NHP Bharat लखनऊ Published by: Rishav Kulshreshth 24 May 2026 02:51 PM IST
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। इलाज के लिए अस्पताल पहुंची 21 वर्षीय छात्रा के साथ ऑपरेशन थिएटर (OT) के अंदर कथित तौर पर दुष्कर्म किए जाने का गंभीर आरोप लगा है। इस सनसनीखेज घटना के बाद पुलिस ने आरोपी डॉक्टर विजय कुमार गिरी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील करने और डॉक्टर का लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मामला लखनऊ के बख्शी-का-तालाब क्षेत्र स्थित इंदौरबाग के एक निजी अस्पताल का बताया जा रहा है। पीड़िता के परिवार के अनुसार, युवती को मिर्गी से जुड़ी समस्या के इलाज के लिए 19 मई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 21 मई को उसकी तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर विजय कुमार गिरी उसे ऑक्सीजन सपोर्ट देने के बहाने ऑपरेशन थिएटर में ले गए।
परिजनों का आरोप है कि शुरुआत में पीड़िता की बड़ी बहन और एक नर्स OT के अंदर मौजूद थीं, लेकिन कुछ देर बाद डॉक्टर ने दोनों को बाहर भेज दिया। इसके बाद डॉक्टर ने युवती को बेहोशी का इंजेक्शन दिया और कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म किया।
पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि कुछ समय बाद उसे आंशिक रूप से होश आया तो उसने खुद को असामान्य स्थिति में पाया। वह रोते हुए ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकली और परिवार को पूरी घटना बताई। घटना सामने आते ही अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया।
पुलिस ने मामले में तत्काल FIR दर्ज करते हुए आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया। एडीसीपी (उत्तर) ट्विंकल जैन के अनुसार, मामले में दुष्कर्म की धाराओं के साथ SC/ST एक्ट की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं। पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल मचा दी। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने घटना पर सख्त नाराजगी जताते हुए अस्पताल को सील करने और आरोपी डॉक्टर के मेडिकल लाइसेंस को निलंबित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पीड़िता और उसके परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
घटना के बाद पूरे प्रदेश में निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
(नोट: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी गई है।)