बस्ती। गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर रविवार को विश्व हिन्दू महासंघ की ओर से ‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ एवं विजय यात्रा’ का आयोजन किया गया। जिलाध्यक्ष अखिलेश सिंह के संयोजन में यात्रा राजकीय इंटर कॉलेज से शुरू होकर अमहट घाट स्थित सिद्धेश्वरनाथ मंदिर पहुंची। यहां यज्ञ, विचार गोष्ठी और सहभोज का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने महंत अवेद्यनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके सामाजिक, धार्मिक एवं शैक्षिक योगदान को याद किया।
राजकीय इंटर कॉलेज से शुरू हुई विजय यात्रा
विश्व हिन्दू महासंघ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता राजकीय इंटर कॉलेज में एकत्र हुए, जहां से यात्रा की शुरुआत हुई। विभिन्न मार्गों से होते हुए यात्रा अमहट घाट स्थित सिद्धेश्वरनाथ मंदिर पहुंची।
मंदिर परिसर में विधि-विधान के साथ यज्ञ किया गया। इसके बाद आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने महंत अवेद्यनाथ के जीवन और उनके कार्यों पर अपने विचार रखे।
दिग्विजय सिंह राना बोले- राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे महंत अवेद्यनाथ
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिग्विजय सिंह राना ने कहा कि महंत अवेद्यनाथ श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में शामिल थे। उन्होंने कहा कि संतों को एक मंच पर लाने की उनकी क्षमता ने आंदोलन को व्यापक स्तर पर मजबूती प्रदान की।
उन्होंने महंत अवेद्यनाथ के शिक्षा, स्वास्थ्य और लोककल्याण से जुड़े कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है।
अखिलेश सिंह ने सामाजिक समरसता के योगदान को किया याद
विश्व हिन्दू महासंघ के जिलाध्यक्ष अखिलेश सिंह ने कहा कि महंत अवेद्यनाथ ने सामाजिक जनजागरण को अपने अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उन्होंने बनारस में डोमराजा के घर सहभोज की घटना का उल्लेख करते हुए इसे सामाजिक समरसता की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश बताया।
अखिलेश सिंह ने कहा कि 12 सितंबर 2014 को ब्रह्मलीन हुए महंत अवेद्यनाथ के संकल्पों को आगे बढ़ाना ही संगठन की ओर से उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस दौरान उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ी संगठन की मांग और अभियान का भी उल्लेख किया।
ओम प्रकाश आर्य ने महंत अवेद्यनाथ के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक योगदान को अनुकरणीय बताया।
सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद
कार्यक्रम में अंकुर वर्मा, प्रमोद पाण्डेय, दिलीप पाण्डेय, सौरभ त्रिपाठी, प्रमोद सिंह, कुलदीप मिश्रा, सुधीर सिंह, समर प्रताप सिंह, चंद्रशेखर कमलापुरी, महंत गिरजेश दास, विंद गोपाल त्रिपाठी, विवेक श्रीवास्तव, डॉ. पंकज त्रिपाठी, पूनम सिंह, वशिष्ठ मुनि दुबे, विकास प्रजापति, राजकुमार मंटू चौधरी, अर्पण श्रीवास्तव, शिवलाल प्रेमी, विपिन सिंह, राकेश सिंह, सुनील मिश्रा, बालकृष्ण सिंह, सौरभ चतुर्वेदी, मुन्ना सिंह, राहुल अजय शास्त्री, डॉ. परशुराम साहनी, परमानंद गुप्ता, उज्जवल सिंह, संदीप कमलापुरी, राहुल कमलापुरी, विजय गुप्ता, गुलाब सिंह, महेंद्र पाठक, बाबा जयप्रकाश दास, देवेंद्र दास, सुंदर जी महाराज, जगरामनाथ, अजय स्वरानंद महाराज, अभिषेक आर्य, रूपनारायण गौड़, सतीश पांडे, शिवम मिश्रा, सिकंदर वर्मा, राजन पाल, सूरज श्रीवास्तव, प्रिंस जायसवाल, अविनाश शर्मा, अभिषेक सिंह और अभय चौधरी समेत विश्व हिन्दू महासंघ के सैकड़ों पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।