कर्मयोगी पीठ ने तय की नई दिशा, गांव-गांव से विद्यालयों तक पहुंचेगा गीता चेतना अभियान
अजय चौबे
चौबेपुर वाराणसी। कर्मयोगी पीठ की मासिक बैठक ज्ञान गंगा पब्लिक स्कूल, क्राइस्ट नगर (चांदमारी), वाराणसी में संपन्न हुई। बैठक में संगठन की प्रगति, आगामी चुनौतियों तथा भावी कार्ययोजना पर विस्तृत मंथन किया गया। संगठन विस्तार, सामाजिक जागरण, गीता प्रचार-प्रसार तथा राष्ट्र निर्माण के विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण एवं दूरगामी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रमुख संयोजक कर्मयोगी गौरव मिश्र ने कहा कि कर्मयोगी पीठ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का जनआंदोलन है। हमारा उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर चरित्र, कर्तव्यबोध और राष्ट्रभक्ति की चेतना जगाकर समाज को नई दिशा देना है।
महामंत्री रंजना सिंह ने कहा कि संगठन की सबसे बड़ी शक्ति उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं। प्रत्येक सदस्य यदि निःस्वार्थ सेवा और अनुशासन के साथ कार्य करेगा तो कर्मयोगी पीठ शीघ्र ही सामाजिक जागरण का एक सशक्त राष्ट्रीय मंच बनकर उभरेगा। उन्होंने महिला शक्ति की सक्रिय भागीदारी पर भी विशेष बल दिया।
जिलाध्यक्ष दीपक मिश्र ने बताया कि आगामी चरण में गीता चेतना अभियान को कम-से-कम 150 विद्यालयों तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विद्यालयों में विद्यार्थियों के बीच गीता के जीवनोपयोगी संदेश, नैतिक शिक्षा, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रभक्ति पर आधारित विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे नई पीढ़ी ज्ञान के साथ संस्कारों से भी समृद्ध हो सके।
महासचिव शुभम जायसवाल ने कहा कि वर्तमान समय में संगठन की विचारधारा को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यम सबसे प्रभावी साधन है। इसलिए सोशल मीडिया पर नियमित, रचनात्मक और प्रभावी उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी, जिससे युवा वर्ग अधिक से अधिक संख्या में इस अभियान से जुड़ सके।
पूर्वी संयोजक श्यामकार्तिक मिश्र ने सदस्यता विस्तार पर चर्चा करते हुए कहा कि ज्येष्ठ पूर्णिमा से गुरु पूर्णिमा तक विशेष सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से अधिकाधिक लोगों को संगठन से जोड़ने के साथ प्रत्येक नए सदस्य से कम-से-कम एक श्रीमद्भगवद्गीता समाजहित में भेंट करने का आग्रह किया जाएगा। उन्होंने गीता बैंक को समाज में ज्ञानदान का अभिनव अभियान बताया।
सचिव जय प्रकाश शर्मा ने कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण पर जोर देते हुए कहा कि प्रभावी संगठन निर्माण के लिए नियमित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें नेतृत्व क्षमता, संगठन कौशल, व्यक्तित्व विकास, संवाद कला और सेवा भाव जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सचिव संतोष सिंह ने कहा कि कर्मयोगी पीठ के प्रत्येक कार्य में निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और समाजहित की भावना स्पष्ट दिखाई देनी चाहिए। यही संगठन की पहचान और विश्वसनीयता का आधार है।
सचिव डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता के संदेशों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समाज के सामने प्रस्तुत करने की आवश्यकता है, ताकि युवा पीढ़ी उसे केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन के श्रेष्ठ मार्गदर्शक के रूप में स्वीकार कर सके।
कोषाध्यक्ष शिवांशु सिंह ने कहा कि संगठन की प्रत्येक गतिविधि में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संसाधनों का सदुपयोग सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। समाज के सहयोग से सेवा और जनकल्याण के कार्यों को और व्यापक बनाया जाएगा।
बैठक में संगठन के व्यापक उद्देश्यों पर भी चर्चा हुई। निर्णय लिया गया कि कर्मयोगी पीठ अपराध नियंत्रण हेतु नैतिक एवं आध्यात्मिक चेतना के विकास, युवाओं, पुलिस, जेल एवं वर्दीधारी बलों में कर्तव्यबोध और मानवीय मूल्यों के संवर्धन, सड़क सुरक्षा, नशामुक्ति, साइबर जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता तथा श्रीमद्भगवद्गीता के अध्ययन एवं अनुसरण को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करेगा।
हाल ही में संपन्न 21 दिवसीय गीता चेतना यात्रा की समीक्षा करते हुए सभी पदाधिकारियों ने इसे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का प्रभावी अभियान बताया और भविष्य में इसे और व्यापक स्वरूप देने का संकल्प लिया।
बैठक के अंत में पश्चिमी संयोजक शिवशरण सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि संगठन का प्रत्येक कार्यकर्ता सेवा, संस्कार और राष्ट्रहित के इस अभियान का दूत है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से संकल्प लिया कि वे कर्मयोगी पीठ के विचारों को गांव-गांव, विद्यालय-विद्यालय और घर-घर तक पहुंचाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करेंगे।
बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि "संवाद से समाधान और गीता से जनकल्याण" के ध्येय वाक्य को जनआंदोलन का स्वरूप देकर समाज में चरित्र, कर्तव्य और राष्ट्रचेतना के जागरण हेतु निरंतर कार्य किया जाएगा।