कानपुर। एक दर्दनाक हादसे में 10वीं कक्षा के छात्र विशाल के पेट में करीब तीन फीट लंबी लाठी घुस गई। गंभीर रूप से घायल छात्र को पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज तिर्वा, कन्नौज ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध लाला लाजपत राय अस्पताल (हैलट) रेफर किया गया।
हैलट की इमरजेंसी में छात्र के पहुंचते ही डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया। पेट में गहराई तक लाठी घुसी होने के कारण मामला बेहद जटिल था। डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लाठी को इस तरह बाहर निकालने की थी कि पेट के अंदर मौजूद महत्वपूर्ण अंगों को अतिरिक्त नुकसान न पहुंचे।
गंभीर हालत में हैलट पहुंचा छात्र
जानकारी के मुताबिक, हादसे में घायल विशाल 10वीं कक्षा का छात्र है। पेट में करीब तीन फीट लंबी लाठी घुसने के बाद उसकी स्थिति गंभीर हो गई थी।
उसे तत्काल उपचार के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज तिर्वा ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बेहतर और उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा के लिए कानपुर रेफर कर दिया।
विशाल को गंभीर हालत में हैलट अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां सर्जरी विभाग की टीम ने उसकी स्थिति का आकलन कर तत्काल ऑपरेशन की तैयारी शुरू की।
डॉ. ब्रजेश यादव के नेतृत्व में बनी सर्जन्स की टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीनियर सर्जन डॉ. ब्रजेश यादव के नेतृत्व में अनुभवी सर्जन्स की टीम बनाई गई।
डॉक्टरों के लिए यह सामान्य ऑपरेशन नहीं था। पेट में घुसी लंबी वस्तु को सीधे बाहर निकालना खतरनाक हो सकता था, क्योंकि इससे अंदरूनी अंगों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने का जोखिम था।
ऐसे में पूरी चिकित्सकीय सावधानी और आवश्यक जांच के बाद सर्जरी शुरू की गई।
3 से 4 घंटे चली मैराथन सर्जरी
डॉक्टरों की टीम ने करीब तीन से चार घंटे तक जटिल ऑपरेशन किया। इस दौरान पेट में धंसी लाठी को बेहद सावधानी से बाहर निकाला गया।
इसके साथ ही लाठी के कारण हुई अंदरूनी चोटों का भी उपचार किया गया। पूरे ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की टीम छात्र की स्थिति पर लगातार नजर रखती रही।
कठिन सर्जरी सफल होने के बाद छात्र को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया।
ऑपरेशन सफल, खतरे से बाहर विशाल
राहत की बात यह है कि जटिल ऑपरेशन के बाद विशाल की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
समय पर अस्पताल पहुंचने और डॉक्टरों द्वारा तत्काल सर्जरी किए जाने को छात्र की जान बचाने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल चिकित्सक उसकी स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
डॉक्टरों का दावा- करीब 25 साल बाद सामने आया ऐसा मामला
चिकित्सकों के मुताबिक, कानपुर में करीब 25 साल बाद इस तरह का दुर्लभ मामला सामने आया है, जिसमें पेट में इतनी लंबी लाठी घुसने के बावजूद सफल सर्जरी कर मरीज की जान बचाई गई।
इस तरह की चोट में सबसे बड़ी चुनौती अंदरूनी अंगों को होने वाले नुकसान और अत्यधिक रक्तस्राव जैसे जोखिमों को नियंत्रित करना होता है।
हैलट अस्पताल के सीनियर सर्जन्स की टीम द्वारा सफलतापूर्वक ऑपरेशन पूरा किए जाने को महत्वपूर्ण चिकित्सकीय सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
डॉक्टरों की तत्परता से बची छात्र की जान
विशाल के मामले में शुरुआती उपचार से लेकर तिर्वा मेडिकल कॉलेज से समय पर कानपुर रेफर किए जाने और हैलट में तत्काल ऑपरेशन शुरू करने तक चिकित्सकीय टीम की तत्परता महत्वपूर्ण रही।
करीब चार घंटे की जटिल सर्जरी के बाद पेट में धंसी तीन फीट लंबी लाठी को निकालकर छात्र की जान बचाने में डॉक्टर सफल रहे।
अब छात्र के खतरे से बाहर होने की खबर से उसके परिजनों ने भी राहत की सांस ली है।