वाराणसी: गीता चेतना अभियान के 30वें विश्राम में बोले कर्मयोगी गौरव मिश्र- युवा गीता से जुड़ेगा तो भारत बनेगा विश्व का मार्गदर्शक

Varanasi

युवा पीढ़ी गीता से जुड़ेगी तो भारत विश्व का मार्गदर्शक बनेगा : कर्मयोगी गौरव मिश्र

Jul 10, 2026
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वाराणसी (चौबेपुर): योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर कर्मयोगी पीठ द्वारा संचालित गीता चेतना अभियान का 30वां विश्राम शुक्रवार को आर.के.एम. पब्लिक स्कूल, लेढ़ूपुर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों के बीच श्रीमद्भगवद्गीता के जीवनोपयोगी संदेश, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रेरक रूप से प्रस्तुत किया गया। आयोजन में विद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं तथा सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं कर्मयोगी पीठ के प्रमुख संयोजक कर्मयोगी गौरव मिश्र ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सफल जीवन, सशक्त व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण का कालजयी मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी तनाव, भ्रम और दिशाहीनता जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में गीता का ज्ञान युवाओं को आत्मविश्वास, धैर्य, कर्तव्यनिष्ठा और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि "जिस राष्ट्र की युवा पीढ़ी गीता को समझ लेती है, उसे भविष्य की चिंता नहीं करनी पड़ती। गीता व्यक्ति को परिस्थितियों का दास नहीं, बल्कि उनका विजेता बनना सिखाती है।" उन्होंने युवाओं से प्रतिदिन गीता का अध्ययन करने और उसके सिद्धांतों को व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।

कर्मयोगी गौरव मिश्र ने अपने वक्तव्य में महात्मा गांधी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, स्वामी विवेकानंद, श्री अरविंद, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और स्वामी प्रभुपाद जैसे महान व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए बताया कि इन सभी ने गीता के संदेश को अपने जीवन और कार्यों का आधार बनाया। उन्होंने कहा कि गीता आज भी संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का सर्वोत्तम स्रोत है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्मयोगी पीठ के संरक्षक राजेश मिश्र ने कहा कि यदि भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और विश्वगुरु बनाना है तो बच्चों के हाथों में आधुनिक तकनीक के साथ-साथ गीता का ज्ञान भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान हमें साधन देता है, लेकिन गीता उन साधनों के सदुपयोग की बुद्धि प्रदान करती है।

पूर्वी क्षेत्र संयोजक श्यामकार्तिक मिश्र ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षा और जीवन दोनों में सफलता के लिए केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है। आत्मविश्वास, अनुशासन, सकारात्मक सोच, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुण सफलता की असली कुंजी हैं, जिनका सर्वोत्तम मार्गदर्शन श्रीमद्भगवद्गीता में मिलता है।

कार्यक्रम के दौरान गीता आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतियोगिता में भाग लिया और गीता से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिवम, अंजली, रुद्र, मुस्कान, आस्था, अभिनव, तान्या, अनुराग, शशांक और ऋतिका सहित अन्य विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

इस अवसर पर सचिव संतोष सिंह, किशन पटेल तथा विद्यालय के शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने गीता चेतना अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी में नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रबंधक सुनील मिश्र ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी कर्मयोगी पीठ के सहयोग से गीता चेतना अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।

अंत में सभी विद्यार्थियों ने सामूहिक गीता संकल्प लेते हुए प्रतिदिन श्रीमद्भगवद्गीता का कम से कम एक श्लोक पढ़ने, उसके अर्थ को समझने और उसके संदेश को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। यह आयोजन विद्यार्थियों में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना गया।

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सामाजिक मामला
अजय कुमार चौबे
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अजय कुमार चौबे
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