सीतापुर। बीते दिनों आई प्राकृतिक आपदा और तेज हवाओं के कारण क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ गिरने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। अब खेतों में गिरे पेड़ों की लकड़ी बेचकर नुकसान की कुछ भरपाई करने की कोशिश कर रहे किसानों ने कथित पुलिस कार्रवाई और वसूली को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ताजा मामला तंबौर थाना क्षेत्र के इच्छा गांव से सामने आया है, जहां किसान गुड्डू यादव ने अपने खेत में गिरे दो सेमल के पेड़ों की लकड़ी मंडी ले जाते समय परेशान किए जाने और पैसे मांगे जाने का आरोप लगाया है।
किसान गुड्डू यादव के मुताबिक, सोमवार 5 अक्टूबर की सुबह वह अपने खेत में प्राकृतिक आपदा के कारण गिरे दो सेमल के पेड़ों की लकड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर मंडी में बेचने के लिए ले जा रहा था। किसान का आरोप है कि रास्ते में तंबौर पुलिस से जुड़े बताए जा रहे सिपाही धर्मेंद्र पटेल और अरुण नाग नामक एक निजी व्यक्ति ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोक लिया।
किसान का आरोप है कि इसके बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली को थाने ले जाया गया और लकड़ी छोड़ने के एवज में कथित तौर पर ₹500 से ₹1,000 तक की मांग की गई। गुड्डू यादव का यह भी आरोप है कि ट्रैक्टर को थाने में खड़ा कर उसकी चाबी निकाल ली गई और अपनी बात रखने के बावजूद उसे परेशान किया गया।
किसान की ओर से यह भी दावा किया गया कि उसने अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के सामने लकड़ी अपने खेत में गिरे पेड़ों की होने की बात कही। इसके बावजूद कथित रूप से उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। हालांकि किसान द्वारा लगाए गए वसूली और अभद्रता के इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आपदा से नुकसान के बाद किसानों की बढ़ी परेशानी
स्थानीय किसानों का कहना है कि तेज हवा और खराब मौसम के कारण पहले ही फसलों और पेड़ों को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में खेतों में गिरे पेड़ों की लकड़ी बेचकर किसान कुछ आर्थिक राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसी परिस्थितियों में उनसे कथित रूप से पैसे मांगे जाने की शिकायत गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पत्रकार भी मौके पर पहुंचे और किसान से घटनाक्रम की जानकारी ली। इस दौरान कुछ पत्रकारों और स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि किसानों की शिकायतों की पड़ताल करने पहुंचने वाले पत्रकारों को भी परेशान करने का प्रयास किया जाता है। इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
लकड़ी ले जाने के नियमों को स्पष्ट करने की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि अपने खेत में प्राकृतिक रूप से गिरे पेड़ों की लकड़ी मंडी तक ले जाने के लिए किन दस्तावेजों या अनुमति की आवश्यकता होती है। किसानों का कहना है कि वन विभाग और प्रशासन को इससे जुड़े नियम स्पष्ट करने चाहिए, ताकि किसान अनजाने में किसी नियम का उल्लंघन न करें और वैध तरीके से अपनी लकड़ी का परिवहन कर सकें।
यह भी महत्वपूर्ण है कि पेड़ काटने और लकड़ी के परिवहन से जुड़े नियम पेड़ की प्रजाति, भूमि की श्रेणी और लागू वन/परिवहन नियमों के आधार पर अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी वाहन को रोकना अपने आप अवैध कार्रवाई साबित नहीं करता। दूसरी ओर, यदि किसी वैधानिक शुल्क या चालान के बजाय व्यक्तिगत रूप से पैसे मांगने का आरोप सही पाया जाता है, तो वह अलग जांच का विषय होगा।
किसान गुड्डू यादव ने उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में यदि किसी पुलिसकर्मी अथवा अन्य व्यक्ति द्वारा अवैध वसूली या अनुचित व्यवहार की पुष्टि होती है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल ₹500 से ₹1,000 की कथित वसूली, ट्रैक्टर की चाबी निकालने और अभद्र व्यवहार से संबंधित बातें किसान एवं स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोप हैं। संबंधित पुलिसकर्मी और तंबौर पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।