रिपोर्ट: अनिल पुंडीर | NHP भारत NEWS, चरथावल
चरथावल/मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम योजना के अंतर्गत गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को जनपद मुजफ्फरनगर के विकासखंड चरथावल में कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के 112 किसानों ने प्रतिभाग किया। गोष्ठी के दौरान किसानों को मोटे अनाज यानी मिलेट्स की उपयोगिता, स्वास्थ्य लाभ, उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीक, सरकारी कृषि योजनाओं के साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को परंपरागत एवं पौष्टिक मोटे अनाज की खेती के प्रति जागरूक करना और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देकर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना रहा। अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से मिलेट्स को खेती के साथ-साथ दैनिक आहार में भी महत्व देने की अपील की।
112 किसानों ने कृषक गोष्ठी में किया प्रतिभाग
चरथावल विकासखंड में आयोजित कृषक गोष्ठी में आसपास के क्षेत्रों से कुल 112 किसानों ने हिस्सा लिया। किसानों को मिलेट्स की खेती से लेकर उसके पोषण संबंधी महत्व तक की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि बदलते कृषि परिवेश में किसानों के लिए फसल विविधीकरण महत्वपूर्ण है। मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देकर किसानों को नए अवसरों से जोड़ने के साथ लोगों के बीच पौष्टिक आहार के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जा सकती है।
BDO प्रवीण कुमार ने बताए मिलेट्स के स्वास्थ्य लाभ
खंड विकास अधिकारी चरथावल प्रवीण कुमार ने कार्यक्रम में उपस्थित किसानों को मिलेट्स से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने किसानों को मोटे अनाज की उपयोगिता समझाते हुए इसके उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। गोष्ठी में किसानों को बताया गया कि बाजरा, ज्वार, रागी और अन्य मिलेट्स पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण खाद्यान्न हैं।
डॉ. सतबीर सिंह सिरोही ने बताईं आधुनिक कृषि तकनीक
डॉ. सतबीर सिंह सिरोही ने किसानों को मिलेट्स की फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए नवीन कृषि तकनीकों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने और मोटे अनाज की उपयोगिता को समझने के लिए प्रेरित किया। साथ ही मिलेट्स की खेती में आधुनिक तकनीक के प्रयोग से होने वाले संभावित लाभों पर चर्चा की गई।
पशुपालन और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के भी बताए तरीके
कृषि विज्ञान केंद्र बघरा के डॉ. दीपक कुमार शर्मा ने किसानों को खेती के साथ पशुपालन को बेहतर तरीके से संचालित करने की जानकारी दी।
उन्होंने पशुओं के उचित रखरखाव, पोषण और प्रबंधन के साथ दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर किसानों का मार्गदर्शन किया।
कृषि के साथ पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसी को देखते हुए गोष्ठी में किसानों को दोनों क्षेत्रों को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के सुझाव दिए गए।
पशुओं की बीमारियों और बांझपन की रोकथाम पर जानकारी
पशुपालन विभाग के डॉ. नीरज कुमार ने किसानों और पशुपालकों को पशुओं में होने वाली विभिन्न बीमारियों के बारे में जानकारी दी।
इसके साथ ही पशुओं में बांझपन की समस्या की रोकथाम, समय पर पहचान और उचित देखभाल से संबंधित सुझाव भी दिए गए। किसानों को पशुओं के स्वास्थ्य के प्रति नियमित रूप से सतर्क रहने के लिए जागरूक किया गया।
सरकारी योजनाओं की भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम में एडीओ कमल कुमार ने विकासखंड स्तर पर सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में किसानों को जानकारी दी।
वहीं कृषि विभाग के सहायक विकास अधिकारी अमरीश कुमार ने मिलेट्स की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए संचालित योजनाओं की जानकारी साझा की।
अधिकारियों ने किसानों से सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर पात्रता के अनुसार उनका लाभ उठाने की अपील की।
मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने पर जोर
गोष्ठी के माध्यम से किसानों को मिलेट्स की खेती के प्रति जागरूक करने के साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
चरथावल में आयोजित यह कृषक गोष्ठी किसानों के लिए कृषि और पशुपालन से संबंधित कई विषयों की जानकारी प्राप्त करने का मंच बनी।