मुजफ्फरनगर के चरथावल क्षेत्र के ग्राम बिरालसी स्थित दयानंद गुरुकुल इंटर कॉलेज से देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की कई स्मृतियां जुड़ी होने का दावा स्थानीय स्तर पर किया जाता है। गुरुकुल से जुड़े लोगों के अनुसार प्रधानमंत्री बनने से कई दशक पहले शास्त्री जी ने यहां शिक्षक के रूप में सेवाएं दी थीं और उन्हें उस समय पांच रुपये मासिक वेतन मिलता था। बताया जाता है कि करीब दो वर्ष के अध्यापन काल में उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ देशभक्ति, स्वदेशी, खादी और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।
गुरुकुल के उपप्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त और वर्तमान ग्राम प्रधान लोकेश कुमार पुंडीर के अनुसार लाल बहादुर शास्त्री को संस्कृत पढ़ाने में विशेष रुचि थी। उन्होंने बताया कि शास्त्री जी मृदुभाषी, सादगी पसंद और अनुशासनप्रिय शिक्षक थे। उस दौर में गुरुकुल में करीब 55 ब्रह्मचारी शिक्षा ग्रहण करते थे।
स्थानीय स्मृतियों के अनुसार अध्यापन के बाद शास्त्री जी गुरुकुल की गायों को चराने के लिए जंगल भी ले जाते थे। बताया जाता है कि हाथ में सोंटा लेकर गायों को चराने जाने के कारण उस समय उन्हें ‘सोंटा वाले मास्टर जी’ के नाम से भी पुकारा जाने लगा था। यह प्रसंग आज भी गुरुकुल से जुड़े लोगों के बीच सुनाया जाता है।
गुरुकुल से जुड़े लोगों का कहना है कि शास्त्री जी का आर्यसमाज की विचारधारा से भी जुड़ाव था और वह अध्यापन शुरू करने से पहले यज्ञशाला में हवन किया करते थे। गुरुकुल की पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए यहां की यज्ञशाला में आज भी नियमित रूप से यज्ञ किए जाने की बात कही जाती है।
बताया जाता है कि 1921 से 1923 के आसपास शास्त्री जी ने इस क्षेत्र में रहते हुए ग्रामीणों और विद्यार्थियों के बीच स्वाधीनता एवं स्वदेशी का संदेश पहुंचाया। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रियता बढ़ने के बाद उन्होंने अध्यापन छोड़ दिया। स्थानीय विवरणों के मुताबिक बाद में वह लोक सेवक मंडल (Servants of the People Society) से जुड़े और सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़े।
बिरालसी स्थित गुरुकुल का इतिहास भी एक सदी से अधिक पुराना बताया जाता है। स्थानीय जानकारी के अनुसार महात्मा सुमेर सिंह ने वर्ष 1905 में स्वामी दयानंद सरस्वती के नाम पर यहां गुरुकुल की स्थापना कराई थी। समय के साथ यह शिक्षण संस्थान विकसित हुआ और वर्तमान में दयानंद गुरुकुल इंटर कॉलेज के रूप में संचालित है।
गुरुकुल में आज भी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से जुड़ी स्मृतियों को सहेजने का प्रयास किया जाता है और उनकी जयंती सादगी के साथ मनाई जाती है। उनके शिक्षक जीवन से जुड़े स्थानीय प्रसंग विद्यार्थियों को सादगी, अनुशासन, देशसेवा और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देने के लिए साझा किए जाते हैं।
संपादकीय नोट: पांच रुपये मासिक वेतन, बिरालसी में अध्यापन की अवधि और ‘सोंटा वाले मास्टर जी’ जैसे विवरण स्थानीय/संस्थागत स्मृतियों पर आधारित हैं। इन्हें ऐतिहासिक अभिलेखों से अलग से सत्यापित करना बेहतर रहेगा।
रिपोर्ट: अनिल पुंडीर | NHP Bharat News, चरथावल, मुजफ्फरनगर