रिपोर्ट: अंकुश सिंह | जिला प्रयागराज
प्रयागराज। स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल के विस्तार और उसे बेहतर चिकित्सा सुविधाओं से लैस करने की योजना के तहत जिला प्रशासन ने अस्पताल की लीज भूमि पर बने सरकारी आवासों को खाली कराने की कार्रवाई तेज कर दी है। 22 से अधिक सरकारी आवासों को खाली कराया जाना है, जबकि इनमें रह रहे 19 अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी है। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है।
प्रशासनिक, पुलिस और शिक्षा समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवंटित इन सरकारी आवासों को खाली कराने के बाद संबंधित भूमि को SRN अस्पताल के विस्तार के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
अस्पताल के विस्तार से संबंधित कार्यों की प्रगति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट भी लगातार नजर बनाए हुए है।
19 अधिकारियों-कर्मचारियों को नोटिस, 22 आवास खाली कराने की तैयारी
SRN अस्पताल के लिए लीज पर दी गई भूमि के एक हिस्से पर सरकारी आवास बने हुए हैं। अस्पताल विस्तार के लिए इस जमीन की आवश्यकता को देखते हुए इन आवासों को खाली कराने की प्रक्रिया चल रही है।
जानकारी के अनुसार, संबंधित परिसर में कुल 22 सरकारी बंगले/आवास चिह्नित किए गए हैं। इनमें रह रहे 19 अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं।
इसके साथ ही ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची भी तैयार की जा रही है, जिनका प्रयागराज से दूसरे जनपदों में स्थानांतरण हो चुका है, लेकिन उन्होंने अब तक आवंटित सरकारी आवास खाली नहीं किए हैं।
15 अगस्त तक आवास खाली करने के दिए गए थे निर्देश
सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह के अनुसार, हाईकोर्ट के निर्देशों के क्रम में संबंधित सरकारी आवास आवंटियों को 15 अगस्त तक परिसर खाली कर निजी आवास में जाने के लिए कहा गया था।
अब निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद प्रशासन की ओर से आवास खाली कराने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
आवास खाली होने के बाद पात्र अधिकारियों को उपलब्धता और प्राथमिकता के आधार पर दूसरे सरकारी आवास आवंटित किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
दो चरणों में हुई जमीन की नापजोख
अस्पताल परिसर की लीज भूमि और उस पर बने सरकारी आवासों को लेकर प्रशासन ने दो चरणों में नापजोख कराई है।
पहले चरण में करीब 18,700 वर्गमीटर भूमि चिह्नित की गई। इसके बाद दूसरे चरण में करीब 31,314 वर्गमीटर जमीन की नापजोख किए जाने की जानकारी है।
इस क्षेत्र में कुल 22 सरकारी बंगले शामिल बताए गए हैं। इन आवासों को खाली कराने के बाद जमीन अस्पताल की विस्तार योजना के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।
AIIMS की तर्ज पर सुविधाएं विकसित करने की योजना
SRN अस्पताल प्रयागराज और आसपास के कई जिलों के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण सरकारी चिकित्सा केंद्र है। अस्पताल में मरीजों का दबाव देखते हुए इसके विस्तार और चिकित्सा सुविधाओं को और बेहतर बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
योजना के तहत अस्पताल को AIIMS की तर्ज पर बेहतर एवं विस्तारित चिकित्सा सुविधाओं से लैस करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए अतिरिक्त जमीन उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही विस्तार की प्रक्रिया
SRN अस्पताल के विस्तार से जुड़े मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत ने डॉ. अरविंद गुप्ता व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने सरकारी आवासों में रह रहे पात्र अधिकारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने और अस्पताल विस्तार के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है।
पांच अधिकारियों को नए सरकारी आवास आवंटित
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि पांच अधिकारियों को नए सरकारी आवास आवंटित किए जा चुके हैं।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को नए आवासों का कब्जा 48 घंटे के भीतर दिलाने का निर्देश दिया, ताकि पुराने आवास खाली कराकर अस्पताल विस्तार से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
इसके साथ ही जिलाधिकारी प्रयागराज को मामले में हुई प्रगति से संबंधित रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
विस्तृत हलफनामा नहीं आने पर अदालत ने जताई नाराजगी
पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के लिए छह सप्ताह का समय दिया था। इसके बावजूद विस्तृत हलफनामा दाखिल नहीं किए जाने को लेकर अदालत ने नाराजगी जताई।
अस्पताल विस्तार की गति को लेकर कोर्ट ने संबंधित विभागों से स्पष्ट प्रगति रिपोर्ट मांगी है। इससे अस्पताल से जुड़े निर्माण और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा होने की संभावना है।
चिल्ड्रेन विंग में लिफ्ट का काम नहीं रुकने देने का निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान अस्पताल के चिल्ड्रेन विंग में लिफ्ट लगाने का मुद्दा भी सामने आया। संबंधित निर्माण एजेंसी की ओर से धनराशि उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई।
इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि लिफ्ट लगाने का काम धन की कमी के कारण नहीं रुकना चाहिए। अदालत ने भुगतान की व्यवस्था राज्य सरकार के स्तर से सुनिश्चित करने की बात कही।
निर्माण कार्य की धीमी प्रगति पर भी हाईकोर्ट सख्त
अस्पताल में चल रहे निर्माण और विस्तार कार्यों की धीमी गति को लेकर भी हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। अदालत ने संबंधित निगम के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर प्रगति की स्थिति बताने का निर्देश दिया है।
अब सरकारी आवास खाली कराने से लेकर निर्माण कार्य और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार तक की प्रक्रिया पर अदालत की निगरानी बनी हुई है।
सरकारी आवासों को खाली कराने के बाद उपलब्ध होने वाली जमीन SRN अस्पताल के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। प्रशासनिक कार्रवाई पूरी होने के बाद अस्पताल के प्रस्तावित विस्तार कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।