बिजनौर में लेखपाल पर रिश्वत मांगने का आरोप, जमीन के दाखिल-खारिज की रिपोर्ट न लगाने की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज
चांदपुर क्षेत्र के दो व्यक्तियों ने हल्का लेखपाल ब्रह्म सिंह रवि पर लगाए आरोप; 425 वर्ग गज जमीन के दाखिल-खारिज को लेकर विवाद, निष्पक्ष जांच और संपत्तियों के सत्यापन की मांग
बिजनौर, उत्तर प्रदेश। जनपद बिजनौर के चांदपुर क्षेत्र से राजस्व विभाग से जुड़ा एक मामला सामने आया है। दो व्यक्तियों ने जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए हल्का लेखपाल के खिलाफ मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी है।
मामला धामपुर तहसील के अंतर्गत मौजा कासमपुर लेखराज से संबंधित बताया गया है।
शिकायतकर्ता इकबाल अहमद और मोहम्मद शादाब ने आरोप लगाया है कि उन्होंने बैनामे के माध्यम से खरीदी गई जमीन का दाखिल-खारिज कराने के लिए संबंधित हल्का लेखपाल से संपर्क किया था, लेकिन उनसे कथित तौर पर रिश्वत की मांग की गई।
उनका कहना है कि पैसे देने से इनकार करने पर लेखपाल ने जमीन के हस्तांतरण से संबंधित रिपोर्ट लगाने से मना कर दिया।
शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि लेखपाल पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित लेखपाल का पक्ष भी उपलब्ध नहीं हो सका है।
425 वर्ग गज जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़ा मामला
शिकायतकर्ता इकबाल अहमद और मोहम्मद शादाब के अनुसार उन्होंने मौजा कासमपुर लेखराज में खसरा संख्या 54 से संबंधित 425 वर्ग गज जमीन बैनामे के माध्यम से खरीदी है।
जमीन खरीदने के बाद वे राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराने के लिए दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी कराना चाहते हैं।
इसी उद्देश्य से उन्होंने संबंधित राजस्व कर्मचारी से संपर्क किया।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक रिपोर्ट लगवाने के दौरान उनसे कथित तौर पर रिश्वत मांगी गई।
हल्का लेखपाल ब्रह्म सिंह रवि पर लगाए आरोप
शिकायतकर्ताओं ने संबंधित हल्का लेखपाल ब्रह्म सिंह रवि पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है।
उनके अनुसार जमीन के हस्तांतरण से संबंधित रिपोर्ट लगाने के लिए लेखपाल से संपर्क किया गया था।
शिकायत में आरोप है कि लेखपाल ने रिपोर्ट लगाने के बदले पैसे की मांग की।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने कथित रिश्वत देने से इनकार कर दिया।
इसके बाद लेखपाल द्वारा रिपोर्ट लगाने से मना किए जाने का आरोप लगाया गया है।
हालांकि कथित रिश्वत की रकम, मांग किए जाने की तारीख और बातचीत से संबंधित प्रमाणों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
इन आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
पैसे देने से इनकार करने पर रिपोर्ट न लगाने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जमीन की खरीद के बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए उन्हें संबंधित रिपोर्ट की आवश्यकता थी।
उनका आरोप है कि जब उन्होंने कथित रिश्वत देने से इनकार किया, तो लेखपाल ने रिपोर्ट लगाने से मना कर दिया।
इस कारण जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया प्रभावित होने की बात कही गई है।
हालांकि संबंधित आवेदन की वर्तमान स्थिति, रिपोर्ट लंबित रहने का आधिकारिक कारण और राजस्व विभाग के अभिलेखों की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसलिए यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि दाखिल-खारिज की प्रक्रिया किस स्तर पर लंबित है और इसके पीछे प्रशासनिक या कानूनी कारण क्या हैं।
मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत
इकबाल अहमद और मोहम्मद शादाब ने मामले को लेकर मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी है।
शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों से आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
शिकायत का पंजीकरण नंबर और पोर्टल पर उसकी वर्तमान स्थिति उपलब्ध नहीं है।
इसलिए यह पुष्टि नहीं हो सकी है कि शिकायत किस अधिकारी को जांच के लिए भेजी गई है या उस पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
लेखपाल की संपत्तियों की जांच की भी मांग
शिकायतकर्ताओं ने केवल कथित रिश्वत मांगने के मामले की जांच ही नहीं, बल्कि लेखपाल और उनके रिश्तेदारों के नाम दर्ज संपत्तियों की भी जांच कराने का अनुरोध किया है।
शिकायत में इन संपत्तियों की जानकारी और उनके अर्जन से संबंधित तथ्यों का सत्यापन करने की मांग की गई है।
हालांकि शिकायतकर्ताओं द्वारा संपत्तियों की जांच की मांग किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आय से अधिक संपत्ति होने का आरोप प्रमाणित हो चुका है।
किसी भी सरकारी कर्मचारी की संपत्ति और आय के स्रोत से संबंधित जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा लागू नियमों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
फिलहाल इस संबंध में किसी आधिकारिक जांच या उसके निष्कर्ष की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पुराने वायरल वीडियो का भी किया उल्लेख
शिकायतकर्ताओं ने अपनी शिकायत में यह दावा भी किया है कि संबंधित लेखपाल का पहले पैसे के लेनदेन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
उन्होंने इस कथित वीडियो का उल्लेख करते हुए मामले की जांच कराने की मांग की है।
हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता, रिकॉर्डिंग की तारीख, उसमें दिखाई देने वाले व्यक्तियों की पहचान और कथित लेनदेन की प्रकृति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में किसी वायरल वीडियो को बिना सत्यापन के रिश्वतखोरी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
यदि संबंधित वीडियो जांच में प्रस्तुत किया जाता है, तो उसकी प्रामाणिकता और मामले से संबंध का परीक्षण किया जाना आवश्यक होगा।
क्या है जमीन का दाखिल-खारिज?
