सीतापुर: बीकेयू लोकतांत्रिक का धरना, 3 बजे तक मांगें न मानी तो गोमती में प्रदर्शन

Sitapur

सीतापुर में भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक का धरना प्रदर्शन, सुबह 11 बजे से डटे किसान; 3 बजे तक अधिकारी नहीं पहुंचे तो गोमती नदी में धरने की चेतावनी

Oct 13, 2026
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सीतापुर में भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) का धरना-प्रदर्शन, बाढ़ पीड़ित किसानों के लिए मुआवजे और राहत की मांग

सुबह 11 बजे से धरने पर बैठे किसानों ने प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया; फसल नुकसान, कर्ज माफी, बिजली बिल, राशन और ग्रामीण सुविधाओं से जुड़ी मांगें उठाईं, दोपहर 3 बजे तक वार्ता का अल्टीमेटम

सीतापुर, उत्तर प्रदेश। जनपद सीतापुर में किसानों की विभिन्न समस्याओं और बाढ़ से हुए नुकसान को लेकर भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) के बैनर तले किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि भारी बारिश और गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण प्रभावित क्षेत्रों में कृषि फसलों, ग्रामीण आवासों और दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके बावजूद उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

प्रदर्शनकारी किसानों के अनुसार धरना सुबह 11 बजे शुरू हुआ। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन शुरू होने के बाद भी तहसील प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्याएं सुनने के लिए मौके पर नहीं पहुंचा।

इसी बात से नाराज भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) के पदाधिकारियों ने प्रशासन से तत्काल वार्ता की मांग की।

संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि दोपहर 3 बजे तक कोई जिम्मेदार अधिकारी किसानों से बातचीत करने नहीं पहुंचता है, तो प्रदर्शनकारी किसान गोमती नदी में उतरकर अपना विरोध जारी रखेंगे।

हालांकि इस चेतावनी के बाद क्या स्थिति बनी और प्रशासन ने कोई वार्ता की या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सुबह 11 बजे से शुरू हुआ किसानों का धरना

भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) के बैनर तले किसान अपनी मांगों को लेकर सुबह 11 बजे से धरने पर बैठे।

किसानों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ और बारिश के कारण कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हुई हैं।

इनमें फसलों का नुकसान, पशुओं के चारे की कमी, ग्रामीण सड़कों की खराब स्थिति और प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

प्रदर्शनकारी किसानों ने इन समस्याओं का समाधान कराने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की।

तहसील प्रशासन पर किसानों की उपेक्षा का आरोप

धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने तहसील प्रशासन पर उनकी समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

किसानों के अनुसार सुबह 11 बजे से धरना शुरू होने के बावजूद कोई जिम्मेदार अधिकारी उनसे बातचीत करने नहीं पहुंचा।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि किसानों की समस्याओं पर प्रशासन को समयबद्ध तरीके से ध्यान देना चाहिए।

हालांकि प्रशासन की ओर से इस आरोप पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन में रखीं मांगें

भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) की ओर से जिलाधिकारी सीतापुर को संबोधित ज्ञापन में किसानों और ग्रामीण परिवारों की कई समस्याओं का उल्लेख किया गया है।

संगठन ने बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कराने, प्रभावित परिवारों को सरकारी सहायता देने और ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग की है।

इसके अतिरिक्त किसानों ने बैंक ऋण, बिजली बिल और फसल बीमा से संबंधित समस्याओं का समाधान कराने की मांग भी उठाई।

भारी बारिश और गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर से फसलों को नुकसान

किसानों की प्रमुख मांगों में भारी बारिश और गोमती नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण फसलों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा शामिल है।

प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि बाढ़ और जलभराव के कारण प्रभावित किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों का सर्वे कराया जाए और पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।

हालांकि कितने गांवों और कितने हेक्टेयर कृषि भूमि में नुकसान हुआ है, इसका आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।

फसल नुकसान का सर्वे और मुआवजा देने की मांग

किसानों ने मांग की है कि राजस्व और कृषि विभाग की संबंधित टीमें प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करें।

उनका कहना है कि फसल नुकसान का सही आकलन होने से प्रभावित किसानों को सरकारी सहायता दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

किसानों ने यह भी मांग की कि मुआवजे के निर्धारण में वास्तविक नुकसान को ध्यान में रखा जाए।

इस संबंध में प्रशासन की ओर से किसी सर्वे या राहत वितरण की वर्तमान स्थिति की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

