बाराबंकी में युवक की आत्महत्या के बाद सूदखोरी और प्रताड़ना के आरोप, पिता ने तीन लोगों के खिलाफ SP से की शिकायत
रामनगर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम विछलखा का मामला; पिता का आरोप—ब्याज पर लिए रुपये के बदले कई गुना रकम और जेवर वसूलने के बाद भी बनाया जा रहा था दबाव, जमीन का बैनामा कराने और जान से मारने की धमकी देने की शिकायत
बाराबंकी, उत्तर प्रदेश। जनपद बाराबंकी के रामनगर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम विछलखा में हरिओम नामक युवक की फांसी लगाने से मौत होने का मामला सामने आया है। मृतक के पिता रामफेर ने अपने बेटे की आत्महत्या के पीछे कथित सूदखोरी, मारपीट, धमकी और लगातार मानसिक प्रताड़ना को जिम्मेदार ठहराते हुए पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया है।
पिता ने गांव के तीन व्यक्तियों पर आरोप लगाया है कि उनके बेटे ने ब्याज पर रुपये लिए थे, लेकिन कथित रूप से कई गुना रकम और कीमती सामान वसूलने के बावजूद उस पर कर्ज चुकाने का दबाव बनाया जाता रहा।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि युवक पर जमीन का बैनामा कराने के लिए दबाव डाला गया और उसके साथ मारपीट तथा जान से मारने की धमकी देने जैसी घटनाएं हुईं।
पिता के अनुसार इन परिस्थितियों से परेशान होकर हरिओम ने 8 अक्टूबर 2026 को आत्महत्या कर ली।
हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। युवक की मौत और उसके पीछे बताई जा रही परिस्थितियों की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्राम विछलखा में युवक की मौत से जुड़ा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार रामनगर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम विछलखा निवासी हरिओम की 8 अक्टूबर को फांसी लगाने से मौत होने की जानकारी सामने आई है।
युवक के पिता रामफेर ने इस घटना को लेकर पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है।
उन्होंने अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि उनका बेटा कुछ व्यक्तियों से लिए गए ब्याज के रुपये को लेकर लगातार दबाव और प्रताड़ना का सामना कर रहा था।
पिता का कहना है कि इसी कथित प्रताड़ना से आहत होकर उनके बेटे ने आत्महत्या कर ली।
फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल की पुलिस जांच और मृत्यु से संबंधित अन्य आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
तीन लोगों से ब्याज पर रुपये लेने की बात
मृतक के पिता रामफेर ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में गांव के राहुल मिश्रा, अवधेश मिश्रा और नितिन मिश्रा के नामों का उल्लेख किया है।
उनका आरोप है कि हरिओम ने इन व्यक्तियों से ब्याज पर रुपये लिए थे।
शिकायतकर्ता के अनुसार रकम लेने के बाद उसके बेटे से लगातार भुगतान की मांग की जाती रही।
हालांकि मूल रूप से कितनी धनराशि उधार ली गई थी, ब्याज की दर क्या थी और किस तारीख को रकम दी गई थी, इसका स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।
इन तथ्यों की पुष्टि के लिए संबंधित वित्तीय लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की जांच आवश्यक होगी।
कई गुना रकम वसूलने के बाद भी कर्ज बाकी बताने का आरोप
पिता रामफेर ने आरोप लगाया कि उनके बेटे से उधार ली गई रकम के मुकाबले कई गुना धनराशि वसूल की जा चुकी थी।
इसके बावजूद संबंधित व्यक्तियों द्वारा कर्ज समाप्त नहीं होने की बात कही जाती थी।
शिकायतकर्ता का दावा है कि भुगतान किए जाने के बाद भी हरिओम को लगातार परेशान किया जाता रहा।
हालांकि कथित भुगतान की कुल रकम और उसका कोई स्वतंत्र सत्यापित विवरण उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि वास्तविक उधारी कितनी थी, कितनी धनराशि लौटाई गई और दोनों पक्षों के बीच लेनदेन की क्या शर्तें थीं।
पांच हजार रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवर लेने का आरोप
पिता ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्तियों ने उनके बेटे से पांच हजार रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवर भी ले लिए थे।
रामफेर के अनुसार इतनी वसूली होने के बाद भी हरिओम को कर्ज से मुक्त नहीं बताया गया।
शिकायत में वर्णित इन आरोपों की पुष्टि के लिए नकद भुगतान, आभूषणों के कथित हस्तांतरण और संबंधित गवाहों की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कथित नकद भुगतान या जेवर दिए जाने से संबंधित कोई दस्तावेज अथवा अन्य साक्ष्य पुलिस को सौंपे गए हैं या नहीं।
3 अक्टूबर को घर बुलाकर मारपीट करने का आरोप
रामफेर ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि 3 अक्टूबर 2026 को उनके बेटे को संबंधित व्यक्तियों ने अपने घर बुलाया था।
पिता का दावा है कि इस दौरान हरिओम के साथ मारपीट की गई और उसे धमकाया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार यह घटना कथित उधारी और उसकी वसूली से जुड़ी थी।
हालांकि इस घटना के संबंध में किसी चिकित्सकीय परीक्षण, पुलिस शिकायत या स्वतंत्र गवाह का विवरण उपलब्ध नहीं है।
इसलिए मारपीट के आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
8 अक्टूबर को दोबारा धमकाने का आरोप
मृतक के पिता ने शिकायत में 8 अक्टूबर की घटना का भी उल्लेख किया है।
उनका आरोप है कि इस दिन भी संबंधित व्यक्तियों ने हरिओम को घर बुलाकर प्रताड़ित किया।
पिता के अनुसार युवक को जान से मारने की धमकी दी गई और उस पर दबाव बनाया गया।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इसी दिन हरिओम ने आत्महत्या कर ली।
हालांकि कथित धमकी और आत्महत्या के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध का निर्धारण पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।
जमीन का बैनामा कराने के लिए दबाव बनाने का आरोप
रामफेर ने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा उनके बेटे पर जमीन का बैनामा कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
शिकायतकर्ता का कहना है कि कथित उधारी को लेकर जमीन अपने नाम कराने की बात कही जा रही थी।
इस आरोप की जांच के लिए संबंधित जमीन के अभिलेख, कथित लेनदेन और दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किस जमीन का बैनामा कराने का कथित दबाव बनाया गया था या इस संबंध में कोई लिखित दस्तावेज तैयार किया गया था।
