सीतापुर के शहर कोतवाली क्षेत्र के लोनियनपुरवा मोहल्ले में बाढ़ के पानी में लापता हुए युवक मुनेंद्र कश्यप का शव करीब 24 घंटे बाद शुक्रवार रात लगभग 10 बजे बरामद किया गया। पीएसी की फ्लड यूनिट और गोताखोरों ने कई घंटे तक रेस्क्यू एवं सर्च ऑपरेशन चलाया। लंबी तलाश के बाद मुनेंद्र का शव पानी के बीच झाड़ियों में फंसा मिला। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
जानकारी के मुताबिक मुनेंद्र गुरुवार रात करीब 9:30 बजे कैंची पुल के पास बाढ़ के गहरे पानी में जाने के बाद लापता हो गया था। घटना की जानकारी मिलने के बाद उसकी तलाश शुरू की गई। शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे पीएसी की द्वितीय बटालियन की बाढ़ राहत टीम मौके पर पहुंची। टीम ने नाव और गोताखोरों की मदद से आसपास के इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। पानी की गहराई और बहाव के कारण तलाश में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई घंटे बाद देर रात शव बरामद हुआ।
मृतक की पत्नी नेहा कश्यप ने घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरायन नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण उनका पुराना मकान पहले ही बाढ़ की चपेट में आ गया था, जिसके चलते दंपती दूसरे मकान में किराए पर रह रहे थे। गुरुवार रात मुनेंद्र पुराने मकान की तरफ जाने के लिए बाढ़ के पानी से होकर निकल रहा था।
नेहा का आरोप है कि इसी दौरान मोहल्ले के कुछ लोगों ने मुनेंद्र को चोर समझकर उस पर पत्थर फेंके। उनका दावा है कि पत्थर लगने के बाद मुनेंद्र गहरे पानी की तरफ चला गया और फिर डूबकर लापता हो गया। हालांकि पत्नी की ओर से लगाए गए इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस इन्हें जांच में शामिल कर रही है।
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मुनेंद्र के शराब के नशे में बाढ़ के पानी में जाने की बात सामने आई है। पुलिस को प्रथम दृष्टया मौत डूबने के कारण होने की आशंका है। साथ ही पत्नी की ओर से पत्थर फेंके जाने के आरोप की भी जांच की जा रही है।
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मुनेंद्र की मौत वास्तव में किन परिस्थितियों में हुई और मौत का वास्तविक कारण क्या रहा, इसका स्पष्ट निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा। पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।