NHP Bharat आगरा Published by: Shubham Chauhan 22 May 2026 10:26 AM IST
डिजिटल युग में जहां सोशल मीडिया, इंटरनेट और ऑनलाइन संचार हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, वहीं महिलाओं की सुरक्षा और निजता को लेकर खतरे भी तेजी से बढ़े हैं। किसी महिला का पीछा करना, बार-बार परेशान करना या उसकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना अब सिर्फ गलत व्यवहार नहीं बल्कि गंभीर कानूनी अपराध माना जाता है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 78 महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों पर सख्त प्रावधान तय करती है। यह कानून महिलाओं के खिलाफ होने वाले स्टॉकिंग (Stalking) यानी पीछा करने और डिजिटल निगरानी जैसे अपराधों को रोकने के लिए लागू किया गया है।
क्या है BNS की धारा 78?
बीएनएस 2023 की धारा 78 के अनुसार यदि कोई पुरुष किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध उसका बार-बार पीछा करता है, संपर्क बनाने की कोशिश करता है या उसे परेशान करता है, तो यह अपराध की श्रेणी में आता है।
इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति किसी महिला की डिजिटल गतिविधियों — जैसे इंटरनेट उपयोग, सोशल मीडिया, ई-मेल, चैटिंग या अन्य इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों — की निगरानी करता है, तो इसे भी कानूनन अपराध माना जाएगा।
किन परिस्थितियों में माना जाएगा पीछा करने का अपराध?
1. बार-बार व्यक्तिगत संपर्क की कोशिश
यदि कोई पुरुष किसी महिला की मर्जी के खिलाफ उससे बार-बार संपर्क करने का प्रयास करता है, उसका पीछा करता है, उसे छूने या उसके करीब आने की कोशिश करता है, तो यह स्टॉकिंग माना जाएगा।
2. डिजिटल निगरानी
अगर कोई व्यक्ति किसी महिला के मोबाइल, सोशल मीडिया अकाउंट, ई-मेल, लोकेशन या ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर रखता है, उसकी जासूसी करता है या बिना अनुमति उसकी निजी जानकारी ट्रैक करता है, तो यह भी धारा 78 के तहत अपराध है।
कब नहीं माना जाएगा अपराध?
कानून में कुछ विशेष परिस्थितियों में राहत भी दी गई है। यदि आरोपी यह साबित कर देता है कि उसका उद्देश्य अपराध रोकना, जांच करना या किसी अधिकृत सरकारी जिम्मेदारी के तहत कार्य करना था, तो ऐसे मामलों में इसे अपराध नहीं माना जाएगा।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई पुलिस अधिकारी या अधिकृत एजेंसी किसी जांच के तहत निगरानी कर रही है, तो वह इस धारा के दायरे में नहीं आएगा।
क्या है सजा का प्रावधान?
बीएनएस की धारा 78 के तहत:
➡️ पहली बार दोषी पाए जाने पर आरोपी को 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
➡️ यदि आरोपी दोबारा यही अपराध करता है, तो सजा बढ़ाकर 5 साल तक की जेल और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए क्यों जरूरी है यह कानून?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग के साथ ऑनलाइन उत्पीड़न और पीछा करने के मामलों में तेजी आई है। कई बार महिलाएं मानसिक दबाव, डर और सामाजिक शर्मिंदगी के कारण शिकायत दर्ज नहीं करा पातीं।
ऐसे में BNS की धारा 78 महिलाओं को कानूनी सुरक्षा देने के साथ-साथ अपराधियों में डर पैदा करने का काम करती है। यह कानून स्पष्ट संदेश देता है कि किसी महिला की निजता में दखल देना या उसे मानसिक रूप से परेशान करना गंभीर अपराध है।
क्या करें यदि कोई पीछा करे?
यदि कोई महिला लगातार पीछा करने, ऑनलाइन निगरानी या परेशान करने जैसी स्थिति का सामना कर रही है, तो उसे तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। साइबर क्राइम पोर्टल और महिला हेल्पलाइन भी ऐसे मामलों में मदद के लिए उपलब्ध हैं।
महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। जागरूकता और समय पर कार्रवाई ही ऐसे अपराधों को रोकने का सबसे बड़ा हथियार है।