बस्ती | NHP Bharat Published By: Ramraj Tiwari
संत कबीर नगर। पवित्र श्रावण मास के अवसर पर ऐतिहासिक एवं पौराणिक तामेश्वरनाथ धाम में आयोजित श्रावण कांवड़िया मेले का रविवार को भव्य शुभारंभ हुआ। सूर्या ग्रुप के चेयरमैन डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी और जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव ने संयुक्त रूप से फीता काटकर तथा भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक कर मेले का विधिवत उद्घाटन किया। इस दौरान पूरा धाम "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से गूंज उठा।
श्रावण मास के पहले प्रमुख आयोजन में दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण शिवभक्ति में सराबोर दिखाई दिया।
आयोजन समिति की ओर से ब्रह्मशंकर भारती एवं पिंटू भारती के नेतृत्व में अतिथियों का ढोल-नगाड़ों, पुष्प मालाओं और पारंपरिक स्वागत के साथ अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर उत्सव स्थल में बदल गया।
अपने संबोधन में डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी ने कहा कि श्रावण मास भगवान भोलेनाथ की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों द्वारा किया जाने वाला जलाभिषेक भारतीय सनातन संस्कृति और प्राचीन धार्मिक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाए रखने पर बल दिया तथा सभी श्रद्धालुओं को श्रावण मास की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर डॉ. चतुर्वेदी ने आयोजन समिति को आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया। साथ ही गोस्वामी समाज के लोगों को दान देकर जरूरतमंदों के बीच नगद सहायता वितरित की, जिससे सामाजिक सेवा और जनकल्याण का संदेश भी दिया गया।
जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव ने श्रद्धालुओं को श्रावण मास की शुभकामनाएं देते हुए आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि तामेश्वरनाथ धाम की धार्मिक परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान है और ऐसे आयोजन समाज में आस्था, एकता और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, श्रद्धालुओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए हर वर्ष की तरह इस बार भी मेले को सफल एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने का संकल्प दोहराया।
श्रावण मास के इस पावन अवसर पर तामेश्वरनाथ धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भगवान शिव के प्रति लोगों की अटूट आस्था और सनातन परंपरा के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण बनी।