खागा, फतेहपुर। गुरुवार देर रात से शुरू हुई तेज हवा और बारिश ने जिले के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। ऐरायां विकास खंड क्षेत्र में खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल कई स्थानों पर गिर गई। किसानों के मुताबिक सबसे ज्यादा असर लंबी किस्म के बासमती धान पर पड़ा है। वहीं तेज हवा से केले के पौधों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
किसानों को आशंका है कि यदि बारिश और तेज हवा का दौर जारी रहा तो फसलों को होने वाले नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है।
कोड़ारवर में खेतों में बिछी तैयार धान की फसल
ऐरायां विकास खंड के कोड़ारवर गांव के किसानों के अनुसार लगातार बारिश और तेज हवा के झोंकों के कारण पककर तैयार धान की फसल खेतों में गिर गई है।
किसान राम गोपाल दुबे, बरसाती पटेल, उदय सिंह पटेल और कंचन पटेल ने बताया कि क्षेत्र में करीब 40 प्रतिशत धान की फसल कटाई के लिए तैयार थी। इसी बीच बदले मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
बासमती धान पर तेज हवा का ज्यादा असर
किसानों का कहना है कि बासमती धान के पौधों की लंबाई अधिक होने के कारण तेज हवा का प्रभाव इस फसल पर ज्यादा पड़ा है। कई खेतों में फसल जमीन पर बिछ गई है।
किसानों को डर है कि धान के पौधे जमीन पर गिरने और लगातार पानी के संपर्क में रहने से दानों की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। यदि खेतों में पानी बना रहा तो तैयार दानों के खराब होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
केले के पौधों को भी नुकसान
बारिश और तेज हवा का असर धान तक सीमित नहीं रहा। क्षेत्र में की जा रही केले की खेती को भी नुकसान पहुंचा है।
लाडलेपुर के किसान शाहिद और लाठी-टिकरी क्षेत्र के अफाक के मुताबिक तेज हवा के कारण कई स्थानों पर केले के पौधे गिर गए हैं और पत्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं।
किसानों का कहना है कि केले के पौधे गिरने से तैयार हो रही फसल और उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे किसान
धान की कटाई का समय नजदीक होने के कारण किसान मौसम को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। खेतों में तैयार फसल गिरने के बाद अब किसानों की निगाह मौसम साफ होने पर टिकी हुई है।
किसानों का कहना है कि यदि बारिश और तेज हवा जारी रही तो धान और केले के साथ दूसरी फसलों को भी नुकसान हो सकता है।
फिलहाल क्षेत्र में फसलों को हुए कुल नुकसान का कोई आधिकारिक आकलन सामने नहीं आया है। किसानों द्वारा बताई गई क्षति का वास्तविक दायरा कृषि विभाग के सर्वेक्षण के बाद स्पष्ट हो सकेगा।
रिपोर्ट: बिनीत तिवारी, NHP भारत NEWS, खागा-फतेहपुर