परसरामपुर, उत्तर प्रदेश: थाना क्षेत्र के निनदौर माफी गांव में पांच माह की गर्भवती महिला के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। पीड़िता ने स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले में प्राथमिकी दर्ज न करने और मेडिकल जांच से इनकार करने की शिकायत एसपी से की है।
घटना का विवरण
पीड़िता रामुनी पत्नी संतोष कुमार के अनुसार, यह घटना 27 सितंबर को हुई। आरोप है कि गांव के शिवा पुत्र लल्लन तथा मनीष व लल्लन पुत्रगण श्रीराम ने उनके साथ मारपीट की। पीड़िता का कहना है कि इस हमले में उनके शरीर के कई हिस्सों में चोटें आई हैं। चूंकि वह पांच माह की गर्भवती हैं, इसलिए घटना के बाद से ही उन्हें शारीरिक दर्द और काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पुलिस पर लगे गंभीर आरोप
पीड़िता ने बताया कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने परसरामपुर थाने में लिखित शिकायत दी थी। उपचार के लिए जब वह सरकारी अस्पताल पहुंचीं, तो वहां चिकित्सक ने चोटों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें पुलिस के माध्यम से मेडिकल कराने की सलाह दी।
रामुनी के अनुसार, पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने पर उन्होंने 28 सितंबर को एसपी को प्रार्थना पत्र सौंपा। एसपी के निर्देश पर वह उसी दिन दोपहर करीब साढ़े तीन बजे अपने पति के साथ दोबारा परसरामपुर थाना पहुंचीं। पीड़िता का आरोप है कि रात के नौ बजे तक वे थाना परिसर में बैठी रहीं, लेकिन पुलिस ने न तो उनका मेडिकल परीक्षण कराया और न ही मुकदमा दर्ज किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने थाने में पुलिसकर्मियों द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग करने और उन्हें वहां से चले जाने के लिए मजबूर करने का भी आरोप लगाया है।
सुरक्षा की गुहार और जांच की स्थिति
पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद से आरोपी पक्ष उन्हें लगातार धमकियां दे रहा है, जिससे उनके पूरे परिवार में भय का माहौल है। उन्होंने एसपी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने, मेडिकल परीक्षण कराने और अपने परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
इस मामले पर थानाध्यक्ष परसरामपुर प्रदीप सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और इस संबंध में जांच-पड़ताल की जा रही है।