सीतापुर। विकासखंड बेहटा और तहसील लहरपुर क्षेत्र के फूलपुर गोनिया गांव के पास शारदा नदी में तेज कटान से नदी किनारे बसे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। लगातार हो रहे कटान के कारण कई घरों पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर बढ़ा और कटान इसी तरह जारी रहा तो नदी का पानी गांव की आबादी तक पहुंच सकता है।
कटान की गंभीर स्थिति को देखते हुए लेखपाल अनुप अवस्थी ने मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। ग्रामीणों ने नदी कटान की जानकारी बांध से संबंधित जेई को भी दी। ग्रामीणों के अनुसार, जेई की ओर से बजट उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की।
खबर के बाद हरकत में आया प्रशासन
शारदा नदी के तेज कटान को लेकर खबर सामने आने के बाद संबंधित विभाग हरकत में आया और फूलपुर गोनिया गांव में राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया गया। कटान प्रभावित स्थान पर नदी की धार को रोकने के प्रयास के तहत पेड़ों की टहनियां लगाई जा रही हैं।
अब देखने वाली बात होगी कि संबंधित विभाग द्वारा पेड़ों की टहनियां लगाकर किया जा रहा यह बचाव कार्य शारदा नदी के कटान पर कितनी प्रभावी रोक लगा पाता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि समय रहते किए जा रहे बचाव कार्य से नदी की धार को आबादी की ओर बढ़ने से रोका जा सकेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि कटान की स्थिति लगातार बनी हुई है और नदी किनारे उनके घर होने के कारण परिवारों को संभावित नुकसान की चिंता सता रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बचाव कार्य को लगातार जारी रखते हुए मौके पर अधिकारियों की टीम भेजकर स्थिति की निगरानी कराई जाए।
नदी किनारे रहने वाले सुरेश सैनी, मेवालाल विश्वकर्मा, सुधीर विश्वकर्मा, सिकेशन भार्गव, रमेश यादव, रामपाल गुप्ता, राजू कुमार बंसल पत्रकार, बुधराम बंसल, घनश्याम बंसल समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके घर शारदा नदी के किनारे स्थित हैं और लगातार हो रहे कटान के कारण खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी लहरपुर और जिलाधिकारी सीतापुर से मांग की है कि कटान प्रभावित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कराकर बचाव कार्य को और प्रभावी बनाया जाए, ताकि नदी की धार को आबादी और घरों तक पहुंचने से रोका जा सके तथा किसी बड़े नुकसान से पहले ग्रामीणों को सुरक्षित किया जा सके।
फिलहाल राहत-बचाव कार्य शुरू होने के बाद ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और कटान की स्थिति पर टिकी हुई हैं।