चौकड़ा में तालाब की जमीन पर 30 साल से कब्जे का आरोप, जांच आख्या में भी कब्जा बरकरार मिलने का जिक्र; ग्रामीणों ने उठाई खुदाई की मांग
चरथावल/मुजफ्फरनगर। चरथावल क्षेत्र के ग्राम चौकड़ा में सरकारी तालाब की जमीन पर कथित कब्जे का मामला एक बार फिर चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि खसरा संख्या 1369 में दर्ज तालाब की भूमि के एक हिस्से पर करीब 30 वर्षों से कब्जा है। इसके कारण गांव और आसपास के खेतों से पानी की निकासी प्रभावित होने की शिकायत की जा रही है।
ग्रामीणों ने राजस्व एवं विकास विभाग से जमीन की विधिवत निशानदेही कराकर कथित कब्जा हटवाने और तालाब की खुदाई कराने की मांग की है।
9 अप्रैल को BDO चरथावल से की गई थी शिकायत
गांव निवासी वाजिद पुत्र असद अली ने 9 अप्रैल 2026 को खंड विकास अधिकारी (BDO) चरथावल को प्रार्थना पत्र देकर तालाब की जमीन से कब्जा हटवाने की मांग की थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि तालाब की जमीन पर वर्षों से कब्जा कर पेड़ और फसल उगाई जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब अपने वास्तविक स्वरूप में नहीं होने के कारण बरसात और गांव का पानी निकलने में परेशानी होती है। इससे रास्तों और आसपास के खेतों में जलभराव की समस्या पैदा होती है।
IGRS तक पहुंचा मामला, सचिव ने की मौके पर जांच
मामला बाद में जनसुनवाई IGRS तक पहुंचा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक शिकायत की जांच ग्राम सचिव गिरीश कुमार ने 23 अगस्त को मौके पर पहुंचकर की।
बताया गया है कि जांच आख्या में तालाब की भूमि पर सरफराज पुत्र इसराइल का कब्जा पूर्व की भांति बरकरार पाए जाने का उल्लेख किया गया है। मौके की स्थिति से संबंधित तस्वीरें भी जांच आख्या के साथ लगाए जाने की बात कही गई है।
हालांकि जमीन की वास्तविक सीमाएं, कब्जे का क्षेत्रफल और स्वामित्व/भूमि की श्रेणी राजस्व अभिलेखों की आधिकारिक पैमाइश एवं सीमांकन से ही अंतिम रूप से स्पष्ट हो सकती है।
सरफराज और नौशाद पर लगाया कब्जे का आरोप
ग्रामीणों ने सरफराज और नौशाद पुत्रगण इसराइल पर तालाब की जमीन पर कब्जा किए जाने का आरोप लगाया है।
इन आरोपों पर संबंधित व्यक्तियों का पक्ष फिलहाल उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
‘दो बार मशीन पहुंची, लेकिन नहीं हो सकी खुदाई’
गांव निवासी मोहसिन ने वीडियो के माध्यम से दावा किया कि तालाब की खुदाई के लिए इससे पहले भी दो बार मशीनें मौके पर पहुंच चुकी हैं, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका।
उनका आरोप है कि अधिकारियों को गुमराह कर कार्रवाई रुकवा दी गई। ग्रामीणों के मुताबिक हाल में सचिव, पटवारी और पुलिसकर्मी भी मौके पर पहुंचे थे, लेकिन इसके बावजूद तालाब की खुदाई का काम आगे नहीं बढ़ पाया।
JCB लेकर पहुंची टीम के वापस लौटने का दावा
ग्रामीणों का दावा है कि कथित कब्जा हटवाने और तालाब से संबंधित कार्रवाई के लिए राजस्व टीम JCB मशीन के साथ मौके पर पहुंची, लेकिन कार्रवाई पूरी किए बिना टीम को वापस लौटना पड़ा।
टीम किस कारण कार्रवाई पूरी नहीं कर सकी, इस संबंध में संबंधित राजस्व अधिकारी का आधिकारिक पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है।
ग्रामीण बोले- निशानदेही कराकर तालाब की खुदाई हो
ग्रामीणों की मांग है कि सबसे पहले राजस्व विभाग तालाब की भूमि की विधिवत पैमाइश और निशानदेही कराए। इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर यदि कोई अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार उसे हटाकर तालाब को उसके वास्तविक स्वरूप में लाया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब की खुदाई होने से गांव के पानी की निकासी बेहतर होगी और खेतों व रास्तों पर होने वाले जलभराव से भी राहत मिल सकेगी।
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं कि शिकायत और जांच आख्या के बाद राजस्व विभाग तालाब की पैमाइश व सीमांकन कराता है या नहीं और जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होने पर उसे हटाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
रिपोर्ट: अनिल पुंडीर | NHP Bharat News, चरथावल