लगातार प्रताड़ना से परेशान होने का पिता का दावा
मृतक के पिता का आरोप है कि उनका बेटा कथित उधारी, भुगतान के दबाव और धमकियों के कारण परेशान था।
रामफेर के अनुसार बार-बार रुपये मांगने और जमीन का बैनामा कराने के कथित दबाव से हरिओम मानसिक रूप से प्रभावित था।
उन्होंने अपने बेटे की मौत के लिए इन परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराया है।
हालांकि युवक की मानसिक स्थिति और आत्महत्या के कारणों के संबंध में कोई स्वतंत्र आधिकारिक निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।
पुलिस जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कथित घटनाओं के संबंध में कौन-कौन से साक्ष्य उपलब्ध हैं और उनका युवक की मौत से क्या संबंध है।
8 अक्टूबर को हरिओम की मौत
पिता रामफेर के अनुसार उनके बेटे हरिओम ने 8 अक्टूबर 2026 को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
परिजनों ने इस घटना के पीछे कथित प्रताड़ना को कारण बताया है।
युवक की मृत्यु से संबंधित परिस्थितियों की पुष्टि के लिए पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल घटना के संबंध में पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।
रामनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं होने का आरोप
मृतक के पिता रामफेर ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि संबंधित थाने में उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
उनका कहना है कि उन्होंने मामले में कार्रवाई की मांग की, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई।
हालांकि रामनगर कोतवाली की ओर से इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि पुलिस को पहले किस तारीख को शिकायत दी गई थी और उस पर क्या कार्रवाई हुई।
इस संबंध में थाने के रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार
थाना स्तर पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए रामफेर ने बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया है।
उन्होंने अपने बेटे की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पिता ने शिकायत में नामजद व्यक्तियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की अपील की है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि कथित सूदखोरी, मारपीट और धमकियों की घटनाओं की जांच कर दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उधारी और कथित वसूली के रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण
इस मामले में उधार लिए गए रुपये और कथित रूप से वापस की गई रकम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
इसके लिए मूल उधारी, ब्याज की शर्तों और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड का परीक्षण महत्वपूर्ण हो सकता है।
यदि नकद भुगतान, बैंक लेनदेन या अन्य किसी माध्यम से धनराशि लौटाई गई थी, तो उससे संबंधित साक्ष्यों की जांच की जा सकती है।
इसी प्रकार सोने-चांदी के जेवर लेने के आरोप की भी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच की जानी आवश्यक है।
मारपीट और धमकी के आरोपों का सत्यापन जरूरी
पिता ने 3 अक्टूबर और 8 अक्टूबर की घटनाओं का उल्लेख करते हुए मारपीट तथा जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं।
इन घटनाओं की जांच के दौरान संबंधित व्यक्तियों के बयान, उपलब्ध गवाहों और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त यह भी स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि कथित घटनाओं के समय हरिओम कहां था और क्या किसी व्यक्ति को इन घटनाओं की जानकारी थी।
बिना जांच के इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप का कानूनी परीक्षण
युवक की मौत के बाद परिजनों ने कथित प्रताड़ना को आत्महत्या से जोड़ते हुए शिकायत की है।
हालांकि किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने का कानूनी आरोप स्थापित करने के लिए संबंधित कानून के आवश्यक तत्वों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण जरूरी होता है।
केवल उधारी का विवाद या परिजनों का आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार साबित नहीं करता।
इस मामले में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किसी आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण किया जा सकेगा।
नामजद व्यक्तियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण
पिता की शिकायत में राहुल मिश्रा, अवधेश मिश्रा और नितिन मिश्रा के नाम सामने आए हैं।
हालांकि इन व्यक्तियों की ओर से आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
निष्पक्ष समाचार प्रस्तुति और जांच के लिए उनका पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल उन्हें किसी अपराध का दोषी घोषित नहीं किया जा सकता।
पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी का इंतजार
मामले में पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि शिकायत पर जांच के आदेश, प्राथमिकी दर्ज किए जाने या किसी अन्य कार्रवाई का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
इसी प्रकार मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटना से संबंधित पुलिस के निष्कर्ष भी सामने नहीं आए हैं।
इन दस्तावेजों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
पिता ने बेटे की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की
बाराबंकी जिले के रामनगर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम विछलखा में हरिओम की मौत के बाद उसके पिता रामफेर ने तीन व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पिता का कहना है कि उनके बेटे ने ब्याज पर रुपये लिए थे और कथित रूप से कई गुना रकम, पांच हजार रुपये नकद तथा सोने-चांदी के जेवर देने के बावजूद उस पर दबाव बनाया जा रहा था।
शिकायत में 3 अक्टूबर और 8 अक्टूबर को मारपीट, धमकी और जमीन का बैनामा कराने के दबाव का भी आरोप लगाया गया है।
रामफेर ने आरोप लगाया है कि थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक से कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। युवक की मौत के कारणों और नामजद व्यक्तियों की कथित भूमिका का निर्धारण पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगा।
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