ब्यूरो चीफ: राहुल द्विवेदी
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने बेरोजगारी और सरकारी भर्तियों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए युवाओं पर फोकस बढ़ाया है। पिछले विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में महज एक सीट पर सिमटने के बाद बसपा इस बार अपने पुराने जनाधार के साथ नए और युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।
सोशल मीडिया के जरिए लगातार राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रख रहीं मायावती ने अब शिक्षित बेरोजगार युवाओं और सरकारी नौकरियों में खाली पदों का मुद्दा उठाया है। इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
खाली सरकारी पदों को भरने की उठाई मांग
मायावती ने बेरोजगार युवाओं से जुड़े आंदोलन का जिक्र करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
उन्होंने भर्तियों को समयबद्ध, पारदर्शी, पेपर लीक और भ्रष्टाचार से मुक्त रखने पर जोर दिया है, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को समय पर रोजगार के अवसर मिल सकें।
युवाओं को राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में लाने की कोशिश
उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे लंबे समय से युवाओं के बीच चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे में बसपा की ओर से सरकारी नौकरियों और भर्ती प्रक्रिया को प्रमुखता दिए जाने को युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
मायावती की रणनीति केवल अपने पारंपरिक मतदाता वर्ग तक सीमित रहने के बजाय युवा, शिक्षित और रोजगार की तलाश कर रहे मतदाताओं को भी पार्टी से जोड़ने की दिशा में दिखाई दे रही है।
2022 में एक सीट पर सिमट गई थी बसपा
उत्तर प्रदेश के 2022 विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था और पार्टी केवल एक विधानसभा सीट जीत सकी थी। ऐसे में 2027 का चुनाव बसपा के लिए संगठन और जनाधार दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पार्टी के सामने अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत रखने के साथ उन मतदाता समूहों तक पहुंचने की चुनौती है, जो पिछले चुनावों में दूसरे राजनीतिक दलों की तरफ गए हैं।
क्या रोजगार बनेगा बसपा का बड़ा चुनावी मुद्दा?
सरकारी नौकरियों, खाली पदों, भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे विषयों को लगातार उठाकर मायावती युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बसपा की मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।
हालांकि 2027 विधानसभा चुनाव में बसपा की औपचारिक चुनावी रणनीति और रोजगार से जुड़े वादों की पूरी तस्वीर पार्टी के घोषणापत्र एवं आगामी घोषणाओं के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल मायावती की सक्रियता से इतना जरूर संकेत मिलता है कि युवा और रोजगार का मुद्दा बसपा की आगामी राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकता है।