महोली में वर्ष 2020 में हुई थी तीन वर्षीय बच्ची की हत्या, कोर्ट ने दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया
सीतापुर। महोली कोतवाली क्षेत्र में करीब छह साल पहले हुई तीन वर्षीय मासूम बच्ची महक की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी कमलेश को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। बुधवार दोपहर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-01 ने मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद कमलेश को हत्या के अपराध में दोषी मानते हुए उम्रकैद और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
पुलिस के अनुसार मामले में की गई विवेचना, जुटाए गए साक्ष्यों और न्यायालय में अभियोजन की प्रभावी पैरवी के बाद फैसला आया। करीब छह साल पुराने इस मामले में अदालत के समक्ष गवाहों के बयान के साथ पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित विभिन्न साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे।
24 फरवरी 2020 की शाम घर के बाहर खेल रही थी महक
घटना 24 फरवरी 2020 की शाम करीब 6 बजे की बताई गई है। महोली क्षेत्र के महसुनियागंज ठाकुरन टोला निवासी कमलेश पुत्र रामस्वरूप पर अपने पड़ोसी की तीन वर्षीय बेटी महक की हत्या करने का आरोप लगा था।
घटना के समय तीन वर्षीय महक अपने घर के बाहर खेल रही थी। अभियोजन के मुताबिक इसी दौरान कमलेश बच्ची को वहां से ले गया और घर के सामने बने पानी से भरे टैंक में डाल दिया।
भाई आदर्श ने बच्ची को पानी में डूबते देखा
घटनाक्रम के दौरान महक के भाई आदर्श ने उसे पानी से भरे टैंक में डूबते हुए देख लिया था। इसके बाद उसने शोर मचाकर परिवार के लोगों को इसकी जानकारी दी।
बच्ची के पानी में गिरने की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और महक को टैंक से बाहर निकाला। उसकी हालत गंभीर देखते हुए परिवार के लोग तत्काल उपचार के लिए अस्पताल लेकर रवाना हुए।
जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने किया था मृत घोषित
परिजन तीन वर्षीय महक को आनन-फानन में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। चिकित्सकों ने जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया था।
तीन साल की मासूम की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया था। मामले की जानकारी पुलिस को दी गई, जिसके बाद महोली पुलिस ने हत्या से संबंधित प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की।
पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर कोर्ट में दाखिल किया आरोप पत्र
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनाक्रम से संबंधित साक्ष्यों को जुटाया। विवेचना पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
इसके बाद अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को साबित करने के लिए प्रत्यक्ष और दस्तावेजी साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष रखा गया।
आठ गवाहों के दर्ज कराए गए बयान
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से वादी तुलसीराम, राधा और अभय कुमार राय समेत कुल आठ गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए।
गवाहों के बयानों के साथ घटना से संबंधित अन्य दस्तावेज भी अदालत के सामने प्रस्तुत किए गए। इन साक्ष्यों को मुकदमे की सुनवाई के दौरान न्यायालय द्वारा विचार में लिया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत 13 साक्ष्य कोर्ट में पेश
पुलिस के अनुसार अभियोजन की ओर से न्यायालय के समक्ष तहरीर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित कुल 13 साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। इन साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत में मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी।
करीब छह साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-01 ने मामले में अपना फैसला सुनाया।
हत्या का दोषी करार, आजीवन कारावास की सजा
अदालत ने कमलेश को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
घटना के समय भारतीय दंड संहिता (IPC) लागू थी, इसलिए मुकदमे में हत्या से संबंधित IPC की धारा 302 के तहत सजा सुनाई गई।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत की गई प्रभावी पैरवी
पुलिस के अनुसार मुकदमे को ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी के लिए शामिल किया गया था। डीजीपी के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत न्यायालय में मामले से संबंधित साक्ष्यों और गवाहों को प्रस्तुत करते हुए अभियोजन की ओर से पैरवी की गई।
पुलिस ने इस फैसले को गुणवत्तापूर्ण विवेचना और न्यायालय में प्रभावी पैरवी का परिणाम बताया है। अदालत के फैसले के साथ करीब छह साल पुराने मासूम महक हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।