अटरिया में भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक के पदाधिकारियों ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण, शारदा और गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर व आंधी-तूफान से फसलों को नुकसान का दावा; तत्काल सर्वे और आर्थिक सहायता की मांग
अटरिया/सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में बाढ़ और हालिया आंधी-तूफान से फसलों को हुए नुकसान को लेकर भारतीय किसान यूनियन (लोकतांत्रिक) ने चिंता जताई है। संगठन के पदाधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों से मुलाकात की और खेतों में हुए नुकसान की जानकारी ली। किसान नेताओं ने सरकार और जिला प्रशासन से प्रभावित किसानों की फसलों का तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।
भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामप्रकाश सिंह एडवोकेट, प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा और जिला उपाध्यक्ष शुभम अवस्थी ने संयुक्त रूप से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान पदाधिकारियों ने किसानों की समस्याएं सुनीं और प्राकृतिक आपदा के कारण कृषि क्षेत्र में हुए नुकसान पर चर्चा की।
संगठन ने किसानों की मांगों को लेकर 13 अक्टूबर 2026 को विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा भी की है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे किसान यूनियन के पदाधिकारी
भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक के पदाधिकारियों ने हाल ही में सीतापुर जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने किसानों से बातचीत कर खेतों की स्थिति, फसलों को हुए नुकसान और वर्तमान समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के सामने आर्थिक परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं। ऐसे में प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराना चाहिए।
शारदा और गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर से नुकसान का दावा
किसान नेताओं ने बताया कि शारदा और गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है।
संगठन के अनुसार बाढ़ के पानी और हालिया आंधी-तूफान के कारण किसानों की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
किसान नेताओं ने दावा किया कि कुछ प्रभावित क्षेत्रों में फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं।
हालांकि वास्तविक नुकसान का क्षेत्रफल और आर्थिक मूल्य प्रशासनिक सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट
किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि खेती किसानों की आजीविका का प्रमुख साधन है। फसल खराब होने से किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है।
संगठन के अनुसार बाढ़ और खराब मौसम से प्रभावित किसानों के सामने अगली फसल की तैयारी तथा परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने जैसी चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
किसान नेताओं ने कहा कि ऐसे समय में प्रभावित किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिलना आवश्यक है।
रामप्रकाश सिंह एडवोकेट ने की तत्काल मुआवजे की मांग
भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामप्रकाश सिंह एडवोकेट ने किसानों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए प्रशासन से तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों को हुए नुकसान का निष्पक्ष आकलन होना चाहिए।
उनके अनुसार किसानों को राहत देने के लिए प्रशासन को प्रभावित गांवों में सर्वे कराकर पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा उपलब्ध कराना चाहिए।
प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा बोले—किसानों की समस्याएं उठाता रहेगा संगठन
प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा ने किसानों को आश्वासन दिया कि भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक उनके हितों से जुड़े मुद्दों को शासन और प्रशासन के सामने उठाता रहेगा।
उन्होंने कहा कि किसानों को आपदा के समय सरकारी सहायता की आवश्यकता होती है। इसलिए राहत और मुआवजे की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
संगठन ने प्रभावित किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास जारी रखे जाएंगे।
जिला उपाध्यक्ष शुभम अवस्थी भी निरीक्षण में रहे शामिल
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण के दौरान जिला उपाध्यक्ष शुभम अवस्थी भी मौजूद रहे।
संगठन के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से किसानों की समस्याओं पर चर्चा की और नुकसान के संबंध में जानकारी जुटाई।
किसान नेताओं ने कहा कि जिला प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी करनी चाहिए, ताकि पात्र किसान राहत से वंचित न रह जाएं।
फसलों के नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराने की मांग
भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ और आंधी-तूफान से प्रभावित खेतों का जल्द सर्वे कराया जाए।
संगठन का कहना है कि नुकसान के आकलन में सभी प्रभावित किसानों की स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
किसान नेताओं ने यह भी मांग की कि सर्वे पूरा होने के बाद पात्र किसानों को नियमानुसार उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
13 अक्टूबर को विशाल धरना-प्रदर्शन की घोषणा
किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक ने 13 अक्टूबर 2026 को धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
संगठन के अनुसार आंदोलन के माध्यम से बाढ़ प्रभावित किसानों की समस्याओं और मुआवजे की मांग को शासन-प्रशासन के समक्ष उठाया जाएगा।
किसान नेताओं ने क्षेत्र के किसानों से प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।
हालांकि उपलब्ध जानकारी में धरना-प्रदर्शन के निश्चित स्थान और समय का उल्लेख नहीं किया गया है।
धरना-प्रदर्शन में उठाई जाएंगी ये प्रमुख मांगें
भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक ने प्रस्तावित आंदोलन के लिए तीन प्रमुख मुद्दे सामने रखे हैं।
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बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा: प्राकृतिक आपदा से फसलों को हुए नुकसान के लिए पात्र किसानों को उचित आर्थिक सहायता दी जाए।
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फसल नुकसान का निष्पक्ष सर्वे: प्रभावित गांवों और खेतों का समयबद्ध तथा पारदर्शी सर्वे कराया जाए।
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किसानों की लंबित समस्याओं का समाधान: कृषि और किसानों से संबंधित अन्य लंबित समस्याओं पर प्रशासन प्रभावी कार्रवाई करे।
किसान नेताओं ने एकजुटता की अपील की
संगठन के पदाधिकारियों ने किसानों से एकजुट रहने और अपनी समस्याओं को शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीके से प्रशासन के सामने रखने की अपील की।
किसान नेताओं का कहना है कि प्रभावित किसानों को राहत दिलाना संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक संगठन उनके मुद्दों को उठाता रहेगा।
प्रशासनिक सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया पर नजर
बाढ़ और खराब मौसम से फसलों को हुए नुकसान के बाद अब किसान संगठन ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
संगठन के अनुसार समय पर सर्वे और मुआवजे की व्यवस्था होने से प्रभावित किसानों को राहत मिल सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में प्रशासन द्वारा सर्वे पूरा किए जाने, कुल प्रभावित किसानों की संख्या या स्वीकृत मुआवजे की राशि का विवरण नहीं दिया गया है।
13 अक्टूबर के आंदोलन से पहले किसानों की मांगों पर जोर
भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन का प्रमुख उद्देश्य बाढ़ प्रभावित किसानों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामप्रकाश सिंह एडवोकेट, प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा और जिला उपाध्यक्ष शुभम अवस्थी ने प्रभावित किसानों के लिए शीघ्र सर्वे और आर्थिक सहायता की मांग दोहराई है।
अब 13 अक्टूबर के प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर क्षेत्र के किसानों की नजर रहेगी।
NHP Bharat News | अटरिया, सीतापुर, उत्तर प्रदेश