NHP भारत Published by: Kishan Shrivastav
चकिया | NHP भारत: चंदौली जनपद के चकिया तहसील अंतर्गत पचवनिया पुल के समीप सिंचाई संकट और अधूरे निर्माण कार्य को लेकर किसानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। उत्तर प्रदेश किसान सभा के नेतृत्व में क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों के किसानों ने बेमियादी धरना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
धरने में पचवनिया, केराडीह, मौजपुर, वीरपुर, मनसापुर, ठेकहा सहित आसपास के गांवों के किसान बड़ी संख्या में शामिल होकर प्रशासन और सिंचाई विभाग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
चार से पांच महीने से अधूरा पड़ा पुल निर्माण
धरना दे रहे किसानों का आरोप है कि पचवनिया पुल एवं कॉजवे (छलका) को तोड़कर नया निर्माण कार्य शुरू किया गया था, लेकिन पिछले चार से पांच महीनों से निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। किसानों का कहना है कि ठेकेदार की लापरवाही और विभागीय उदासीनता के कारण आज तक कार्य पूरा नहीं हो सका।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है और तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई है।
कम ऊंचाई वाला छलका बना सिंचाई संकट की वजह
किसानों के अनुसार, निर्माणाधीन नए छलके की ऊंचाई निर्धारित मानकों से काफी कम रखी गई है। इसके कारण नहर का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
किसानों का कहना है कि यदि छलके की ऊंचाई समय रहते नहीं बढ़ाई गई तो मौजपुर, मनसापुर, पचवनिया और ठेकहा सहित कई गांवों के सैकड़ों एकड़ खेत सिंचाई से वंचित रह जाएंगे।
धान की रोपाई प्रभावित, सूख रही नर्सरी
धरने पर बैठे किसानों ने बताया कि समय पर पानी नहीं मिलने से धान की रोपाई का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो गया है। खेतों में पानी नहीं पहुंचने के कारण तैयार धान की नर्सरी (बेहन) सूखने लगी है।
किसानों का कहना है कि यदि जल्द सिंचाई व्यवस्था बहाल नहीं हुई तो इस सीजन में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और कई परिवारों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी।
जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग
धरने का नेतृत्व कर रहे उत्तर प्रदेश किसान सभा के जिला मंत्री लालचंद एडवोकेट ने कहा कि किसानों की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी जायज मांगों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन करने का अधिकार देता है और किसान उसी अधिकार के तहत धरने पर बैठे हैं।
उन्होंने मांग की कि—
- जिलाधिकारी (DM) स्वयं मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करें।
- उप जिलाधिकारी (SDM) किसानों की समस्या का तत्काल समाधान कराएं।
- सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) तकनीकी खामियों की जांच करें।
- ठेकेदार को मानकों के अनुरूप छलके की ऊंचाई बढ़ाने के निर्देश दिए जाएं।
- सिंचाई व्यवस्था तत्काल बहाल कर किसानों की फसल बचाई जाए।
प्रशासन को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसान सभा और स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र होगा।
किसानों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर चकिया के प्रमुख मार्गों को जाम कर व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग और संबंधित ठेकेदार की होगी।
किसानों की प्रमुख मांगें
- पचवनिया पुल एवं कॉजवे का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाए।
- छलके की ऊंचाई तकनीकी मानकों के अनुसार बढ़ाई जाए।
- खेतों तक सिंचाई का पानी तत्काल पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
- निर्माण कार्य में हुई लापरवाही की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
- किसानों की फसल बचाने के लिए प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे।