वृन्दावन में फलाहारी महाराज को दिया सनातन धर्म रत्न सम्मान

Mathura

वृन्दावन में फलाहारी महाराज को दिया सनातन धर्म रत्न सम्मान

Oct 12, 2026
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वृंदावन में दिनेश फलाहारी महाराज को 'ब्रज रत्न' सम्मान, संतों ने विवाद समाप्त करने की अपील की

राधा कुटी आश्रम में आयोजित सम्मान समारोह में संत-महंतों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में दिनेश फलाहारी के प्रयासों की सराहना की, प्रेमानंद महाराज को बताया पूजनीय संत

वृंदावन, मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के पक्षकार दिनेश फलाहारी महाराज को वृंदावन स्थित राधा कुटी आश्रम में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में 'ब्रज रत्न' सम्मान से सम्मानित किया गया। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों से जुड़े संतों, महंतों, महामंडलेश्वरों तथा धर्माचार्यों ने भाग लिया।

सम्मान समारोह के दौरान दिनेश फलाहारी महाराज ने संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े हालिया विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वह किसी भी संत का अपमान नहीं कर सकते और प्रेमानंद महाराज उनके लिए परम संत हैं।

दिनेश फलाहारी महाराज के अनुसार उनकी पूर्व टिप्पणी प्रेमानंद महाराज के बारे में नहीं, बल्कि उनसे जुड़े कुछ सहयोगियों के व्यवहार के संबंध में थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत कर विवाद का रूप दे दिया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित कई संतों ने दिनेश फलाहारी महाराज के धार्मिक प्रयासों की सराहना की और संत समाज से आपसी मतभेद समाप्त करने की अपील की।

राधा कुटी आश्रम में हुआ सम्मान समारोह

वृंदावन के राधा कुटी आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में दिनेश फलाहारी महाराज को 'ब्रज रत्न' सम्मान प्रदान किया गया।

आयोजकों के अनुसार समारोह में बड़ी संख्या में संत-महंत, महामंडलेश्वर, आचार्य और विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित न्यायिक मामले में दिनेश फलाहारी महाराज की भूमिका का उल्लेख किया।

कई संतों ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक विषयों पर मतभेद होने के बावजूद संत समाज में संवाद और आपसी सम्मान बना रहना चाहिए।

'मैं कभी किसी संत का अपमान नहीं कर सकता' — दिनेश फलाहारी

सम्मान समारोह में दिनेश फलाहारी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि वह किसी भी संत के बारे में अपमानजनक टिप्पणी नहीं कर सकते।

उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें परम संत बताया।

दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि उन्होंने प्रेमानंद महाराज के विषय में कोई गलत बयान नहीं दिया था।

उनके अनुसार उन्होंने प्रेमानंद महाराज से जुड़े कुछ लोगों के व्यवहार को लेकर अपनी बात रखी थी, लेकिन उस टिप्पणी को विवाद का रूप दे दिया गया।

उन्होंने अपने बहिष्कार संबंधी कथित घोषणाओं पर भी आपत्ति जताई।

प्रेमानंद महाराज को बताया पूजनीय संत

दिनेश फलाहारी महाराज ने स्पष्ट किया कि वह संत प्रेमानंद महाराज का सम्मान करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज के प्रति उनके मन में किसी प्रकार का अनादर नहीं है।

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य संतों ने भी प्रेमानंद महाराज को पूजनीय संत बताते हुए दोनों पक्षों से जुड़े विवाद को समाप्त करने की आवश्यकता जताई।

संतों का कहना था कि धार्मिक समाज में किसी विषय पर मतभेद होने पर संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए।

सहयोगियों के व्यवहार पर टिप्पणी को लेकर विवाद

दिनेश फलाहारी महाराज ने आरोप लगाया कि उनके एक बयान को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया गया।

उनके अनुसार उनकी आपत्ति कुछ सहयोगियों के व्यवहार को लेकर थी, न कि प्रेमानंद महाराज के व्यक्तित्व या धार्मिक कार्यों को लेकर।

उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उनके विरुद्ध भ्रामक प्रचार कर रहे हैं।

हालांकि इन आरोपों और कथित बहिष्कार संबंधी घोषणाओं की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

इस विवाद पर संबंधित दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया भी उपलब्ध कराए गए विवरण में शामिल नहीं है।

संतों ने दिनेश फलाहारी के प्रयासों की सराहना की

सम्मान समारोह में उपस्थित विभिन्न संतों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में दिनेश फलाहारी महाराज की भूमिका की प्रशंसा की।

वक्ताओं ने कहा कि दिनेश फलाहारी महाराज लंबे समय से श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय को उठाते रहे हैं।

कार्यक्रम में उनके फलाहार व्रत और धार्मिक संकल्प का भी उल्लेख किया गया।

कई वक्ताओं ने उन्हें ब्रज क्षेत्र के धार्मिक विषयों को उठाने वाला प्रमुख व्यक्ति बताया।

ये विचार समारोह में उपस्थित वक्ताओं के थे।

महामंडलेश्वर रामकृष्ण महाराज और प्रज्ञानंद गिरी ने रखे विचार

कार्यक्रम में महामंडलेश्वर रामकृष्ण महाराज और जूना अखाड़े से जुड़े प्रज्ञानंद गिरी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित धार्मिक कार्यक्रमों और रजत शिला पूजन का उल्लेख किया।

वक्ताओं ने दावा किया कि श्रीकृष्ण से जुड़ी रजत शिला का पूजन देश के विभिन्न स्थानों पर किया जा रहा है और इसे अखाड़ा परिषद का समर्थन प्राप्त है।

हालांकि इस समर्थन से संबंधित किसी औपचारिक प्रस्ताव या दस्तावेज का विवरण उपलब्ध नहीं है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले को लेकर हुई चर्चा

