उन्नाव में पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, किसान ने मांगी पैमाइश

Unnao

उन्नाव: पुश्तैनी जमीन पर कब्जे के प्रयास का आरोप, किसान ने कहा- दस्तावेज मेरे पास फिर भी मिल रही धमकी; प्रशासन से पैमाइश की मांग

Sep 1, 2026
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पुश्तैनी जमीन पर कब्जे के प्रयास का आरोप, किसान बोला- दस्तावेज मेरे पास फिर भी मिल रही धमकी; प्रशासन से पैमाइश की मांग

शुक्लागंज/उन्नाव। उन्नाव के शुक्लागंज क्षेत्र से सटे कटरी पीपर खेड़ा इलाके में जमीन को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। एक किसान ने कुछ लोगों पर उसकी पुश्तैनी जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास करने और विरोध करने पर कथित रूप से धमकी देने का आरोप लगाया है। किसान का दावा है कि उसके पास जमीन से संबंधित राजस्व एवं अन्य दस्तावेज मौजूद हैं और वह लंबे समय से उक्त जमीन पर अपना अधिकार बताता आ रहा है।

मामले में किसान ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने के साथ राजस्व अभिलेखों के सत्यापन, मौके पर पैमाइश और सीमांकन कराने की मांग की है।

‘दस्तावेज हमारे पास, फिर अपनी जमीन के लिए क्यों परेशान हों?’

पीड़ित किसान का दावा है कि संबंधित जमीन उसकी पुश्तैनी संपत्ति है और उसके पास अपने दावे के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं।

किसान का आरोप है कि इसके बावजूद कुछ प्रभावशाली लोग जमीन पर अपना अधिकार जताते हुए कब्जे का प्रयास कर रहे हैं। विरोध करने पर कथित तौर पर दबाव बनाने और डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया गया है।

किसान का कहना है कि यदि राजस्व अभिलेखों और दस्तावेजों में जमीन पर उसका वैध अधिकार दर्ज है तो उसे अपनी ही जमीन को लेकर इस तरह परेशान क्यों होना पड़ रहा है।

जमीन नहीं देने पर बेदखल कराने की धमकी का आरोप

किसान ने आरोप लगाया है कि जमीन स्वेच्छा से नहीं देने पर प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए उसे जमीन से बेदखल कराने की बात कहकर दबाव बनाने का प्रयास किया गया।

हालांकि, किसान द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। दूसरे पक्ष का विस्तृत पक्ष भी सामने आना बाकी है।

पैमाइश और सीमांकन कराने की मांग

पीड़ित किसान ने प्रशासन से मांग की है कि विवाद का समाधान केवल आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर नहीं, बल्कि आधिकारिक राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर किया जाए।

इसके लिए संबंधित जमीन की खतौनी, गाटा संख्या, राजस्व नक्शा और अन्य अभिलेखों की जांच के साथ मौके पर पैमाइश और सीमांकन कराया जाए।

किसान का कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि जमीन पर कानूनी अधिकार किसका है और मौके पर कब्जे की वास्तविक स्थिति क्या है।

राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव का भी लगाया आरोप

मामले को लेकर किसान ने कुछ और गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उसका दावा है कि जमीन विवाद में शामिल बताए जा रहे लोगों की राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर पकड़ है और इसी प्रभाव का हवाला देकर उस पर दबाव बनाया जा रहा है।

किसान ने कुछ राजनीतिक और प्रशासनिक लोगों पर कथित रूप से दूसरे पक्ष को संरक्षण मिलने की आशंका भी जताई है।

हालांकि, इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी संबंधित राजनेता, अधिकारी अथवा दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर उनका पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।

राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति से खुलेगा सच

जमीन के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े विवाद में राजस्व अभिलेखों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में किसी भी पक्ष के दावे को केवल आरोपों के आधार पर सही या गलत ठहराना उचित नहीं होगा।

राजस्व विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच और मौके की पैमाइश व सीमांकन के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

यदि किसान का दावा रिकॉर्ड में सही पाया जाता है तो उसके कानूनी अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। वहीं, यदि दूसरे पक्ष के पास भी जमीन पर अधिकार से संबंधित वैध दस्तावेज हैं तो उनका परीक्षण भी राजस्व रिकॉर्ड और लागू कानून के अनुसार किया जाना चाहिए।

किसान ने प्रशासन से मांगा न्याय

पीड़ित किसान का कहना है कि वह किसी प्रभावशाली व्यक्ति से विवाद नहीं चाहता, बल्कि जमीन पर अपने कानूनी अधिकार की निष्पक्ष जांच और पुष्टि चाहता है।

किसान ने प्रशासन से कथित धमकी के आरोपों की भी जांच कराने की मांग की है। उसका कहना है कि जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर निगाह

मामला सामने आने के बाद अब निगाहें स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्रवाई पर हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या प्रशासन मौके की पैमाइश और सीमांकन कराकर जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा।

इसके साथ किसान द्वारा लगाए गए धमकी और राजनीतिक-प्रशासनिक प्रभाव के आरोपों की जांच होती है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल किसान द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों तथा दूसरे पक्ष की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। उनका पक्ष सामने आने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा।

रिपोर्ट: छवि राम यादव | NHP Bharat, Unnao

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