नोएडा में साइबर ठगी के दो बड़े मामले: कारोबारी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर ₹22 लाख ठगे, दूसरे मामले में ₹18 लाख की चपत
नोएडा। साइबर अपराधियों ने नोएडा में अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी की है। सामने आए दो मामलों में पीड़ितों से कुल करीब 40 लाख रुपये ठगे जाने की शिकायत है। एक मामले में कारोबारी को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर ₹22 लाख ट्रांसफर करा लिए गए, जबकि दूसरे मामले में अलग-अलग बहानों से ₹18 लाख की ठगी की शिकायत सामने आई है।
दोनों मामलों में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
साइबर अधिकारी बनकर कारोबारी को डराया
पहले मामले में साइबर जालसाजों ने एक कारोबारी से संपर्क किया और खुद को मुंबई साइबर विभाग का अधिकारी बताया।
आरोपियों ने कारोबारी को बताया कि उनकी पहचान से एक बैंक खाता खोला गया है और उस खाते के जरिए कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी लेनदेन किए गए हैं।
गंभीर आपराधिक मामले में फंसने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर कारोबारी को मानसिक दबाव में लिया गया।
CBI कार्यालय में पेश होने की बात कहकर बढ़ाया दबाव
शिकायत के मुताबिक, ठगों ने कारोबारी से कहा कि उन्हें एक अगस्त की सुबह 9 बजे CBI कार्यालय में एक अधिकारी के सामने पेश होना होगा।
इसी दौरान कथित जांच के नाम पर कारोबारी के परिवार, पहचान और बैंक खातों से संबंधित जानकारी हासिल की गई।
इसके बाद बैंक खाते की जांच के बहाने ₹22 लाख एक बैंक खाते में RTGS के माध्यम से ट्रांसफर करा लिए गए।
₹22 लाख भेजने के बाद भी जारी रही मांग
रकम ट्रांसफर होने के बाद भी आरोपियों की मांग बंद नहीं हुई। इससे कारोबारी को शक हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।
इसके बाद मामले की शिकायत साइबर क्राइम थाना पुलिस से की गई। पुलिस अब रकम जिन खातों में भेजी गई, मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
दूसरे मामले में ₹18 लाख की साइबर ठगी
नोएडा में ही सामने आए एक अन्य मामले में अलग-अलग बहाने बनाकर ₹18 लाख की ठगी की शिकायत दर्ज हुई है।
पीड़ित से बिल जमा कराने से लेकर पॉलिसी की रकम निकालने जैसे बहानों के जरिए पैसे ऐंठे जाने की बात सामने आई है।
इस मामले में भी साइबर क्राइम थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है।
दो मामलों में करीब ₹40 लाख की चपत
दोनों मामलों की रकम को मिलाकर पीड़ितों को करीब ₹40 लाख का नुकसान हुआ है।
लगातार सामने आ रहे साइबर अपराध के मामलों ने एक बार फिर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत बताई है। पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियां भी समय-समय पर स्पष्ट करती रही हैं कि कोई वैध जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर जांच के नाम पर निजी बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर पैसे मांगे जाएं तो रहें सावधान
यदि कोई फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, CBI, ED, साइबर क्राइम या किसी दूसरी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाए और बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहे तो तत्काल सतर्क हो जाना चाहिए।
ऐसी स्थिति में पैसे ट्रांसफर करने के बजाय कॉल बंद कर संबंधित एजेंसी से आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करनी चाहिए और साइबर क्राइम पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
फिलहाल नोएडा साइबर क्राइम थाना पुलिस दोनों मामलों में डिजिटल और बैंकिंग ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।