिवार्य होगा।
- मृत कर्मचारी का बकाया उसके नामित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को दिया जाएगा।
संविदा श्रमिकों को भी राहत
नई संहिता में स्पष्ट किया गया है कि संविदा (Contract) श्रमिकों की मजदूरी और बोनस के भुगतान की अंतिम जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) की होगी। इससे संविदा कर्मचारियों के अधिकारों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नियोक्ताओं को भी मिलेगी सुविधा
सरकार ने नियोक्ताओं के अनुपालन (Compliance) को आसान बनाने के लिए भी कई प्रावधान किए हैं। अब—
- केवल तीन रजिस्टर और 10 प्रपत्रों की व्यवस्था होगी।
- ऑनलाइन विवरणी (Online Returns) दाखिल की जा सकेगी।
- पहली बार उल्लंघन पर उपशमन (Compounding) का प्रावधान रहेगा।
- 'नो पर्सनल ऑफिस कॉन्टैक्ट' सिद्धांत के तहत व्यक्तिगत संपर्क कम किया जाएगा।
- श्रम विवादों में अपील अब हाईकोर्ट के बजाय विभागीय अधिकारियों के समक्ष की जा सकेगी।
नई मजदूरी संहिता लागू होने के बाद प्रदेश के लाखों श्रमिकों और नियोक्ताओं पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।