बाढ़ प्रभावित गांवों में खाद्यान्न वितरण की मांग

भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) ने बाढ़ प्रभावित गांवों में खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था सुचारू कराने की मांग की है।

संगठन के अनुसार प्रभावित परिवारों तक आवश्यक खाद्य सामग्री समय पर पहुंचनी चाहिए।

किसानों ने कहा कि बाढ़ और जलभराव की स्थिति में ग्रामीण परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई हो सकती है।

ऐसे में प्रशासन को पात्र प्रभावित परिवारों की पहचान कर आवश्यक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग

किसानों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का मुद्दा भी उठाया है।

संगठन का कहना है कि प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था होनी चाहिए।

बारिश और जलभराव की स्थिति में दूषित पानी और स्वच्छता संबंधी समस्याओं के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

किसानों ने प्रशासन से ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

पशुओं के चारे की व्यवस्था करने की मांग

प्रदर्शनकारी किसानों ने पशुपालकों की समस्याओं को भी ज्ञापन में शामिल किया है।

उनका कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

किसानों ने पशुओं में फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग से आवश्यक कदम उठाने की मांग की।

उन्होंने जरूरत के अनुसार पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया।

पशुओं में बीमारियों की रोकथाम पर जोर

भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) ने मांग की कि प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी की जाए।

संगठन का कहना है कि पशुओं में बीमारी फैलने की स्थिति में किसानों और पशुपालकों को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

ऐसे में पशु चिकित्सा विभाग द्वारा समय पर उपचार और आवश्यक रोकथाम के उपाय किए जाने चाहिए।

हालांकि प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं की किसी विशिष्ट बीमारी के फैलने का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।

किसानों के बैंक ऋण माफ करने की मांग

किसानों ने अपने ज्ञापन में बैंक ऋण माफी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है।

उनका कहना है कि बाढ़ और बारिश से फसल प्रभावित होने के कारण किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

संगठन ने सरकार और प्रशासन से प्रभावित किसानों के बैंक ऋण के संबंध में राहत प्रदान करने की मांग की।

हालांकि ऋण माफी का निर्णय संबंधित सरकारी नीतियों और सक्षम प्राधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आता है।

इस संबंध में किसी नई ऋण माफी योजना या प्रशासनिक निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।

बिजली बिल माफ करने की मांग

भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) ने प्रभावित किसानों के बिजली बिल माफ करने की भी मांग की है।

किसानों का कहना है कि फसल नुकसान के बाद बिजली बिल का भुगतान करना आर्थिक रूप से कठिन हो सकता है।

उन्होंने प्रशासन से इस विषय पर सरकार और संबंधित विभाग तक उनकी मांग पहुंचाने का अनुरोध किया।

बिजली बिल माफी या राहत से संबंधित निर्णय लागू सरकारी नियमों और नीतियों के आधार पर ही लिया जा सकता है।

फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने की मांग

किसानों ने फसल बीमा से संबंधित समस्याओं को भी उठाया है।

उनका कहना है कि जिन किसानों की फसलें प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुई हैं, उन्हें पात्रता और योजना के प्रावधानों के अनुसार बीमा लाभ दिलाया जाए।

संगठन ने मांग की कि फसल बीमा से जुड़े दावों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो।

इसके लिए संबंधित बीमा कंपनी, कृषि विभाग और अन्य सक्षम संस्थाओं के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा।

बाढ़ प्रभावित गरीब परिवारों को सरकारी सहायता

किसानों ने बाढ़ से प्रभावित गरीब परिवारों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

संगठन के अनुसार जिन परिवारों को प्राकृतिक आपदा के कारण आर्थिक नुकसान हुआ है, उनकी स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए।

इसके बाद पात्र परिवारों को लागू राहत प्रावधानों के अनुसार सहायता प्रदान की जाए।

किसानों ने कहा कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।

क्षतिग्रस्त मकानों के बदले आवास की मांग

ज्ञापन में बाढ़ और बारिश के कारण क्षतिग्रस्त मकानों का मुद्दा भी शामिल है।

किसानों ने मांग की कि जिन गरीब परिवारों के मकान प्रभावित हुए हैं, उनका सर्वे कराया जाए।

इसके बाद पात्र परिवारों को लागू सरकारी योजनाओं के अंतर्गत आवास या अन्य सहायता उपलब्ध कराई जाए।

हालांकि क्षतिग्रस्त मकानों की संख्या और संबंधित क्षेत्रों का प्रमाणित विवरण उपलब्ध नहीं है।