समारोह के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित न्यायिक मामले पर भी चर्चा की गई।

वक्ताओं ने दिनेश फलाहारी महाराज के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उनके धार्मिक संकल्प की सराहना की।

कार्यक्रम में उपस्थित संतों और अन्य वक्ताओं ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े अपने धार्मिक विचार व्यक्त किए।

यह उल्लेखनीय है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित विवाद के कानूनी प्रश्नों का निर्णय संबंधित न्यायालयों की प्रक्रिया और आदेशों के अनुसार ही होगा।

उद्योगपति रूप सिंह नागर और प्रशांत त्यागी ने की सराहना

समारोह में उद्योगपति रूप सिंह नागर और अमेरिका निवासी प्रशांत त्यागी ने भी अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि दिनेश फलाहारी महाराज के प्रयासों से श्रीकृष्ण जन्मभूमि का विषय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया है।

वक्ताओं ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की अपनी धार्मिक आकांक्षा भी व्यक्त की।

उन्होंने वृंदावन और ब्रजवासियों के सम्मान को महत्वपूर्ण बताते हुए आपसी सम्मान बनाए रखने की बात कही।

ब्रजवासियों के सम्मान पर दिया गया जोर

कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने ब्रजवासियों के सम्मान का विषय उठाया।

उन्होंने कहा कि ब्रज क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में स्थानीय निवासियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

वक्ताओं ने ब्रजवासियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखने की अपील की।

इस दौरान कुछ वक्ताओं ने कथित तौर पर ब्रजवासियों की उपेक्षा किए जाने पर आपत्ति जताई।

हालांकि किसी विशिष्ट घटना या व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों का स्वतंत्र विवरण उपलब्ध नहीं है।

पंडित बिहारी लाल वशिष्ठ और महामंडलेश्वर डॉ. आदित्यानंद ने की अध्यक्षता

कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित बिहारी लाल वशिष्ठ और महामंडलेश्वर डॉ. आदित्यानंद महाराज ने की।

उन्होंने अपने संबोधन में संत समाज के भीतर आपसी सम्मान और एकता बनाए रखने की आवश्यकता बताई।

वक्ताओं ने कहा कि संत प्रेमानंद महाराज पूजनीय हैं और दिनेश फलाहारी महाराज के धार्मिक प्रयासों का भी सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने दोनों पक्षों से जुड़े मतभेद समाप्त करने की अपील की।

'विवाद समाप्त होने चाहिए' — संतों की अपील

सम्मान समारोह में कई संतों ने कहा कि धार्मिक विषयों को लेकर आपसी विवाद बढ़ने से बचना चाहिए।

उन्होंने संत समाज में संवाद, सम्मान और सहयोग बनाए रखने पर जोर दिया।

वक्ताओं ने कहा कि प्रेमानंद महाराज और दिनेश फलाहारी महाराज दोनों के प्रति सम्मान बनाए रखते हुए विवाद को समाप्त करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में संत समाज की एकजुटता को महत्वपूर्ण बताया गया।

विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों के संत रहे मौजूद

आयोजकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कार्यक्रम में विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों से जुड़े कई प्रमुख संत और धर्माचार्य उपस्थित रहे।

इनमें महंत भक्ति वेदांत भागवत महाराज, जूना अखाड़े के महंत राजेंद्र गिरी महाराज, महंत रामदेव चतुर्वेदी, महामंडलेश्वर रामकृष्ण नंद महाराज, आचार्य सुरेशाचार्य और पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के आचार्य कैलाश गोस्वामी शामिल रहे।

इसके अतिरिक्त तुलसीदास ब्रह्मचारी, हनुमान टेकरी के अवध दास महाराज, आचार्य विनोद बिहारी शरण महाराज, बाबा रामदास महाराज और विनोद बिहारी शरण देवाचार्य भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में मोहिनी नंद महाराज, ज्ञानानंद सरस्वती, प्रेम बल्लभ गोस्वामी, महंत राधानंद गिरी, अश्वनी शर्मा, राजेश पाठक, अनिल कृष्ण शास्त्री और राजेश शास्त्री सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेश पाठक ने किया संचालन

सम्मान समारोह का संचालन राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेश पाठक ने किया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने दिनेश फलाहारी महाराज को सम्मानित किए जाने पर अपने विचार रखे।

समारोह में संत समाज की एकता, ब्रजवासियों के सम्मान और धार्मिक विषयों पर आपसी संवाद की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

दिनेश फलाहारी ने विवाद पर स्पष्ट किया अपना पक्ष

सम्मान समारोह में दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि उन्होंने किसी संत का अपमान नहीं किया है।

उन्होंने प्रेमानंद महाराज के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अपने पूर्व बयान को लेकर उत्पन्न विवाद पर सफाई दी।

उनका कहना था कि कुछ लोगों ने उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया।

समारोह में मौजूद वक्ताओं ने भी विवाद समाप्त करने की अपील की।

ब्रज रत्न सम्मान समारोह में संतों ने दिया एकता का संदेश

वृंदावन के राधा कुटी आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के पक्षकार दिनेश फलाहारी महाराज को 'ब्रज रत्न' सम्मान से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों से जुड़े संतों ने उनके धार्मिक प्रयासों की सराहना की।

दिनेश फलाहारी महाराज ने संत प्रेमानंद महाराज के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि वह किसी भी संत का अपमान नहीं कर सकते।

कार्यक्रम में उपस्थित संतों ने दोनों पक्षों से जुड़े मतभेद समाप्त करने, ब्रजवासियों के सम्मान को बनाए रखने और संत समाज में आपसी एकता मजबूत करने की अपील की।

NHP Bharat News | वृंदावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश

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