नई दिल्ली। मोदी सरकार में एक बार फिर बड़े कैबिनेट फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार भी 2021 की तरह केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में आखिरी बड़ा कैबिनेट विस्तार 7 जुलाई 2021 को हुआ था। उस समय एक साथ 12 मंत्रियों को हटाया गया था, जबकि 43 नए नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली थी। यह 2019 में सत्ता में वापसी के बाद मोदी सरकार का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल पुनर्गठन माना गया था।
2021 के फेरबदल में कई बड़े चेहरों की छुट्टी हुई थी। इनमें तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, आईटी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक जैसे नाम शामिल थे।
इसके अलावा सदानंद गौड़ा, संतोष गंगवार, थावरचंद गहलोत और बाबुल सुप्रियो भी मंत्रिमंडल से बाहर हुए थे। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सर्बानंद सोनोवाल और नारायण राणे जैसे नेताओं को कैबिनेट में जगह मिली थी।
उस फेरबदल को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों लिहाज से बेहद अहम माना गया था। खास तौर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यूपी से कई नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।
अब एक बार फिर मोदी सरकार में बदलाव की अटकलें तेज हैं। माना जा रहा है कि प्रदर्शन, क्षेत्रीय संतुलन, संगठनात्मक जरूरतों और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जा सकता है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कैबिनेट फेरबदल के जरिए सरकार नए चेहरों को मौका दे सकती है, जबकि कुछ मंत्रियों को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि अभी तक इसको लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल सभी की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेतृत्व के अगले फैसले पर टिकी है। सवाल यही है कि क्या इस बार भी 2021 जैसा बड़ा फेरबदल होगा या सिर्फ कुछ विभागों में सीमित बदलाव देखने को मिलेगा।