खराब सड़कों और खड़ंजों की मरम्मत का मुद्दा

ग्रामीण क्षेत्रों में खराब सड़कों और खड़ंजों की समस्या भी किसानों ने उठाई है।

संगठन का कहना है कि क्षतिग्रस्त ग्रामीण मार्गों से लोगों को आवागमन में परेशानी होती है।

किसानों ने प्रशासन से संबंधित सड़कों का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कराने की मांग की।

विशेष रूप से बारिश और बाढ़ से प्रभावित मार्गों की स्थिति का आकलन करने पर जोर दिया गया।

राशन कार्ड संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग

भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) ने पात्र ग्रामीण परिवारों के राशन कार्ड से संबंधित समस्याओं का निस्तारण कराने की मांग की है।

संगठन का कहना है कि जिन पात्र लोगों को राशन कार्ड बनवाने, नाम जोड़ने या अन्य संबंधित कार्यों में परेशानी हो रही है, उनकी समस्याओं का समाधान होना चाहिए।

इसके लिए संबंधित खाद्य एवं रसद विभाग से आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई।

ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति की मांग

किसानों ने ग्रामीण इलाकों में प्रतिदिन 18 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

संगठन के अनुसार बिजली की नियमित उपलब्धता ग्रामीण जीवन और कृषि कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने संबंधित विद्युत विभाग से आपूर्ति व्यवस्था बेहतर बनाने की मांग की।

हालांकि वर्तमान में संबंधित ग्रामीण क्षेत्रों को प्रतिदिन कितने घंटे बिजली मिल रही है, इसका आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने प्रशासन को दिया अल्टीमेटम

धरना-प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने प्रशासन को चेतावनी दी।

उन्होंने कहा कि यदि दोपहर 3 बजे तक तहसील प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी किसानों की समस्याओं पर वार्ता करने नहीं आता है, तो किसान गोमती नदी में उतरकर धरना जारी रखेंगे।

संगठन ने इस चेतावनी के माध्यम से प्रशासन से तत्काल संवाद की मांग की।

हालांकि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का नाम और बयान की सटीक तारीख उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।

गोमती नदी में उतरकर प्रदर्शन की चेतावनी

किसान संगठन की ओर से गोमती नदी में उतरकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई है।

नदी में उतरकर विरोध प्रदर्शन करने की स्थिति में प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा से संबंधित गंभीर जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।

ऐसे में प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच समय रहते संवाद तथा शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित तरीके से समस्या के समाधान का प्रयास महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल यह पुष्टि नहीं हुई है कि किसान वास्तव में नदी में उतरे या प्रशासन ने समयसीमा के भीतर वार्ता की।

प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

किसानों ने आरोप लगाया है कि धरना शुरू होने के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्याएं सुनने नहीं पहुंचा।

हालांकि संबंधित तहसील प्रशासन या जिला प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि ज्ञापन किस अधिकारी को प्राप्त हुआ और उस पर आगे क्या कार्रवाई की गई।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और आंदोलन की अद्यतन स्थिति मिलने के बाद इन तथ्यों की पुष्टि की जा सकेगी।

किसानों की प्रमुख मांगों पर नजर

भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) ने बाढ़ और ग्रामीण समस्याओं से जुड़े कई मुद्दे उठाए हैं।

इनमें फसल नुकसान का मुआवजा, खाद्यान्न वितरण, स्वास्थ्य सेवाएं, पशुओं के चारे की व्यवस्था, ऋण और बिजली बिल माफी, फसल बीमा, आवास सहायता, सड़क मरम्मत, राशन कार्ड तथा बिजली आपूर्ति शामिल हैं।

संगठन ने इन मांगों के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाने की मांग की है।

वार्ता और समाधान की मांग के साथ धरना

सीतापुर में भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) के बैनर तले किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया।

किसानों का आरोप है कि सुबह 11 बजे से प्रदर्शन शुरू होने के बावजूद तहसील प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी उनसे बातचीत करने नहीं पहुंचा।

संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने दोपहर 3 बजे तक वार्ता नहीं होने पर गोमती नदी में उतरकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी।

फिलहाल प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और निर्धारित समयसीमा के बाद आंदोलन की स्थिति की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

किसानों की मांगों पर प्रशासनिक वार्ता और संबंधित विभागों की कार्रवाई से आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

NHP Bharat News | सीतापुर, उत्तर प्रदेश

Shubham Awasthi
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Shubham Awasthi
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