अम्बेडकरनगर। कटेहरी विकास खंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम सभा आशाजीतपुर अहिरान में तालाब खुदाई और नलकूप/नल रिबोर से जुड़े विकास कार्यों में कथित अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं। गांव निवासी जगदम्बा दुबे पुत्र स्व. जगमोहन दुबे ने संबंधित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर वर्ष 2021 से 2026 के बीच कराए गए इन कार्यों की विस्तृत और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम पंचायत में सरकारी योजनाओं के तहत स्वीकृत तालाब खुदाई और नल रिबोर के कई कार्यों को अभिलेखों में पूर्ण दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर कुछ कार्य अधूरे हैं या कथित तौर पर कराए ही नहीं गए। शिकायत में ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
जगदम्बा दुबे का आरोप है कि यदि संबंधित अवधि में कराए गए विकास कार्यों और उनके भुगतान का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उन्होंने अधिकारियों से प्रत्येक स्वीकृत कार्य की लागत, भुगतान, कार्यस्थल और वर्तमान स्थिति की जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जिन योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीणों को सुविधाएं उपलब्ध कराना था, उनका पूरा लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अभिलेखों में कार्यों की जो स्थिति दिखाई गई है, उसका मौके की वास्तविक स्थिति से मिलान किया जाना जरूरी है।
प्रार्थना पत्र में वर्ष 2021 से 2026 के बीच ग्राम सभा में स्वीकृत और पूर्ण दर्शाए गए तालाब खुदाई, नलकूप तथा नल रिबोर कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही संबंधित अभिलेखों, स्वीकृत धनराशि और भुगतान का भी सत्यापन कराने की मांग की गई है।
जगदम्बा दुबे ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि जांच में यदि किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारी, कर्मचारी अथवा अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार वैधानिक और विभागीय कार्रवाई की जाए।
मामले को लेकर गांव में चर्चा है और शिकायतकर्ता ने प्रशासन से शीघ्र जांच की मांग की है। हालांकि भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग संबंधी आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता के दावे हैं। किसी सक्षम जांच एजेंसी या प्रशासन की जांच में आरोप साबित होने की जानकारी अभी सामने नहीं आई है। संबंधित ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी का पक्ष भी उपलब्ध नहीं है। प्रशासनिक जांच और भौतिक सत्यापन के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।