प्रभावित ग्रामीणों से जमा कराए जा रहे आवश्यक दस्तावेज, किसानों का कहना—पानी उतरने के बाद ही स्पष्ट होगा फसलों का वास्तविक नुकसान।
सिधौली, सीतापुर। क्षेत्र में बाढ़ और लगातार जलभराव से प्रभावित ग्रामीणों की सहायता के लिए राहत कैंप लगाए जा रहे हैं। इन कैंपों में ग्रामीणों से आवश्यक दस्तावेज जमा कराए जा रहे हैं, ताकि नुकसान का आकलन कर राहत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। वहीं, लंबे समय से खेतों में पानी भरा होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है।
चरी समेत अन्य फसलों को नुकसान
ग्रामीणों के अनुसार, खेतों में लगातार पानी भरा रहने से चरी समेत अन्य फसलें खराब हुई हैं। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में लगाई गई लागत के बाद अब जलभराव से आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
खेतों में पानी बने रहने से प्रभावित फसलों की स्थिति का ठीक से निरीक्षण भी नहीं हो पा रहा है। ऐसे में किसान पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं।
पानी निकलने के बाद होगा नुकसान का सही आकलन
किसानों ने बताया कि फिलहाल खेतों में पानी भरा होने के कारण यह स्पष्ट करना मुश्किल है कि कितने क्षेत्र में फसल बर्बाद हुई है। पानी पूरी तरह निकलने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी और नुकसान का सही आकलन हो सकेगा।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पानी उतरने के बाद संबंधित विभाग की टीम खेतों का मौके पर सर्वे करे, ताकि प्रभावित किसानों के नुकसान का विवरण दर्ज किया जा सके।
पानी की निकासी और उचित राहत की मांग
प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से खेतों से पानी की निकासी की व्यवस्था जल्द कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जलभराव की समस्या दूर होने से खेतों की स्थिति स्पष्ट होगी और आगे की खेती की तैयारी में भी मदद मिलेगी।
किसानों ने फसल नुकसान का सर्वे कराकर उचित राहत एवं मुआवजा दिलाने की मांग भी की है। राहत कैंपों के माध्यम से दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया चल रही है, जबकि किसानों को नुकसान के आकलन और सहायता का इंतजार है।