स्वर्वेद महामंदिर धाम में राष्ट्रभावना, यज्ञ, ध्यान और आत्मबोध का अनुपम संगम
सद्गुरु कबीर साहेब के प्रकट्य महोत्सव के द्वितीय दिवस दिखा आध्यात्मिकता और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत समन्वय
चौबेपुर, वाराणसी: सद्गुरु कबीर साहेब के प्रकट्य महोत्सव के द्वितीय दिवस स्वर्वेद महामंदिर धाम में आध्यात्मिकता, राष्ट्रभक्ति और वैदिक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरे दिन धाम श्रद्धा, साधना, सेवा और आत्मबोध की दिव्य चेतना से आलोकित रहा।
सद्गुरु वंदना और भजनों से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल सद्गुरु वंदना, भावभेदिक भजनों, साखी एवं रमैनी पाठ से हुआ। सद्गुरु कबीर साहेब की अमृतवाणी के गायन एवं चिंतन से पूरा वातावरण भक्तिरस और आत्मचेतना से सराबोर हो गया।
श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ सत्संग में सहभागिता करते हुए आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
राष्ट्रगान से गूंजा पूरा परिसर
दोपहर के सत्र का आरंभ राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत वातावरण में हुआ। उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने एक स्वर में राष्ट्रगान का गायन कर राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण व्यक्त किया।
इस अवसर पर पूरे परिसर में राष्ट्रभक्ति की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने बताई यज्ञ की महिमा
इसके उपरांत संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने यज्ञ की महत्ता पर प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि:
“यज्ञ केवल अग्नि में आहुति देने का अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपने अहंकार, स्वार्थ और दुर्गुणों का समर्पण कर लोकमंगल एवं आत्मकल्याण का दिव्य संकल्प है।”
उन्होंने बताया कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का प्राण है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र—तीनों के जीवन में शुद्धता, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
वैदिक यज्ञ में श्रद्धालुओं ने दी आहुति
उद्बोधन के बाद एक-कुण्डीय वैदिक यज्ञ सम्पन्न हुआ। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धापूर्वक आहुतियां अर्पित कीं।
सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से “यज्ञाय भावना” का उच्चारण करते हुए विश्वशांति, राष्ट्र की समृद्धि और समस्त प्राणिमात्र के कल्याण की मंगलकामना की।
सामूहिक ध्यान में मिली आत्मचेतना की अनुभूति
कार्यक्रम के अगले चरण में संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के सान्निध्य में सामूहिक ध्यान का आयोजन किया गया।
ध्यान की क्रमबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से साधकों को अंतर्मुख होकर आत्मचेतना का अनुभव करने का मार्गदर्शन दिया गया। कुछ समय के लिए पूरे सभागार में अद्भुत शांति, एकाग्रता और आध्यात्मिक अनुभूति का वातावरण व्याप्त हो गया।
श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद
कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने संत प्रवर श्री के दिव्य दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
पूरे दिन स्वर्वेद महामंदिर धाम श्रद्धा, साधना और सेवा की दिव्य ऊर्जा से प्रकाशित रहा। साथ ही सद्गुरु कबीर साहेब का सार्वभौमिक संदेश—मानवता, प्रेम, आत्मज्ञान और राष्ट्रनिर्माण—जन-जन तक पहुंचता रहा।