सीतापुर के बिरसिंहपुर में भारतीय किसान यूनियन का धरना-प्रदर्शन, बाढ़ पीड़ित किसानों के लिए मुआवजे और राहत की मांग
सिधौली तहसील के नायब तहसीलदार कृपानाथ सिंह और लेखपाल शिवम सिंह ने सुनीं किसानों की समस्याएं, जिलाधिकारी को संबोधित 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया
अटरिया/सीतापुर, उत्तर प्रदेश। जनपद सीतापुर की सिधौली तहसील क्षेत्र के ग्राम बिरसिंहपुर में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) के नेतृत्व में किसानों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने भारी बारिश और गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण फसलों को हुए नुकसान पर नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रशासन से उचित मुआवजा और राहत उपलब्ध कराने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बाढ़ प्रभावित गांवों में खाद्यान्न वितरण, स्वास्थ्य सुविधाओं, पशुओं के चारे, बैंक ऋण, बिजली बिल, फसल बीमा, आवास सहायता और ग्रामीण सड़कों की मरम्मत सहित कई मुद्दे उठाए।
किसानों की समस्याओं को सुनने के लिए सिधौली तहसील के नायब तहसीलदार कृपानाथ सिंह और लेखपाल शिवम सिंह धरना स्थल पर पहुंचे।
इस दौरान किसान नेताओं ने जिलाधिकारी सीतापुर को संबोधित 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान का आश्वासन दिया।
बिरसिंहपुर गांव में किसानों ने किया धरना-प्रदर्शन
सिधौली तहसील क्षेत्र के बिरसिंहपुर गांव में भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) के नेतृत्व में किसान एकत्र हुए।
किसानों ने भारी बारिश और बाढ़ से उत्पन्न समस्याओं को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की।
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना था कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचा है और ग्रामीण परिवारों को विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की कि उनकी समस्याओं का संज्ञान लेकर संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई की जाए।
भारी बारिश और गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर से नुकसान का मुद्दा
धरने के दौरान किसानों ने भारी बारिश और गोमती नदी के जलस्तर में वृद्धि को प्रमुख मुद्दा बनाया।
किसानों का कहना है कि बारिश और बाढ़ के कारण कई स्थानों पर कृषि फसलों को नुकसान हुआ है।
इससे प्रभावित किसानों के सामने आर्थिक कठिनाइयां उत्पन्न हुई हैं।
किसान नेताओं ने मांग की कि संबंधित विभाग प्रभावित खेतों का सर्वे कराएं और वास्तविक नुकसान के आधार पर पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
हालांकि प्रभावित कृषि भूमि के क्षेत्रफल और कुल आर्थिक नुकसान का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग
किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से फसल नुकसान के मुआवजे की मांग उठाई।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि जिन किसानों की फसलें बाढ़ और बारिश से प्रभावित हुई हैं, उन्हें राहत प्रदान की जानी चाहिए।
इसके लिए राजस्व और कृषि विभाग द्वारा नुकसान का आकलन कराए जाने की आवश्यकता बताई गई।
किसानों ने मांग की कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
धरना स्थल पर पहुंचे नायब तहसीलदार और लेखपाल
किसानों के धरना-प्रदर्शन के दौरान सिधौली तहसील के नायब तहसीलदार कृपानाथ सिंह और लेखपाल शिवम सिंह मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों ने धरने पर मौजूद किसान नेताओं से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना।
इस दौरान किसानों ने बाढ़, फसल नुकसान और ग्रामीण सुविधाओं से संबंधित मांगें अधिकारियों के सामने रखीं।
किसान नेताओं ने प्रशासन से समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
जिलाधिकारी को संबोधित 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा
धरना-प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी सीतापुर को संबोधित 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन नायब तहसीलदार और लेखपाल को सौंपा।
ज्ञापन में किसानों की आर्थिक समस्याओं के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विषय शामिल रहे।
संगठन ने मांग की कि ज्ञापन में उल्लिखित समस्याओं पर संबंधित विभागों के माध्यम से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उपलब्ध विवरण में ज्ञापन को 12 सूत्रीय बताया गया है, जबकि साझा जानकारी में 11 प्रमुख मांगों का उल्लेख किया गया है। शेष बिंदु की पुष्टि मूल ज्ञापन से की जा सकती है।
बाढ़ प्रभावित गांवों में खाद्यान्न वितरण की मांग
किसानों ने बाढ़ प्रभावित गांवों में खाद्यान्न वितरण की समुचित व्यवस्था करने की मांग की।
संगठन का कहना है कि प्रभावित परिवारों को आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
किसानों ने प्रशासन से पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें सरकारी योजनाओं और राहत प्रावधानों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग
ज्ञापन में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया गया।
किसानों ने मांग की कि प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बारिश और जलभराव के कारण स्वच्छता संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं, इसलिए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सकीय सहायता की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।
किसानों ने संबंधित स्वास्थ्य विभाग से इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था का मुद्दा
धरने के दौरान किसानों ने पशुपालकों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया।
किसानों का कहना था कि बाढ़ और बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संगठन ने प्रशासन से प्रभावित पशुपालकों की समस्याओं का आकलन कराने और आवश्यकता के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।
पशुओं में फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम की मांग
किसानों ने पशुओं में बीमारियों की रोकथाम के लिए भी आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
संगठन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी महत्वपूर्ण है।
किसानों ने पशुपालन विभाग से जरूरत के अनुसार पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने और बीमारी की रोकथाम के उपाय करने का अनुरोध किया।
