सीतापुर जिला अस्पताल में शुक्रवार देर रात करीब 10:30 बजे कारागार राज्यमंत्री सुरेश राही अचानक पहुंचे। एक मरीज का हाल जानने आए राज्यमंत्री ने इमरजेंसी सहित अस्पताल की विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने मरीजों और तीमारदारों से बातचीत कर उपचार, दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी के बारे में जानकारी ली। इस दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं पर उन्होंने नाराजगी जताई।
राज्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अस्पताल में चार-पांच बाहरी लोग काम करते पाए गए, जो कथित तौर पर मरीजों से पैसे वसूलने के साथ दवाइयां देने और इंजेक्शन लगाने का काम कर रहे थे। उनके मुताबिक, अस्पताल प्रशासन से इन लोगों के बारे में पूछने पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। उन्होंने बताया कि उनके पहुंचते ही कुछ लोग वहां से चले गए। मंत्री ने संबंधित लोगों के वीडियो बनाए जाने की बात भी कही।
बाढ़ के बीच बढ़े मरीज, पर्याप्त डॉक्टरों की मौजूदगी पर सवाल
सुरेश राही ने कहा कि बाढ़ के कारण इन दिनों जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी हुई है। निरीक्षण के दौरान उनके सामने करीब 50 बुखार पीड़ित मरीज पहुंचे। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि मरीजों के दबाव के बावजूद रात के समय पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और फार्मासिस्ट उपलब्ध नहीं थे।
राज्यमंत्री ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कम से कम दो-तीन डॉक्टर और तीन-चार फार्मासिस्ट की ड्यूटी होनी चाहिए, ताकि मरीजों को समय पर इलाज और दवाएं मिल सकें। उन्होंने अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।
सीएमएस के लखनऊ में उपचार कराने पर की टिप्पणी
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. इंद्र सिंह के संबंध में राज्यमंत्री ने कहा कि उन्हें उनके बीमार होने और लखनऊ में भर्ती होने की जानकारी मिली है। राही ने कहा कि उन्हें जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर भरोसा है और वह स्वयं भी यहां इलाज कराने आते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने सीएमएस के लखनऊ में उपचार कराने पर सवाल उठाया।
मरीजों को लखनऊ रेफर करने पर जताई नाराजगी
राज्यमंत्री ने जिला अस्पताल से मरीजों को लगातार लखनऊ रेफर किए जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल का दबाव कम करने के लिए मरीजों को रेफर किया जा रहा है।
उन्होंने अस्पताल प्रशासन से व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता जताई। राज्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के दौर में मरीजों का दबाव बढ़ने के कारण पर्याप्त डॉक्टर, फार्मासिस्ट और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता जरूरी है, जिससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार मिल सके।