कौन हैं प्रो. निर्मला यादव? राम मंदिर ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी की चर्चा

Firozabad

कौन हैं प्रो. निर्मला यादव? श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सदस्य बनाए जाने की चर्चा, RSS और राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा रहा परिवार

Sep 2, 2026
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फिरोजाबाद/शिकोहाबाद। प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में शिकोहाबाद के प्रतिष्ठित उरावर हाउस की बहू प्रो. निर्मला यादव को ट्रस्टी सदस्य के रूप में मनोनीत किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस खबर के बाद शिकोहाबाद के साथ उनके मायके अवागढ़, एटा में भी खुशी का माहौल बताया जा रहा है। प्रो. निर्मला यादव लंबे समय से शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रही हैं तथा उनका परिवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा रहा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्रो. निर्मला यादव हिंदी विषय में पीएचडी हैं और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक सेवाएं दे चुकी हैं। उनके परिवार के कई सदस्यों की आरएसएस और राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका होने की बात भी सामने आती रही है।

34 वर्ष की उम्र में बनी थीं बीडीएम डिग्री कॉलेज की प्राचार्या

जानकारी के अनुसार, वर्ष 1999 में करीब 34 वर्ष की आयु में प्रो. निर्मला यादव को शिकोहाबाद के बीडीएम डिग्री कॉलेज की प्राचार्या नियुक्त किया गया था। बताया जाता है कि वर्ष 1999 से 2006 तक उन्होंने यहां शैक्षणिक व्यवस्था और अनुशासन को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया।

इसके बाद उन्होंने फिरोजाबाद के एमजी बालिका पीजी कॉलेज में प्राचार्या के रूप में जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2021 में वह सेवानिवृत्त हुईं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्तमान में वह राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की उपाध्यक्ष के रूप में शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं।

RSS और राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा रहा परिवार

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्रो. निर्मला यादव के ससुराल पक्ष का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राम मंदिर आंदोलन से पुराना जुड़ाव रहा है। उनके ससुर स्व. सूर्य कुमार यादव भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वह आरएसएस से सक्रिय रूप से जुड़े और संघ में विभाग संचालक का दायित्व संभालने की जानकारी है।

प्रो. निर्मला यादव के पति स्व. हरेंद्र यादव 'बाबा' ने कानून की पढ़ाई की थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उन्होंने वकालत को पेशे के रूप में अपनाने के बजाय संगठनात्मक और सामाजिक कार्यों को प्राथमिकता दी। वह वर्ष 1980 से 2002 तक आरएसएस में सक्रिय रहे।

1992 के राम मंदिर आंदोलन में जेल गए थे पति

बताया जाता है कि वर्ष 1992 के राम मंदिर आंदोलन के दौरान हरेंद्र यादव 'बाबा' जेल भी गए थे। उन्हें भाजपा की ओर से शिकोहाबाद नगर पालिका अध्यक्ष पद का टिकट दिए जाने की बात भी कही जाती है, लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने के बजाय संगठन सेवा को प्राथमिकता दी।

वर्ष 2021 में कासगंज के सोरों क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पर उनका शव मिला था। उनकी मृत्यु की परिस्थितियों को लेकर उस समय कई सवाल भी उठे थे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रो. निर्मला यादव के जेठ स्व. योगेंद्र सिंह यादव भी आरएसएस से जुड़े रहे और जिला संचालक का दायित्व संभाला। उनके आपातकाल के दौरान जेल जाने और वर्ष 1992 के अयोध्या आंदोलन के दौरान भी कारागार में रहने की जानकारी दी गई है।

परिवार में सैन्य सेवा की भी परंपरा

प्रो. निर्मला यादव की एक पुत्री श्वेता हैं, जिनका विवाह जोधपुर में हुआ है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, उनके दामाद मुकेश कुमार सीमा सुरक्षा बल (BSF) में कमांडेंट के पद पर कार्यरत हैं।

शिकोहाबाद स्थित उरावर हाउस में परिवार के सदस्यों ने प्रो. निर्मला यादव को नई जिम्मेदारी मिलने की खबर पर खुशी जताई है।

जल्द अयोध्या जाकर दायित्व संभालने की बात

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार को मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से प्रो. निर्मला यादव को ट्रस्ट में शामिल किए जाने की जानकारी मिली। इस पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे अपने परिवार के लिए भावुक और गौरवपूर्ण क्षण बताया।

मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें जो भी दायित्व सौंपा जाएगा, उसका निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करेंगी। उन्होंने जल्द अयोध्या पहुंचकर औपचारिक रूप से जिम्मेदारी संभालने और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यों में योगदान देने की बात कही है।

नोट: यह खबर प्राप्त जानकारी और उपलब्ध मीडिया विवरणों के आधार पर तैयार की गई है। ट्रस्ट में नियुक्ति से संबंधित आधिकारिक विवरण सामने आने पर खबर को उसके अनुसार अपडेट किया जा सकता है।

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