जमीन की खरीद-बिक्री के बाद राजस्व अभिलेखों में संबंधित परिवर्तन दर्ज कराने की प्रक्रिया को सामान्यतः दाखिल-खारिज या नामांतरण कहा जाता है।
इस प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित नियमों के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित व्यक्ति का नाम दर्ज किया जाता है।
दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में संबंधित आवेदन, दस्तावेजों का परीक्षण और आवश्यक राजस्व रिपोर्ट जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।
हालांकि दाखिल-खारिज की प्रविष्टि अपने आप में जमीन के स्वामित्व संबंधी किसी विवाद का अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं होती।
ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेखों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर कार्रवाई की जाती है।
राजस्व रिपोर्ट लंबित होने के कारणों की जांच जरूरी
इस मामले में शिकायतकर्ताओं का मुख्य आरोप यह है कि कथित रिश्वत नहीं देने के कारण जमीन के हस्तांतरण से संबंधित रिपोर्ट नहीं लगाई गई।
इस आरोप की जांच के लिए संबंधित दाखिल-खारिज आवेदन का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होगा।
जांच में यह देखा जा सकता है कि आवेदन कब प्रस्तुत किया गया, उस पर कौन-कौन सी कार्रवाई हुई और रिपोर्ट किस कारण से लंबित रही।
इसके अतिरिक्त यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित जमीन के दस्तावेजों में कोई आपत्ति या अन्य कानूनी बाधा तो नहीं है।
इन तथ्यों के आधार पर ही रिपोर्ट लंबित रहने की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।
शिकायत की जांच में किन बिंदुओं का सत्यापन जरूरी?
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कुछ प्रमुख बिंदुओं का परीक्षण महत्वपूर्ण हो सकता है:
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खसरा संख्या 54 की जमीन से संबंधित बैनामा और राजस्व अभिलेख।
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425 वर्ग गज जमीन के दाखिल-खारिज आवेदन की वर्तमान स्थिति।
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संबंधित लेखपाल को रिपोर्ट तैयार करने या प्रस्तुत करने के लिए दिए गए निर्देश।
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कथित रिश्वत मांगने से संबंधित उपलब्ध साक्ष्य।
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रिपोर्ट लंबित रहने या न लगाए जाने का आधिकारिक कारण।
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मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायत और उसकी कार्रवाई रिपोर्ट।
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शिकायत में उल्लेखित कथित वायरल वीडियो की प्रामाणिकता।
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संपत्ति संबंधी शिकायत पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा जांच की आवश्यकता।
इन तथ्यों का सत्यापन होने से शिकायतकर्ताओं के आरोपों और संबंधित राजस्व कर्मचारी के पक्ष का मूल्यांकन किया जा सकेगा।
लेखपाल का पक्ष जानने का प्रयास, संपर्क नहीं हो सका
मामले में आरोपित हल्का लेखपाल ब्रह्म सिंह रवि का पक्ष जानने का प्रयास किया गया।
हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनसे संपर्क स्थापित नहीं हो सका।
इस कारण आरोपों पर उनकी प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो पाई है।
समाचार में संबंधित कर्मचारी का पक्ष शामिल होना महत्वपूर्ण है, ताकि मामले से जुड़े सभी पहलुओं को निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत किया जा सके।
उनकी प्रतिक्रिया मिलने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।
विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल यह मामला शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है।
रिश्वत मांगने, रिपोर्ट रोकने और संपत्ति संबंधी जांच की मांग जैसे विषयों पर किसी सक्षम प्राधिकारी की आधिकारिक जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।
ऐसी स्थिति में संबंधित लेखपाल को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
जांच के दौरान दस्तावेजों, संबंधित व्यक्तियों के बयानों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से कार्रवाई की लगाई गुहार
इकबाल अहमद और मोहम्मद शादाब ने मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल के माध्यम से प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
उनका कहना है कि खरीदी गई जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी कराई जाए।
साथ ही कथित रिश्वत मांगने और रिपोर्ट न लगाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
शिकायतकर्ताओं ने संबंधित लेखपाल और उनके रिश्तेदारों के नाम दर्ज संपत्तियों की जांच की भी मांग की है।
मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद कार्रवाई का इंतजार
बिजनौर जनपद की धामपुर तहसील के मौजा कासमपुर लेखराज से जुड़े इस मामले में दो शिकायतकर्ताओं ने हल्का लेखपाल पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्होंने खसरा संख्या 54 में 425 वर्ग गज जमीन खरीदी है, जिसका दाखिल-खारिज कराने के लिए संबंधित रिपोर्ट की आवश्यकता है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि रिश्वत नहीं देने पर रिपोर्ट लगाने से इनकार किया गया।
मामले में मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने और निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है।
फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेखपाल का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है और संबंधित विभाग की आधिकारिक कार्रवाई का विवरण भी सामने नहीं आया है।
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