मुजफ्फरनगर: बिरालसी में मनरेगा वृक्षारोपण पर फर्जीवाड़े का आरोप

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मुजफ्फरनगर: बिरालसी में मनरेगा वृक्षारोपण पर उठे सवाल, ग्रामीणों का आरोप- तालाब किनारे रोपी जा रहीं सूखी टहनियां

Aug 12, 2026
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रिपोर्ट: अनिल पुंडीर | NHP भारत NEWS
चरथावल, मुजफ्फरनगर।

जनपद मुजफ्फरनगर के ब्लॉक चरथावल अंतर्गत गांव बिरालसी में मनरेगा के तहत किए जा रहे वृक्षारोपण कार्य को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब के किनारे हरे-भरे और स्वस्थ पौधे लगाने के बजाय बड़ी संख्या में सूखे पौधे और टहनियां रोपी जा रही हैं, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका पैदा हो रही है।

ग्रामीणों ने पूरे वृक्षारोपण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने और अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप- ई-रिक्शा में लाए गए अधिकांश पौधे सूखे थे

ग्रामीणों का दावा है कि वृक्षारोपण के लिए ई-रिक्शा से लाए गए पौधों में बड़ी संख्या में पौधे पहले से ही सूखे हुए थे। आरोप है कि इन्हीं सूखे पौधों और टहनियों को तालाब के किनारे गड्ढे बनाकर रोप दिया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सूखे पौधों को केवल वृक्षारोपण की संख्या पूरी करने के लिए लगाया जा रहा है तो इससे अभियान का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

तालाब किनारे सफाई और पानी की व्यवस्था पर भी सवाल

ग्रामीणों ने वृक्षारोपण स्थल की स्थिति पर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि तालाब के किनारे बड़ी-बड़ी घास और कूड़े-कचरे के ढेर मौजूद हैं। वृक्षारोपण से पहले स्थल की समुचित साफ-सफाई नहीं की गई और नए लगाए जा रहे पौधों के संरक्षण एवं सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था भी दिखाई नहीं दे रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित सिंचाई, देखभाल और सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

‘सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ तो हो जांच’

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मनरेगा के नाम पर केवल खानापूर्ति नहीं होनी चाहिए। वृक्षारोपण के लिए यदि सरकारी धन खर्च किया जा रहा है तो कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार होना चाहिए।

ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से मांग की है कि बिरालसी में कराए गए वृक्षारोपण की मौके पर जांच कराई जाए। कितने पौधे स्वीकृत हुए, कितने खरीदे गए, उनकी प्रजाति और कीमत क्या थी, कितने पौधे वास्तव में लगाए गए तथा वर्तमान में कितने जीवित हैं—इन सभी बिंदुओं का सत्यापन कराया जाए।

फलदार पौधे नहीं लगाने का भी दावा

स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि तालाब किनारे कोई फलदार वृक्ष नहीं लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से होने वाले वृक्षारोपण में स्वस्थ और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पौधों का चयन किया जाना चाहिए, ताकि वे लंबे समय तक जीवित रह सकें।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

ग्रामीणों ने इसे कथित अनियमितता बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से जांच की मांग की है। हालांकि, सरकारी धन में फर्जीवाड़े या लाखों रुपये के नुकसान के आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। संबंधित विभाग या ग्राम पंचायत का पक्ष मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वृक्षारोपण के लिए कितनी धनराशि स्वीकृत हुई और कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया या नहीं।

नोट: खबर ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। कथित वित्तीय अनियमितता की पुष्टि सक्षम विभाग की जांच के बाद ही होगी।

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