तम्बौर में बस स्टॉप के पास स्थित परिसर का मामला, प्रशासन का दावा—गाटा संख्या 541 अभिलेखों में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज; मुतवल्ली बोले—5 नवंबर को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में अगली सुनवाई
सीतापुर। जिले के तम्बौर कस्बे में बस स्टॉप के समीप स्थित जियाउल उलूम मस्जिद और उससे जुड़े निर्माणों को लेकर लहरपुर तहसील प्रशासन ने नोटिस जारी किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रशासनिक अधिकारियों ने 5 अक्टूबर को मस्जिद परिसर की दीवारों पर नोटिस चस्पा किया। नोटिस में संबंधित जमीन पर बने निर्माणों को अवैध बताते हुए उन्हें सात दिनों के भीतर हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, मदरसा जियाउल उलूम के मुतवल्ली मौलाना शाहिद का कहना है कि संबंधित प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। उनके अनुसार मामले की अगली सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में 5 नवंबर को होनी है और प्रबंधन न्यायालय के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।
5 अक्टूबर को परिसर में चस्पा किया गया नोटिस
उपलब्ध जानकारी के अनुसार लहरपुर तहसील प्रशासन की ओर से 5 अक्टूबर को जियाउल उलूम मस्जिद परिसर में नोटिस चस्पा किया गया।
नोटिस में जमीन और उस पर बने निर्माणों की स्थिति का उल्लेख करते हुए प्रबंधन को निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
नोटिस सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
गाटा संख्या 541 को लेकर है पूरा मामला
प्रशासन के अनुसार विवाद से संबंधित जमीन गाटा संख्या 541 में दर्ज है।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी राजस्व अभिलेखों में संबंधित भूमि की प्रकृति कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है।
इसी आधार पर प्रशासन ने संबंधित जमीन पर मौजूद निर्माणों को लेकर नोटिस जारी किया है।
मस्जिद, दुकानों और अन्य निर्माणों का नोटिस में उल्लेख
प्रशासनिक नोटिस में संबंधित भूमि पर बनी मस्जिद, उससे जुड़ी दुकानों और अन्य निर्माणों को अवैध निर्माण बताया गया है।
प्रबंधन को सात दिनों की समयसीमा देते हुए इन्हें हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
यह प्रशासन का पक्ष है। भूमि और निर्माणों की कानूनी स्थिति से संबंधित विवाद न्यायालय में विचाराधीन बताए जाने के कारण मामले का अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित न्यायिक आदेशों पर निर्भर करेगा।
सात दिन में निर्माण नहीं हटाया तो कार्रवाई की चेतावनी
प्रशासन की ओर से चस्पा किए गए नोटिस में निर्धारित अवधि के भीतर निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
नोटिस के मुताबिक यदि सात दिनों के भीतर संबंधित निर्माण नहीं हटाए जाते हैं, तो प्रशासन की ओर से उन्हें हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासनिक नोटिस के बाद अब यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
मुतवल्ली मौलाना शाहिद ने रखा प्रबंधन का पक्ष
नोटिस जारी होने के बाद मदरसा जियाउल उलूम के मुतवल्ली मौलाना शाहिद ने शुक्रवार को मीडिया के सामने प्रबंधन का पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि संबंधित भूमि और निर्माणों से जुड़ा मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन है।
उनका कहना है कि प्रबंधन न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करता है और न्यायालय के निर्णय का इंतजार करेगा।
‘अदालत का जो फैसला होगा, उसे स्वीकार करेंगे’
मौलाना शाहिद के अनुसार प्रबंधन मामले में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि न्यायालय की ओर से जो भी आदेश या फैसला आएगा, प्रबंधन उसका पालन करेगा।
उनका कहना है कि चूंकि प्रकरण अदालत में विचाराधीन है, इसलिए वे न्यायालय के निर्णय के अनुसार ही आगे की स्थिति तय करेंगे।
5 नवंबर को अगली सुनवाई होने की जानकारी
मुतवल्ली मौलाना शाहिद ने बताया कि संबंधित मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को निर्धारित है।
उनके अनुसार प्रकरण की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में चल रही है।
अब प्रशासन द्वारा जारी नोटिस और न्यायालय में चल रही कार्यवाही के बीच आगे क्या स्थिति बनती है, यह आगामी प्रशासनिक और न्यायिक आदेशों के बाद स्पष्ट हो सकेगा।
मामला विचाराधीन होना और कार्रवाई पर रोक होना अलग-अलग कानूनी स्थिति
इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि उपलब्ध विवरण में किसी न्यायालय द्वारा प्रशासनिक कार्रवाई पर स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) दिए जाने का उल्लेख नहीं है।
केवल किसी मामले का न्यायालय में विचाराधीन होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि प्रशासन की कार्रवाई पर रोक लगी हुई है।
यदि न्यायालय द्वारा कोई अंतरिम आदेश या स्थगन दिया गया है तो उसकी वास्तविक स्थिति संबंधित न्यायिक आदेश की प्रति से ही स्पष्ट हो सकती है।
इसलिए प्रकरण के अदालत में लंबित होने और प्रशासनिक कार्रवाई पर न्यायालय की रोक होने को अलग-अलग कानूनी स्थितियों के रूप में देखा जाना चाहिए।
जमीन की कानूनी स्थिति पर प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण
प्रशासन सरकारी अभिलेखों के आधार पर गाटा संख्या 541 को कब्रिस्तान की जमीन बताते हुए निर्माणों पर सवाल उठा रहा है, जबकि मस्जिद प्रबंधन ने मामले के न्यायालय में विचाराधीन होने की बात कही है।
ऐसे में संबंधित भूमि का स्वामित्व, उसकी दर्ज प्रकृति और निर्माणों की वैधानिक स्थिति से जुड़ा अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध अभिलेखों तथा सक्षम न्यायालय के आदेश के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
आगे की कार्रवाई पर टिकी स्थानीय लोगों की नजर
सात दिनों की समयसीमा वाले प्रशासनिक नोटिस और 5 नवंबर को बताई गई अगली न्यायिक सुनवाई के कारण अब इस मामले में आगे होने वाली कार्रवाई पर स्थानीय लोगों की नजर है।
प्रशासन नोटिस के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाता है या इस बीच न्यायालय से कोई नया आदेश सामने आता है, इससे मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।
फिलहाल प्रशासन ने संबंधित निर्माणों को हटाने का नोटिस दिया है, जबकि प्रबंधन ने न्यायालय के फैसले का इंतजार करने की बात कही है।
NHP Bharat News | तम्बौर, सीतापुर