रिपोर्ट: राहुल द्विवेदी | NHP भारत
कन्नौज। पीएम श्री कंपोजिट स्कूल गुगरापुर में चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विद्यालय में शिक्षकों के बीच कथित विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और लंबे समय से समाधान नहीं निकलने के कारण अब ग्रामीणों और अभिभावकों में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। बुधवार को कई दिनों बाद विद्यालय पहुंचे प्रधानाध्यापक राकेन्द्र सक्सेना को विरोध का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों और बच्चों ने उनकी कार को घेर लिया और उन्हें विद्यालय में प्रवेश नहीं करने देने की बात कही।
घटना के बाद विद्यालय की स्थिति और बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मामला कई दिनों से अधिकारियों के संज्ञान में है, लेकिन अब तक ऐसा समाधान नहीं निकल सका जिससे विद्यालय का माहौल सामान्य हो सके।
हालांकि प्रधानाध्यापक, शिक्षकों और बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे प्रकरण में सभी पक्षों को सुनते हुए निष्पक्ष विभागीय जांच जरूरी है।
कई दिनों बाद स्कूल पहुंचे प्रधानाध्यापक, हुआ विरोध
जानकारी के मुताबिक, प्रधानाध्यापक राकेन्द्र सक्सेना कई दिनों के बाद बुधवार को पीएम श्री कंपोजिट स्कूल गुगरापुर पहुंचे थे।
उनके विद्यालय पहुंचते ही वहां मौजूद ग्रामीणों और बच्चों ने विरोध शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि उनकी कार को घेर लिया गया और विद्यालय में प्रवेश नहीं करने देने की बात कही गई।
इस घटनाक्रम से साफ है कि विद्यालय के भीतर चल रहा विवाद अब केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण और अभिभावक भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
अधिकारियों तक पहुंच चुका है मामला
बताया जा रहा है कि विद्यालय से संबंधित शिकायतें पिछले कई दिनों से विभागीय अधिकारियों के कार्यालयों तक पहुंच रही हैं। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों पर अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि विवाद का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
ऐसे में स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।
शिक्षक-शिक्षक विवाद से शैक्षणिक माहौल प्रभावित होने का आरोप
विद्यालय में शिक्षकों के बीच आपसी तनाव और विवाद होने की बात भी सामने आ रही है। इसके साथ ही निलंबन जैसी विभागीय कार्रवाई को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी हुई बताई जा रही है।
अभिभावकों और ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की पढ़ाई को लेकर है। उनका कहना है कि विद्यालय में यदि शिक्षक और प्रशासनिक स्तर पर लगातार विवाद बना रहेगा तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के शैक्षणिक माहौल पर पड़ेगा।
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के हित को प्राथमिकता देते हुए विवाद का जल्द समाधान कराने की मांग की जा रही है।
BSA कन्नौज की कार्यप्रणाली पर सवाल
मामले का स्थायी समाधान नहीं निकलने के कारण BSA कन्नौज और बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
आरोप है कि विवाद लंबे समय से चलने के बावजूद स्थिति सामान्य कराने के लिए प्रभावी समाधान नहीं हो पाया। हालांकि विभाग की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सवाल यह भी है कि यदि मामला पहले से अधिकारियों के संज्ञान में था तो विद्यालय में ऐसी परिस्थितियां क्यों बनीं कि प्रधानाध्यापक के पहुंचने पर ग्रामीणों और बच्चों ने विरोध शुरू कर दिया।
बच्चों का विरोध में शामिल होना गंभीर चिंता
विद्यालय से जुड़े किसी प्रशासनिक अथवा शिक्षकीय विवाद में बच्चों का शामिल होना चिंता का विषय है। विद्यार्थियों के लिए स्कूल का वातावरण पढ़ाई, अनुशासन और सुरक्षित शैक्षणिक गतिविधियों पर केंद्रित होना चाहिए।
इसलिए यह भी जांच का विषय हो सकता है कि बच्चे किन परिस्थितियों में विरोध में शामिल हुए और पूरे घटनाक्रम का उनकी पढ़ाई एवं मानसिक वातावरण पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
दोनों पक्षों को सुनकर स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों और शिक्षकों की मांग है कि सक्षम वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचें और विवाद से जुड़े सभी पक्षों की बात सुनें।
इसके बाद आरोपों, शिकायतों और विभागीय कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। साथ ही विद्यालय में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे आगे किसी प्रकार का टकराव न हो और शिक्षण कार्य सामान्य रूप से चलता रहे।
फिलहाल पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों के अगले कदम पर नजर है। स्थानीय लोगों की मांग है कि विवाद को लंबा खींचने के बजाय जल्द समाधान कराया जाए, ताकि पीएम श्री कंपोजिट स्कूल गुगरापुर में बच्चों की पढ़ाई और विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित न हो।
नोट: खबर में शामिल कई आरोप स्थानीय लोगों एवं संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। BSA, प्रधानाध्यापक और अन्य संबंधित पक्षों का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी शामिल किया जाना उचित होगा।