पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के समर्थन में उतरे अनिरुद्धाचार्य,

Mathura

प्रेमानंद महाराज के समर्थन में आए अनिरुद्धाचार्य

Oct 4, 2026
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वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े हालिया विवादों के बीच कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज उनके समर्थन में सामने आए हैं। कथा के दौरान दिए गए अपने बयान में उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी मामले की पूरी जानकारी और जांच सामने आने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं है। अनिरुद्धाचार्य के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है।

अनिरुद्धाचार्य ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और मीडिया के कुछ हिस्सों में टीआरपी और व्यूज हासिल करने की होड़ में लोग पूरी बात समझे बिना टिप्पणी करने लगते हैं और खुद ही निर्णय सुनाने की स्थिति में आ जाते हैं। उन्होंने लोगों से किसी भी आरोप या विवाद पर निष्कर्ष निकालने से पहले पूरे तथ्य सामने आने और जांच का इंतजार करने की अपील की। 

प्रेमानंद महाराज का समर्थन करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने उनके स्वास्थ्य का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के बावजूद प्रेमानंद महाराज लोगों से मिलते हैं और अपने प्रवचनों के माध्यम से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक जीवन से जोड़ रहे हैं। यह अनिरुद्धाचार्य द्वारा प्रेमानंद महाराज के समर्थन में व्यक्त किया गया पक्ष है। 

अपने प्रवचन में अनिरुद्धाचार्य ने संतों के सम्मान से जुड़ा एक पौराणिक प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब से संबंधित कथा का उल्लेख करते हुए लोगों को संतों का अपमान नहीं करने की सीख दी। इस पौराणिक उदाहरण के माध्यम से उन्होंने कहा कि बिना पूरी जानकारी के किसी संत का तिरस्कार या अपमान करने से बचना चाहिए। Navbharat Times

यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब वृंदावन में प्रेमानंद महाराज से जुड़े कुछ हालिया मामलों को लेकर चर्चा और पुलिस जांच चल रही है। हाल में लापता किशोर अनुज चौधरी को बरसाना क्षेत्र के एक आश्रम से खोज लिया गया है, जबकि एक साधक की मौत से जुड़े मामले में भी जांच हुई है। ऐसे मामलों में आरोपों और अलग-अलग पक्षों के दावों को जांच पूरी होने से पहले स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

अनिरुद्धाचार्य ने अपने बयान के जरिए प्रेमानंद महाराज के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए मुख्य रूप से यही संदेश दिया कि किसी विवाद में सभी तथ्य सामने आने और जांच पूरी होने से पहले निर्णय नहीं सुनाया जाना चाहिए।

Tarun Kumar Sharma
Author
Tarun Kumar Sharma
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