कानपुर में जीएसटी विभाग की सचल दल इकाई-1 द्वारा चकरपुर के पास सुपाड़ी से लदे दो ट्रकों को पकड़े जाने का मामला चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों ट्रकों को 21 सितंबर को रोका गया था। बताया जा रहा है कि सुपाड़ी की खेप कर्नाटक की TSH ट्रेडर्स से लोड हुई थी और दस्तावेजों में इसकी डिलीवरी कानपुर के किदवई नगर स्थित जिंदल एंटरप्राइजेज को दिखाई गई थी। हालांकि आरोप है कि माल निर्धारित पते के बजाय SNK पान मसाला फैक्ट्री की ओर ले जाया जा रहा था। ट्रकों की बुकिंग INDOARYA ट्रांसपोर्ट के माध्यम से किए जाने की बात सामने आई है। इन दावों की अंतिम पुष्टि संबंधित बिल, बिल्टी, ई-वे बिल और विभागीय रिकॉर्ड की जांच से ही हो सकेगी।
मामले में विभागीय प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि 21 सितंबर को पकड़े गए ट्रकों के संबंध में नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और इस बीच माल छुड़ाने के प्रयास भी किए गए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जीएसटी अधिकारियों ने संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया है। यदि निर्धारित समय के भीतर माल पर दावा करने के लिए कोई पक्ष सामने नहीं आता है तो विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब सुपाड़ी की आपूर्ति से जुड़े कारोबार और पान मसाला निर्माताओं तक माल की आवाजाही को लेकर कथित कर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए। इसी आधार पर अब मामले में CBI जांच की मांग उठाई जा रही है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि CBI जांच की मांग किया जाना और किसी मामले में CBI जांच शुरू होना अलग-अलग बातें हैं; उपलब्ध विवरण में इस प्रकरण की CBI जांच के आदेश या जांच शुरू होने की पुष्टि नहीं है।
अब पूरे मामले में ट्रकों से मिले बिल, बिल्टी, ई-वे बिल, सप्लायर और खरीदार के रिकॉर्ड, बुकिंग विवरण तथा माल की वास्तविक डिलीवरी लोकेशन का मिलान महत्वपूर्ण होगा। यदि जांच में दस्तावेजों और माल की वास्तविक आवाजाही के बीच कोई नियम-विरुद्ध अंतर सामने आता है तो संबंधित पक्षों की टैक्स देनदारी और अन्य वैधानिक कार्रवाई का प्रश्न उठ सकता है। फिलहाल टैक्स चोरी के आरोप जांच का विषय हैं और अंतिम स्थिति जीएसटी विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।