चरथावल (मुजफ्फरनगर)। चरथावल विकासखंड क्षेत्र के गांव दधेडु खुर्द में राशन वितरण व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें पिछले करीब तीन महीने से राशन नहीं मिला है। ग्रामीणों ने राशन वितरण में कथित अनियमितता और बंदरबांट का आरोप लगाते हुए राशन विक्रेता के साथ पूर्ति विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की पूर्व राशन दुकान निलंबित होने के बाद उसे दूसरे गांव के राशन डीलर से संबद्ध किया गया था। इसके बाद 18 अगस्त को गांव की गुलिस्ता को राशन की दुकान आवंटित की गई, लेकिन पुराना राशन अवशेष, ई-पॉस मशीन और कांटा उपलब्ध नहीं होने के कारण नई दुकान से वितरण प्रक्रिया प्रभावित बताई जा रही है।
तीन महीने से राशन नहीं मिलने का ग्रामीणों का दावा
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब तीन महीने से पात्र कार्डधारकों को राशन नहीं मिल पाया है। लंबे समय से राशन वितरण बाधित होने के कारण ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।
लोगों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अभी तक व्यवस्था पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है।
अंगूठा लगवाने के बाद भी राशन नहीं देने का आरोप
ग्रामीणों ने पूर्व में राशन वितरण व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि ई-पॉस मशीन में कार्डधारकों का अंगूठा लगवाने के बावजूद उन्हें राशन नहीं दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने राशन नहीं मिलने को लेकर सवाल किए तो संबंधित राशन विक्रेता खतिजन की ओर से उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया।
इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
18 अगस्त को गुलिस्ता को मिली राशन की दुकान
जानकारी के अनुसार गांव की राशन दुकान निलंबित होने के बाद वितरण व्यवस्था को दूसरे गांव के डीलर से अटैच किया गया था। इसके बाद 18 अगस्त को गुलिस्ता को गांव की राशन दुकान आवंटित की गई।
बताया जा रहा है कि नई राशन दुकान को पुराना राशन अवशेष, मशीन और कांटा उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण राशन वितरण शुरू करने में समस्या आ रही है।
राशन बेचने और बंदरबांट का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व व्यवस्था से जुड़ा राशन नई दुकान तक नहीं पहुंचा। उनका दावा है कि राशन की कथित तौर पर बंदरबांट हो चुकी है और इसी वजह से नई दुकान को राशन अवशेष नहीं मिल पाया।
हालांकि राशन बेचे जाने अथवा बंदरबांट किए जाने के इन आरोपों की स्वतंत्र या विभागीय पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।
पूर्ति निरीक्षक और ARO की भूमिका पर भी उठाए सवाल
ग्रामीणों ने पूर्ति निरीक्षक और एआरओ पर भी संबंधित राशन विक्रेता से कथित मिलीभगत का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान और गांव के अन्य जिम्मेदार लोगों की ओर से एसडीएम एवं पूर्ति विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद नई दुकान को पुराना राशन अवशेष उपलब्ध नहीं कराया जा सका है।
जांच और राशन वितरण शुरू कराने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही पात्र कार्डधारकों को बकाया राशन उपलब्ध कराने और नई राशन दुकान पर नियमित वितरण व्यवस्था जल्द शुरू कराने की मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि ई-पॉस मशीन के रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और राशन के आवंटन एवं वितरण का मिलान कराया जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कार्डधारकों के हिस्से का राशन कहां गया और वितरण क्यों बाधित रहा।
नोट: राशन की बंदरबांट, राशन बेचने, दुर्व्यवहार और अधिकारियों की मिलीभगत संबंधी बातें ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप हैं। संबंधित अधिकारियों एवं राशन विक्रेता का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना उचित होगा।