मुजफ्फरनगर: एकल विद्यालय की आचार्य बहनों ने पुलिसकर्मियों को बांधा रक्षा सूत्र, बिरालसी चौकी पर दिखा भाई-बहन के स्नेह का अनूठा संगम
रक्षाबंधन पर ड्यूटी के कारण घर नहीं जा पाने वाले पुलिसकर्मियों की कलाई पर बांधी राखी, तिलक लगाकर कराया मुंह मीठा; शिक्षा, संस्कार, डिजिटल जागरूकता और राष्ट्र निर्माण पर भी हुई चर्चा
रिपोर्ट: अनिल पुंडीर | NHP भारत NEWS, चरथावल, मुजफ्फरनगर
मुजफ्फरनगर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जनपद मुजफ्फरनगर के चरथावल थाना क्षेत्र की बिरालसी पुलिस चौकी पर भाई-बहन के स्नेह और सामाजिक सरोकार का विशेष दृश्य देखने को मिला। एकल विद्यालय से जुड़ी ग्राम शिक्षा मंदिर की आचार्य बहनों ने पुलिस चौकी पहुंचकर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को तिलक लगाया, उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन का पर्व मनाया।
एकल अभियान के भाग सहारनपुर के अंचल शामली, संच बिरालसी के अंतर्गत ग्राम शिक्षा मंदिर की आचार्य बहनों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। आचार्य बहनों ने पुलिसकर्मियों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हुए उनसे बहनों और समाज की सुरक्षा का संकल्प भी लिया।
ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की कलाई नहीं रहने दी सूनी
कार्यक्रम के पीछे आचार्य बहनों की भावना उन पुलिसकर्मियों के साथ रक्षाबंधन की खुशियां साझा करना था, जो त्योहार के दिन भी कानून-व्यवस्था और आम लोगों की सुरक्षा के लिए ड्यूटी पर तैनात रहते हैं।
आचार्य बहनों ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पर भी पुलिसकर्मियों को अलर्ट मोड पर रहकर अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। ऐसे में कई पुलिसकर्मी अपने घर नहीं जा पाते और अपनी बहनों से राखी बंधवाने से वंचित रह जाते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए ग्राम शिक्षा मंदिर की आचार्य बहनें बिरालसी पुलिस चौकी पहुंचीं और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया।
दरोगा निखिल कुमार और पुलिसकर्मियों को बांधा रक्षा सूत्र
कार्यक्रम में बिरालसी से पुष्पा प्रजापति, आंचल पुंडीर, अंजू देवी, कान्हाहेड़ी से दीपा देवी, मारूखेड़ी से नीलम देवी, आलमगीरपुर से सृष्टि देवी, गुनियाजुड़ी से प्रीति सैनी, दूधली से नैंसी पुंडीर और बाढ़ से पूनम देवी सहित आचार्य बहनों ने भाग लिया।
आचार्य बहनों ने बिरालसी पुलिस चौकी पर तैनात दरोगा निखिल कुमार, हेड कांस्टेबल दिनेश कुमार समेत अन्य पुलिसकर्मियों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। इसके बाद पुलिसकर्मियों को तिलक लगाकर मिठाई खिलाई गई।
पुलिसकर्मियों ने भी आचार्य बहनों के प्रति स्नेह और सम्मान व्यक्त किया तथा उन्हें उपहार स्वरूप राशि भेंट की।
'दिन-रात हमारी सुरक्षा में लगे रहते हैं पुलिसकर्मी'
आचार्य बहनों ने कहा कि पुलिसकर्मी दिन-रात आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में लगे रहते हैं। त्योहारों के दौरान उनकी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में समाज का भी कर्तव्य है कि त्योहारों की खुशियों में उन्हें शामिल किया जाए।
रक्षाबंधन के इस आयोजन के माध्यम से पुलिस और समाज के बीच आपसी विश्वास, सम्मान और भाईचारे का संदेश भी दिया गया।
डिजिटल युग में संस्कार और विचारों को बनाए रखने पर जोर
रक्षाबंधन कार्यक्रम केवल रक्षा सूत्र बांधने तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम के अंत में शिक्षा, सामाजिक परिस्थितियों, डिजिटल माध्यमों के उपयोग, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की गई।
पुष्पा प्रजापति ने डिजिटल युग में अपनी संस्कृति, संस्कार और मूल विचारों को बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए भी समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत बनाए रखना जरूरी है।
डिजिटल माध्यमों का सकारात्मक उपयोग करने का संदेश
आंचल पुंडीर ने आचार्य बहनों को डिजिटल माध्यमों का सकारात्मक और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का संदेश दिया।
चर्चा के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि बदलते समय के साथ तकनीक को अपनाना जरूरी है, लेकिन इसका इस्तेमाल शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक विकास जैसे सकारात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए।
शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण को मिले प्राथमिकता: अंजू देवी
बिरालसी की आचार्य बहन अंजू देवी ने शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
उन्होंने भारतीय संस्कृति और इतिहास को समझने के साथ आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर जोर दिया गया।
बिरालसी पुलिस चौकी पर आयोजित रक्षाबंधन कार्यक्रम ने एक ओर त्योहार की पारंपरिक भावना को जीवंत किया, वहीं दूसरी ओर पुलिस और समाज के बीच आत्मीयता का संदेश भी दिया। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की कलाई पर आचार्य बहनों द्वारा बांधा गया रक्षा सूत्र कार्यक्रम का भावनात्मक केंद्र रहा।