कानपुर नगर की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह ने खुद को ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) के अधिकारी बताकर एक वरिष्ठ चिकित्सक को 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर ₹48 लाख की चपत लगाई। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
ठगी का तरीका और 'डिजिटल अरेस्ट'
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने एक सुनियोजित तरीके से चिकित्सक को फोन किया और उन्हें जांच और गिरफ्तारी का भय दिखाया। स्वयं को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर, उन्होंने चिकित्सक को 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और लगातार डराते हुए विभिन्न बैंक खातों में ₹48 लाख की राशि ट्रांसफर कराई।
पुलिस जांच और बरामदगी
मामले की जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनसे पुलिस को गिरोह की कार्यप्रणाली और डिजिटल लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस इन साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और संदिग्ध बैंक खातों की गहनता से जांच कर रही है।
गिरोह का दायरा और अन्य मामले
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि यह गिरोह केवल एक ही राज्य तक सीमित नहीं है। पुलिस के मुताबिक, देशभर में विभिन्न राज्यों में दर्ज चार अलग-अलग साइबर अपराध शिकायतों में इस गिरोह की संलिप्तता सामने आई है, जिनमें कुल ₹1.42 करोड़ की ठगी का विवरण मिला है। पुलिस को यह भी पता चला है कि ठगी की रकम को फर्जी फर्मों और बैंक खातों के माध्यम से देश भर में फैलाया गया था।
आगे की कार्रवाई
साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में एक अन्य आरोपी को वांछित घोषित किया है। फिलहाल, पुलिस की टीमें निम्नलिखित बिंदुओं पर काम कर रही हैं:
- संबंधित बैंक खातों के माध्यम से हुए लेनदेन का पूरा ब्योरा जुटाना।
- गिरोह में शामिल अन्य सदस्यों की पहचान करना और उनकी भूमिका की जांच करना।
- फर्जी फर्मों का उपयोग कर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के नेटवर्क को ध्वस्त करना।