शमसाबाद में मकान तुड़वाने की कथित धमकी का वीडियो वायरल,

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शमसाबाद में वायरल वीडियो पर बवाल: ग्रामीणों के मकान तुड़वाने की कथित बात, ग्राम सचिव ने कहा-

Aug 26, 2026
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ग्राम पंचायत सेवला गौरवा के गढ़ी ठाकुर दास गांव का मामला; वायरल वीडियो में 143 के मानकों और अनुमति का जिक्र, ग्रामीणों ने पंचायत के विकास कार्यों पर भी उठाए सवाल

शमसाबाद/आगरा। ब्लॉक शमसाबाद की ग्राम पंचायत सेवला गौरवा के गढ़ी ठाकुर दास गांव से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में ग्राम सचिव ग्रामीणों के मकानों और उनके सामने बने रैंप को लेकर नियमों तथा कथित रूप से '143 के मानकों' और अनुमति का हवाला देते हुए कार्रवाई की बात करते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में ग्राम प्रधान से जेसीबी बुलवाकर निर्माण हटवाने संबंधी बातचीत भी सुनाई देने का दावा किया जा रहा है।

वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि किसी मकान, रैंप अथवा अन्य निर्माण को नियमों के विरुद्ध पाया जाता है तो उसे हटाने या ध्वस्त करने के लिए सक्षम प्राधिकारी कौन है और इसके लिए निर्धारित कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया क्या है?

हालांकि वायरल वीडियो के कुछ अंशों के आधार पर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। वहीं ग्राम सचिव रवि यादव ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी बात पूरे मकान को गिराने को लेकर नहीं, बल्कि घरों के सामने बने रैंप को हटाने के संदर्भ में थी।

वायरल वीडियो में जेसीबी बुलाने की कथित बात

वायरल वीडियो में गांव के निर्माण को लेकर नियम और अनुमति की चर्चा होती दिखाई दे रही है। इसी बातचीत के दौरान जेसीबी बुलाकर निर्माण हटाने की कथित बात सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई निर्माण नियमों के विपरीत पाया भी जाता है तो संबंधित व्यक्ति को नियमानुसार सूचना अथवा नोटिस देकर सक्षम स्तर से कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की है कि वायरल वीडियो के पूरे संदर्भ और कार्रवाई के अधिकार की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाए।

'143 के मानकों' के जिक्र ने खड़े किए सवाल

वीडियो में कथित रूप से '143 के मानकों' का जिक्र किए जाने के बाद ग्रामीण इस बात की स्पष्ट जानकारी चाहते हैं कि संबंधित मामले में किस नियम अथवा प्रावधान का हवाला दिया जा रहा था और वह गांव में बने मकानों या रैंप पर किस तरह लागू होता है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित निर्माण के संबंध में कोई जांच हुई थी या नहीं और यदि कार्रवाई प्रस्तावित थी तो उसके लिए कोई लिखित नोटिस अथवा आदेश जारी किया गया था या नहीं।

नाली निर्माण की मांग पर फंड की बात

वायरल वीडियो में ग्रामीणों की ओर से गांव में नाली निर्माण की आवश्यकता का मुद्दा भी उठता दिखाई देता है। इस दौरान ग्राम सचिव द्वारा कथित तौर पर फंड उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाती है।

इसी को लेकर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि गांव में जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए यदि धन की समस्या है तो निर्माण हटाने के लिए जेसीबी बुलाने संबंधी बातचीत किस प्रक्रिया के तहत की जा रही थी।

हालांकि जेसीबी की व्यवस्था, उसके लिए धन की उपलब्धता और वायरल बातचीत के पूरे संदर्भ की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

पंचायत के विकास कार्यों की जांच की भी उठी मांग

विवाद सामने आने के बाद कुछ ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि निजी निर्माण के मामले में नियम और मानकों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है तो पंचायत स्तर पर सरकारी धन से कराए गए विकास कार्यों में भी निर्धारित मानकों के अनुपालन की जांच होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत में कराए गए निर्माण और विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिससे स्थिति स्पष्ट हो सके।

यह ग्रामीणों की मांग और आरोप हैं; पंचायत के विकास कार्यों में किसी अनियमितता की पुष्टि किसी सक्षम जांच रिपोर्ट के आधार पर ही की जा सकती है।

ग्रामीणों से संवाद के तरीके पर भी नाराजगी

मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल ग्रामीणों से संवाद के तरीके को लेकर भी उठाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के मकान के सामने बने रैंप या अन्य निर्माण को लेकर शिकायत मिली थी तो नियमों के अनुसार जांच और आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी।

ग्रामीणों का आरोप है कि वीडियो में जिस लहजे में जेसीबी से निर्माण हटवाने की बात कही जा रही है, उससे लोगों में नाराजगी पैदा हुई।

IGRS पर मिली थी शिकायत: ग्राम सचिव

मामले में ग्राम सचिव रवि यादव ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि करीब 20 से 25 दिन पहले IGRS के माध्यम से पिंकेश नाम के शिकायतकर्ता की शिकायत प्राप्त हुई थी। उनके मुताबिक शिकायत के निस्तारण के क्रम में गांव में जांच और कार्रवाई को लेकर बातचीत हुई थी।

ग्राम सचिव का कहना है कि वायरल वीडियो में उनकी बात का आशय ग्रामीणों के पूरे मकान गिराने से नहीं था। उनके अनुसार चर्चा घरों के सामने बने रैंप हटाने को लेकर थी और उसी संदर्भ में कार्रवाई की बात कही गई थी।

क्या नोटिस जारी हुआ था? जांच में स्पष्ट हो सकते हैं कई सवाल

वीडियो वायरल होने के बाद अब कई सवालों के जवाब प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट होने बाकी हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह शामिल है कि IGRS पर दर्ज मूल शिकायत किस निर्माण को लेकर थी, मौके पर जांच में क्या पाया गया, संबंधित ग्रामीणों को कोई लिखित नोटिस दिया गया था या नहीं और वीडियो में बताए जा रहे '143 के मानकों' का वास्तविक संदर्भ क्या था।

यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि जेसीबी से हटाने की बात केवल मकानों के सामने बने कथित रैंप के लिए कही गई थी या बातचीत का कोई अन्य संदर्भ था।

फिलहाल वायरल वीडियो और ग्राम सचिव की सफाई—दोनों पक्ष सामने हैं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत के निस्तारण में निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं और वायरल वीडियो में सामने आई बातचीत का पूरा संदर्भ क्या था।

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