नोएडा: रिटायर्ड कर्नल की पत्नी को 7 दिन ‘डिजिटल अरेस्ट

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नोएडा में रिटायर्ड कर्नल की पत्नी को 7 दिन रखा ‘डिजिटल अरेस्ट’, मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाकर लाखों की ठगी; ग्रेटर नोएडा की बुजुर्ग महिला भी बनी शिकार

Aug 17, 2026
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नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में साइबर ठगों द्वारा खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच और अन्य सरकारी विभागों का अधिकारी बताकर दो बुजुर्ग महिलाओं को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखने और लाखों रुपये ठगने के मामले सामने आए हैं। ठगों ने आधार कार्ड के दुरुपयोग, मनी लॉन्ड्रिंग, गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति की जांच का डर दिखाकर पीड़िताओं को अपने जाल में फंसाया।

एक मामले में नोएडा सेक्टर-29 निवासी सेवानिवृत्त कर्नल की पत्नी को करीब सात दिनों तक वीडियो कॉल और फोन के जरिए निगरानी में रखने का आरोप है। दूसरे मामले में ग्रेटर नोएडा की बुजुर्ग महिला को दो दिनों तक इसी तरह डराकर रकम ट्रांसफर कराई गई।

पीड़िताओं की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामले दर्ज कर ठगों की पहचान और पैसों के लेनदेन की जांच शुरू कर दी है।

मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर किया फोन

नोएडा सेक्टर-29 निवासी सेवानिवृत्त कर्नल की पत्नी को 6 अगस्त को एक व्यक्ति ने फोन किया। कॉल करने वाले ने खुद को कथित तौर पर मुंबई क्राइम ब्रांच से जुड़ा पुलिसकर्मी बताया।

आरोप है कि ठग ने महिला से कहा कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग कर एक बैंक खाता खोला गया है और उस खाते से करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है। इसके बाद महिला को बताया गया कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है।

महिला ने खुद को निर्दोष बताया तो साइबर ठगों ने कथित गिरफ्तारी वारंट भेजकर उन्हें और भयभीत कर दिया।

WhatsApp पर भेजा कथित गिरफ्तारी वारंट

पीड़िता के अनुसार, ठगों ने WhatsApp पर गिरफ्तारी वारंट जैसा दस्तावेज भेजा। इसके बाद कथित तौर पर कहा गया कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और इसकी जानकारी किसी रिश्तेदार या परिचित को नहीं दी जानी चाहिए।

इसके बाद अन्य ठग वीडियो कॉल पर पुलिस अधिकारी बनकर सामने आए। आरोप है कि पुलिस जैसी वर्दी और आधिकारिक प्रक्रिया का माहौल बनाकर महिला को विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि वास्तव में उनके खिलाफ जांच चल रही है।

ठगों ने कथित ऑनलाइन सुनवाई का नाटक भी किया और गिरफ्तारी से बचने के लिए संपत्ति तथा बैंक खातों की जांच कराने की बात कही।

‘RBI खातों में जांच’ के नाम पर ट्रांसफर कराई रकम

आरोप है कि ठगों ने पीड़िता से कहा कि उसकी जमा पूंजी की जांच करनी होगी और जांच पूरी होने के बाद रकम वापस कर दी जाएगी।

इसके लिए ठगों ने खातों को कथित तौर पर RBI से जुड़ा बताकर उनमें रकम ट्रांसफर करने को कहा। पीड़िता से 12 अगस्त तक करीब 20 लाख रुपये ट्रांसफर कराए जाने की बात सामने आई है।

जब रकम वापस नहीं आई और ठगों ने अतिरिक्त पैसों की मांग शुरू की तो महिला को संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने एक रिश्तेदार को पूरी घटना बताई, तब साइबर ठगी का पता चला।

ग्रेटर नोएडा की महिला को ‘SIM बंद होने’ का दिखाया डर

दूसरा मामला ग्रेटर नोएडा निवासी अनीता से जुड़ा बताया गया है। उनके पास 5 अक्टूबर 2025 को कथित तौर पर दूरसंचार विभाग का कर्मचारी बनकर फोन किया गया था।

ठग ने महिला को बताया कि उनका मोबाइल सिम दो घंटे के भीतर बंद कर दिया जाएगा। कारण पूछने पर आरोपियों ने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े कनेक्शन के लिए किया गया है।

इसके बाद दूसरे ठग ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का पुलिसकर्मी बताकर महिला से संपर्क किया।

आधार कार्ड के दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग का बनाया डर

आरोपियों ने महिला से कहा कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग करके सिम लिया गया और बैंक खाता खोला गया है, जिसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में किया जा रहा है।

इसके बाद कथित गिरफ्तारी वारंट दिखाकर गिरफ्तारी का डर पैदा किया गया। आरोप है कि ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर ऑनलाइन सुनवाई जैसा माहौल बनाया और संपत्ति की जांच के नाम पर रकम ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया।

जब ठगों ने लगातार और रकम की मांग की तो पीड़िता ने अपने परिवार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद मामला साइबर ठगी का निकला और आरोपियों ने संपर्क तोड़ दिया।

NCRP पोर्टल और साइबर क्राइम थाने में शिकायत

दोनों पीड़िताओं ने National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) और साइबर क्राइम थाना पुलिस से शिकायत की है। पुलिस उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है, जिनका कथित तौर पर ठगी में इस्तेमाल किया गया।

साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रकम किन खातों में भेजी गई और वहां से आगे कहां ट्रांसफर हुई।

‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं

ऐसे मामलों में यह समझना महत्वपूर्ण है कि पुलिस, CBI, ED, RBI या अन्य सरकारी एजेंसी किसी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ करके बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने का आदेश नहीं देती।

साइबर अपराधी अक्सर पुलिस की वर्दी, फर्जी पहचान पत्र, गिरफ्तारी वारंट, वीडियो कॉल और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोपों का डर दिखाकर पीड़ित को परिवार से संपर्क करने से रोकते हैं।

यदि किसी व्यक्ति को ऐसी कॉल आए तो पैसे ट्रांसफर न करें, कॉल समाप्त करें और तत्काल आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत माध्यम या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।

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