बदायूं के कासिमपुर में बेजुबान पशु के साथ बर्बरता का आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश; पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग
थाना कुंवरगांव क्षेत्र के कासिमपुर गांव में पशु के साथ गंभीर मारपीट का आरोप; बीच-बचाव करने पहुंचे ग्रामीणों से धक्का-मुक्की की शिकायत, डायल 112 पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
बदायूं, उत्तर प्रदेश। जनपद बदायूं के थाना कुंवरगांव क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कासिमपुर में एक बेजुबान पशु के साथ कथित क्रूरता और मारपीट का मामला सामने आया है। घटना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और पशु प्रेमियों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ व्यक्तियों ने एक पशु के साथ अमानवीय व्यवहार करते हुए उसकी बेरहमी से पिटाई की।
ग्रामीणों के अनुसार पशु को गंभीर पीड़ा पहुंचाई जा रही थी। इस दौरान कुछ लोगों ने हस्तक्षेप कर पशु को बचाने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि संबंधित व्यक्तियों ने बीच-बचाव करने पहुंचे ग्रामीणों के साथ भी धक्का-मुक्की की।
घटना के बाद ग्रामीणों ने थाना कुंवरगांव पुलिस और स्थानीय प्रशासन से आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने तथा घायल पशु का उचित उपचार कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने मौके पर पहुंची डायल 112 पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि घटना की परिस्थितियों, पशु की चोटों और आरोपित व्यक्तियों की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कासिमपुर गांव में पशु के साथ मारपीट का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार बदायूं जिले के कासिमपुर गांव में कुछ व्यक्तियों पर एक बेजुबान पशु के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित व्यक्तियों ने पशु के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया, जिससे उसे काफी पीड़ा हुई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने इस व्यवहार पर नाराजगी व्यक्त की।
ग्रामीणों के अनुसार किसी भी पशु के साथ इस प्रकार का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि पशु की प्रजाति, घटना की सटीक तारीख और मारपीट के कारणों का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।
दर्द से तड़प रहे पशु को बचाने पहुंचे ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार घटना के दौरान पशु को पीड़ा हो रही थी।
कुछ जागरूक ग्रामीणों ने पशु की स्थिति देखकर हस्तक्षेप करने का प्रयास किया।
उनका उद्देश्य कथित मारपीट को रोकना और पशु को सुरक्षित करना था।
ग्रामीणों का आरोप है कि पशु के साथ क्रूरता करने वाले व्यक्तियों ने उनकी बात नहीं मानी।
हालांकि घटनास्थल पर मौजूद लोगों के स्वतंत्र बयान और अन्य साक्ष्यों की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
बीच-बचाव करने वालों से धक्का-मुक्की का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब कुछ लोगों ने पशु के साथ मारपीट रोकने की कोशिश की, तो संबंधित व्यक्तियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की।
इस आरोप के बाद मामला केवल पशु के साथ कथित क्रूरता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बीच-बचाव करने वाले ग्रामीणों के साथ कथित अभद्र व्यवहार का विषय भी सामने आया है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच के दौरान इन आरोपों का भी सत्यापन किया जाए।
यदि किसी व्यक्ति के साथ मारपीट या धमकी की घटना हुई है, तो संबंधित साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
पशु प्रेमियों और ग्रामीणों में नाराजगी
घटना की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र के पशु प्रेमियों और ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त की है।
ग्रामीणों का कहना है कि बेजुबान पशु अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर सकते, इसलिए उनकी सुरक्षा के प्रति समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि किसी भी पशु के साथ अनावश्यक हिंसा या क्रूरता की शिकायत मिलने पर उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने संबंधित व्यक्तियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की मांग
कासिमपुर के ग्रामीणों ने थाना कुंवरगांव पुलिस से मामले की जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि पशु के साथ कथित मारपीट में शामिल व्यक्तियों की पहचान की जाए।
इसके साथ ही उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए।
हालांकि आरोपियों की पहचान, उनकी संख्या और किसी प्राथमिकी के दर्ज होने का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
घायल पशु के उचित उपचार की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से कथित रूप से घायल पशु के उपचार की व्यवस्था कराने की भी मांग की है।
उनका कहना है कि पशु की स्वास्थ्य स्थिति की जांच पशु चिकित्सक से कराई जानी चाहिए।
यदि पशु को चोटें आई हैं, तो उसका समय पर उपचार आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त पशु चिकित्सकीय परीक्षण से चोटों की प्रकृति और गंभीरता के संबंध में जानकारी मिल सकती है।
फिलहाल पशु का चिकित्सकीय परीक्षण हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
डायल 112 पुलिस की कार्रवाई पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घटना की सूचना पर डायल 112 पुलिस मौके पर पहुंची थी।
हालांकि उनका कहना है कि पुलिस द्वारा मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
यह आरोप ग्रामीणों के कथन पर आधारित है।
डायल 112 पुलिस की ओर से मौके पर की गई कार्रवाई का आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
इसलिए पुलिस के पहुंचने का समय, की गई कार्रवाई और संबंधित शिकायत के निस्तारण की स्थिति का सत्यापन आवश्यक होगा।
थाना कुंवरगांव पुलिस का पक्ष
उपलब्ध जानकारी के अनुसार थाना कुंवरगांव पुलिस की ओर से कहा गया है कि मामले का संज्ञान लिया जा रहा है।
पुलिस के कथित बयान के अनुसार तहरीर के आधार पर जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही पशुओं के प्रति क्रूरता करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने की बात कही गई है।
हालांकि इस बयान की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि और मामले में दर्ज शिकायत की वर्तमान स्थिति उपलब्ध नहीं है।
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 में क्या प्रावधान हैं?
