ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार को झटका

Prayagraj

प्रधानो की चली गई प्रधानी, ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार के फैसले पर उठे सवाल

Jun 26, 2026
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उत्तर प्रदेश की पंचायत व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। Allahabad High Court ने राज्य सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक के रूप में कार्य जारी रखने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट के इस फैसले को पंचायत व्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

Allahabad High Court ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सरकार के इस निर्णय पर गंभीर सवाल उठाए और इसे प्रथम दृष्टया असंवैधानिक माना। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशासक के रूप में नियुक्त करना संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

यह आदेश अरविंद राठौर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। Arvind Rathore ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक बनाना संविधान और पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना के खिलाफ है। याचिका में कहा गया कि पंचायतों के संचालन के लिए वैधानिक और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद किसी निर्वाचित पदाधिकारी को प्रशासनिक अधिकार देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इस फैसले से पंचायत प्रशासन की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

कोर्ट के इस आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में पंचायतों के प्रशासनिक संचालन को लेकर नई स्थिति पैदा हो गई है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिन पंचायतों में प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, वहां प्रशासनिक कामकाज किस प्रकार संचालित होगा। राज्य सरकार को इस संबंध में वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला पंचायत प्रशासन की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाना होगा ताकि ग्रामीण प्रशासन में किसी प्रकार की बाधा न आए।

फिलहाल अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 जुलाई की तारीख निर्धारित की है। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।

यह मामला न केवल कानूनी बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों के संचालन पर पड़ सकता है।

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