बहराइच। जिले के मिहींपुरवा (मोतीपुर) थाना क्षेत्र के ग्राम भगड़िया निवासी कुंदन सिंह ने पुलिस प्रशासन पर उनकी शिकायत का बिना प्रभावी कानूनी कार्रवाई के निस्तारण करने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा लंबे समय से उन्हें और उनके परिवार को कथित रूप से परेशान किया जा रहा था। इस संबंध में उन्होंने पहले स्थानीय पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़ित के अनुसार, थाना स्तर पर संतोषजनक कार्रवाई न होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (आईजीआरएस) पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत संख्या 92618000049233 के माध्यम से उन्होंने आरोप लगाया कि गांव निवासी राजू द्वारा उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और मामले में कानूनी कार्रवाई की जाए। यह शिकायत 1 जुलाई 2026 को दर्ज की गई थी।
शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच थाना मोतीपुर पुलिस को सौंपी गई। पुलिस द्वारा तैयार जांच रिपोर्ट के अनुसार, मौके का निरीक्षण किया गया, संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए गए तथा उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि जांच के दौरान लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी, जिसके आधार पर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।
वहीं, आईजीआरएस पोर्टल पर उपलब्ध फीडबैक के अनुसार, संबंधित पक्ष को थाने बुलाकर समझाइश दी गई और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया गया। पोर्टल पर दर्ज विवरण के अनुसार आवेदक को संतुष्ट बताते हुए 30 जुलाई 2026 को शिकायत बंद कर दी गई।
हालांकि, पीड़ित कुंदन सिंह ने इस कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए आरोप लगाया है कि उनकी शिकायत पर कोई वास्तविक कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि केवल थाने बुलाकर समझौता कराने से समस्या का समाधान नहीं हुआ और उत्पीड़न से जुड़े उनके आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक थी।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से प्राप्त शिकायत थाना प्रभारी को जांच के लिए अग्रेषित की गई थी। जांच रिपोर्ट पर संबंधित जांच अधिकारी तथा थाना प्रभारी के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं।
यह मामला एक बार फिर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (आईजीआरएस) पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इस मामले में पीड़ित ने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है, जबकि पुलिस की जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि न होने का उल्लेख किया गया है। मामले में दोनों पक्षों के दावों के बीच तथ्यात्मक स्थिति का अंतिम निर्धारण सक्षम प्राधिकारी या न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव होगा।