भारत में पशुओं के साथ क्रूरता रोकने के लिए पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960) लागू है।
इस अधिनियम की धारा 11 में पशुओं के प्रति क्रूरता से संबंधित विभिन्न कृत्यों का उल्लेख किया गया है।
इनमें पशुओं को अनावश्यक दर्द या पीड़ा पहुंचाने वाले कुछ प्रकार के व्यवहार शामिल हैं।
किसी पशु को पीटना, अनुचित तरीके से प्रताड़ित करना या अन्य प्रकार की क्रूरता करना परिस्थितियों के अनुसार इस कानून के अंतर्गत आ सकता है।
हालांकि किसी घटना में कौन-सी धारा लागू होगी, यह पशु के साथ किए गए व्यवहार, चोटों की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करता है।
क्या पशु क्रूरता के सभी मामले गैर-जमानती होते हैं?
ग्रामीणों ने मामले में गैर-जमानती धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है।
लेकिन यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की प्रत्येक धारा के अंतर्गत आने वाला अपराध गैर-जमानती नहीं होता।
किसी विशेष मामले में अपराध की प्रकृति, लागू कानूनी प्रावधान और अन्य परिस्थितियों के आधार पर संबंधित धाराएं निर्धारित की जाती हैं।
यदि घटना में भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत भी कोई अपराध बनता है, तो पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित धाराएं लागू कर सकती है।
इसलिए बिना जांच के यह घोषित करना उचित नहीं होगा कि इस घटना में अनिवार्य रूप से गैर-जमानती धाराएं लागू होंगी।
भारतीय न्याय संहिता के प्रावधान भी हो सकते हैं प्रासंगिक
पशुओं को नुकसान पहुंचाने से संबंधित कुछ परिस्थितियों में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
हालांकि इनका लागू होना संबंधित घटना के तथ्यों और कानूनी आवश्यकताओं पर निर्भर करेगा।
यदि जांच में पशु को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने या अन्य संबंधित अपराध के साक्ष्य सामने आते हैं, तो पुलिस नियमानुसार कार्रवाई कर सकती है।
इस मामले में किसी विशेष धारा के लागू होने की आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
जांच में किन तथ्यों का सत्यापन जरूरी?
कासिमपुर में सामने आए इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दिया जा सकता है:
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घटना की सटीक तारीख, समय और स्थान।
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कथित रूप से घायल पशु की प्रजाति और वर्तमान स्थिति।
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पशु के साथ मारपीट करने वाले व्यक्तियों की पहचान।
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घटना के समय मौजूद ग्रामीणों के बयान।
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बीच-बचाव करने वाले लोगों के साथ कथित धक्का-मुक्की की जांच।
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पशु चिकित्सक द्वारा चोटों का परीक्षण।
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डायल 112 पर दी गई सूचना और पुलिस की कार्रवाई का रिकॉर्ड।
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संबंधित थाने में तहरीर और प्राथमिकी की वर्तमान स्थिति।
इन बिंदुओं का सत्यापन होने से घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं।
पशु की सुरक्षा और उपचार को प्राथमिकता देने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कानूनी कार्रवाई के साथ पशु की सुरक्षा और उपचार भी सुनिश्चित किया जाए।
यदि पशु घायल है, तो पशु चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।
साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की रोकथाम के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता है।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
कासिमपुर गांव में पशु के साथ कथित क्रूरता का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस की ओर से तहरीर के आधार पर जांच और नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि अभी तक प्राथमिकी, किसी गिरफ्तारी या पशु की चिकित्सकीय जांच से संबंधित आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इन तथ्यों की पुष्टि होने पर मामले की वर्तमान स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई
बदायूं जनपद के थाना कुंवरगांव क्षेत्र के ग्राम कासिमपुर में बेजुबान पशु के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि पशु को बचाने पहुंचे लोगों के साथ भी धक्का-मुक्की की गई।
ग्रामीणों ने डायल 112 पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इसके साथ ही घायल पशु का उचित उपचार कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ लागू कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
फिलहाल घटना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच, पशु चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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