हालांकि किसी विशेष पशु रोग के फैलने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
बैंक ऋण और बिजली बिल में राहत की मांग
किसानों ने बैंक ऋण और बिजली बिल में राहत प्रदान करने की मांग की।
उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
ऐसे में सरकार और संबंधित विभागों को पात्र किसानों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लागू नियमों के अनुसार राहत देने पर विचार करना चाहिए।
हालांकि बैंक ऋण माफी या बिजली बिल माफी के संबंध में किसी नए सरकारी निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने की मांग
भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) ने प्रभावित किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने की मांग की।
किसानों ने कहा कि जिनकी फसलें प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुई हैं, उनके बीमा दावों का नियमानुसार निस्तारण कराया जाए।
इसके लिए कृषि विभाग, संबंधित बीमा कंपनियों और अन्य सक्षम संस्थाओं के बीच समन्वय की आवश्यकता हो सकती है।
संगठन ने पात्र किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
प्रभावित परिवारों को सरकारी सहायता और आवास की मांग
ज्ञापन में बाढ़ प्रभावित गरीब परिवारों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल रही।
किसानों ने कहा कि जिन परिवारों के मकान बारिश या बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनका सर्वे कराया जाना चाहिए।
इसके बाद पात्र परिवारों को लागू सरकारी योजनाओं के अंतर्गत आवास अथवा अन्य निर्धारित सहायता उपलब्ध कराई जाए।
हालांकि प्रभावित मकानों की संख्या और संबंधित गांवों का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
क्षतिग्रस्त ग्रामीण सड़कों की मरम्मत का मुद्दा
किसानों ने ग्रामीण क्षेत्रों में खराब और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने की मांग की।
संगठन का कहना है कि खराब मार्गों के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
किसानों ने प्रशासन से संबंधित विभागों के माध्यम से मार्गों का निरीक्षण कराकर आवश्यक मरम्मत कार्य कराने का अनुरोध किया।
राशन कार्ड संबंधी समस्याओं के निस्तारण की मांग
किसानों ने पात्र ग्रामीण परिवारों के राशन कार्ड से जुड़ी समस्याओं को भी उठाया।
संगठन ने मांग की कि राशन कार्ड बनवाने, पात्र व्यक्तियों के नाम जोड़ने और अन्य संबंधित शिकायतों का नियमानुसार समाधान किया जाए।
किसानों ने संबंधित विभाग से शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण की अपेक्षा जताई।
ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति की मांग
धरने के दौरान किसानों ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन 18 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।
संगठन का कहना है कि बिजली की नियमित उपलब्धता कृषि कार्यों और ग्रामीण जीवन के लिए आवश्यक है।
किसानों ने विद्युत विभाग से आपूर्ति व्यवस्था में सुधार करने का अनुरोध किया।
हालांकि संबंधित गांवों में वर्तमान बिजली आपूर्ति की अवधि का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
भाकियू भानु के राष्ट्रीय महासचिव आशु चौधरी भी रहे मौजूद
धरना-प्रदर्शन में भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय महासचिव आशु चौधरी की उपस्थिति भी बताई गई है।
इसके अतिरिक्त भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम प्रकाश सिंह ने कार्यक्रम में भाग लिया।
दोनों संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों की उपस्थिति के बीच किसानों की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा गया।
राम प्रकाश सिंह सहित कई किसान नेता हुए शामिल
कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम प्रकाश सिंह के साथ प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष शुभम अवस्थी, युवा जिलाध्यक्ष धीरज सिंह और तहसील प्रभारी राजेश अवस्थी मौजूद रहे।
इसके अतिरिक्त संगठन के अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी धरना-प्रदर्शन में भाग लिया।
आयोजकों की ओर से हजारों कार्यकर्ताओं की उपस्थिति बताई गई है। हालांकि प्रतिभागियों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अधिकारियों ने समस्याओं के समाधान का दिया आश्वासन
धरना स्थल पर पहुंचे नायब तहसीलदार कृपानाथ सिंह और लेखपाल शिवम सिंह को किसान नेताओं ने ज्ञापन सौंपा।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
हालांकि किसी विशेष मांग को स्वीकार किए जाने, राहत राशि स्वीकृत होने या कार्रवाई की समयसीमा तय किए जाने की आधिकारिक जानकारी नहीं है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर किसानों की नजर
किसान नेताओं ने प्रशासन से मांग की कि ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों पर जल्द कार्रवाई की जाए।
उनका कहना है कि बाढ़ और बारिश से प्रभावित किसानों तथा ग्रामीण परिवारों को राहत मिलनी चाहिए।
किसानों ने फसल नुकसान के मुआवजे, सरकारी सहायता, ग्रामीण सुविधाओं और कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने की मांग की।
अब संबंधित विभागों की जांच और प्रशासनिक निर्णयों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन मांगों पर क्या कार्रवाई की गई है।
बिरसिंहपुर में धरने के बाद प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
सीतापुर जिले के सिधौली तहसील क्षेत्र के बिरसिंहपुर गांव में भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) के नेतृत्व में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया।
किसानों ने भारी बारिश और गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर से फसलों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की।
धरना स्थल पर पहुंचे नायब तहसीलदार कृपानाथ सिंह और लेखपाल शिवम सिंह को जिलाधिकारी के नाम संबोधित 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया।
अधिकारियों ने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है, जबकि वास्तविक राहत और विभागीय कार्रवाई की स्थिति की पुष्टि होना बाकी है।
NHP Bharat News | अटरिया, सिधौली, सीतापुर, उत्तर प्रदेश
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